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अपना भारत/न्यूज़ट्रैक Exclusive: झारखंड में बिहार फार्मूला लागू करने में जुटे लालू

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 16 Jun 2017 10:53 AM GMT

अपना भारत/न्यूज़ट्रैक Exclusive: झारखंड में बिहार फार्मूला लागू करने में जुटे लालू
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रांची: राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव अब झारखंड में भी वही फार्मूला लागू करना चाहते हैं जिसे अपनाकर उन्होंने बिहार में भाजपा को पटखनी दी थी। जदयू व कांग्रेस को एक मंच पर लाकर उन्होंने जिस तरह भाजपा को हराने में कामयाबी हासिल की अब वे झारखंड में भी विपक्षी दलों में वैसी ही एकता चाहते हैं। चारा घोटाले के सिलसिले में रांची पहुंचे लालू ने इसी कोशिश के तहत यहां अपने प्रवास के दौरान विपक्षी एका का जीतोड़ प्रयास किया। उनकी इस कोशिश का आने वाले दिनों में असर दिखने की संभावना है।

राज्य की राजनीति के जानकारों का मानना है कि विपक्षी एका के निकट भविष्य में महागठबंधन का रूप लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लालू ने रांची प्रवास के दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुबोध कांत सहाय, पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन व झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख बाबूलाल मरांडी से अलग-अलग बातचीत उन्हें एक मंच पर लाने का प्रयास किया ताकि भाजपा का मुकाबला किया जा सके।

भाजपा से लडऩे के लिए विपक्षी एका जरूरी

लालू ने इन नेताओं से बातचीत के दौरान भाजपा को कमजोर करने के लिए उन्हें एक मंच पर आने की जरुरत बताई। राजद प्रमुख ने बिहार में जदयू-राजद गठबंधन के मिले फायदे को भी विपक्ष के साथ साझा किया और इस फार्मूले को झारखंड की धरती पर उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के हाथ मिलाने पर ही भाजपा से लड़ा जा सकता है। लालू के इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों के नेताओं ने भी अपनी सैद्धांतिक सहमति जताई।

झारखंड के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस, झाविमो, राजद और जदयू, सभी दल अपनी जमीन की तलाश में जुटे हुए हैं। अविभाजित बिहार में नौ विधायकों के साथ झारखंड में मजबूत स्थिति रखने वाला राजद 2005 में सात और 2009 में महज पांच सीट ही बचा सका। 2014 में तो राजद का सूपड़ा ही साफ हो गया।

दूसरी ओर झाविमो के 2009 में 11 विधायक हुआ करते थे। 2014 में यह आठ पर सिमट आया, जिसमें से छह पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस भी राज्य में लगातार कमजोर होती जा रही है। सिर्फ झामुमो ही अपनी साख बचाने में कामयाब रह सका है मगर भाजपा से लडऩे के लिए उसे भी सहारे की तलाश है।

मरांडी व सोरेन को पटना आने का न्योता

झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन से मुलाकात के दौरान लालू ने दोनों नेताओं को अगस्त में पटना में प्रस्तावित महाजुटान में आने का न्योता दिया। लालू का मानना है कि भाजपा को देश में वहीं जीत मिली, जहां वोटों का बिखराव हुआ है। जहां विपक्ष ने एकजुटता दिखाई, वहां उसे विजय नहीं हासिल हो सकी। लालू का कहना है कि राजनीतिक दल इस तथ्य को अच्छी तरह समझ चुके हैं।

लालू ने सांप्रदायिक ताकतों को धूल चटाने के लिए पटना में 28 अगस्त को एक बड़ी रैली आयोजित की है जिसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भाग लेंगे।

मोदी व भाजपा पर बोला करारा हमला

रांची प्रवास के दौरा लालू प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह कर वोट बटोरने में सफल रही भाजपा के दिन अब पूरे होने वाले हैं। भाजपा के राज में देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है। सरकार की गलत नीतियों के कारण विभिन्न राज्यों में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। जिस तरह भाजपा के शाइनिंग इंडिया के नारे ने दम तोड़ दिया उसी तरह मोदी के मेक इन इंडिया का नारा भी दम तोड़ देगा। लालू ने कहा कि विपक्ष का बिखराव ही भाजपा की जीत का कारण है।

इसलिए विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा। झारखंड की चर्चा करते हुए कहा कि आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखकर झारखंड अलग हुआ। सोच थी कि यहां आदिवासी मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे इतर आदिवासियों का हित तो सधा नहीं, आदिवासी मुख्यमंत्री भी नहीं रहे। उन्होंने कहा कि एक ओर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा, दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री बाबा रामदेव से योग सीख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हर साल 12 हजार किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश की सीमा और सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसकर पाकिस्तानी आतंकवादी जवानों और आम जनता की हत्या कर रहे हैं और 56 इंच के सीने की बात करने वाली सरकार मौन है। गोरक्षा के नाम पर संघ अपना खेल खेल रहा है। केंद्र सरकार विपक्ष को दबाने का हर कुत्सित प्रयास कर रही है। अपने यहां पड़े छापों का जिक्र करते हुए लालू ने कहा कि बिना सिर-पैर के मेरी बेटी-दामाद के यहां छापेमारी कर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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