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चुनाव से पहले मोदी का अधिकारियों को संदेश, कहा- आयुष्मान भारत में नहीं होना चाहिए कोई फ्रॉड

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 5 Aug 2018 5:36 AM GMT

चुनाव से पहले मोदी का अधिकारियों को संदेश, कहा- आयुष्मान भारत में नहीं होना चाहिए कोई फ्रॉड
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लखनऊ: 2019 के लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, वैस-वैसे पीएम मोदी संग बीजेपी इसके लिए पुख्ता इंतजाम करती जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत इंश्योरेंस योजना को लेकर कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए पीएम मोदी ने सभी अधिकारियों और अफसरों को सख्त हिदायत दे दी है कि इसमें कोई गलती न हो।

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यही नहीं, पीएम ने अधिकारियों से ये भी बोल दिया है कि योजना को सफल बनाने के लिए उन्हें भरसक प्रयास करने होंगे। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार नहीं चाहती कि लोकसभा चुनाव से पहले किसी तरह की कोई गलती हो वरना इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलेगा। साथ ही, पीएम मोदी चाहते हैं कि उनकी इस योजना को ही चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाया जाए।

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बता दें, पीएम नरेंद्र मोदी की स्वप्निल योजना आयुष्मान भारत 15 अगस्त से शुरू हो जाएगी। मगर 15 को इसका फर्स्ट फेज ही लांच होगा जिसकी गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर आखिरी डेट रखी गई है। वहीं, पहले फेज के तहत यह योजना अभी 12 राज्यों में ही लांच होगी।

पहले फेज में ये राज्य शामिल नहीं

इस योजना के पहले फेज में उत्तर प्रदेश, बिहार,असम और पश्चिम बंगाल जैसे बडे राज्य शामिल नहीं हैं। कहा जा रहा है कि इन राज्यों को अभी तैयारी के लिए और समय चाहिए। ये राज्य करीब 6 महीने या फिर इससे अभी अधिक का समय ले सकते हैं।

योजना को आकार देने वाले डॉ। विनोद पॉल का कहना है कि योजना को पहले ही दिन लागू करने के लिए अभी सभी राज्य तैयार नहीं हैं, इसलिए शुरू में 12 राज्य ही शामिल होंगे। हालांकि, पहले दिन से ही मरीज चयनित अस्पतालों में इलाज के लिए जा सकेंगे जिसके तहत 5 लाख रुपए प्रति परिवार का बीमा तय किया गया है।

शर्तें कुछ इस तरह हैं

10 प्रतिशत जो अस्पताल NABH से मान्यता प्राप्त हो।

10 प्रतिशत जिन अस्पतालों में पीजी कोर्स चलता हो।

10 प्रतिशत जो पिछड़े जिलों में मौजूद हो।

10 प्रतिशत अगर राज्य अतिरिक्त मदद करें तो।

इसके अलावा हर अस्पताल में आयुष्मान मित्र होगा, जो कि योजना की जानकारी के तहत मरीजों की मदद करेगा। इन अस्पतालों का रेगुलर ऑडिट होगा और मॉनिटर भी किया जाएगा।

अलग से सिस्टम बनेगा सिस्टम

किसी भी तरह की शिकायत के लिए अलग से सिस्टम बनेगा। सरकार ने अप्रैल से ही ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के जरिए लोगों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इस योजना में सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों को पहले तवज्जो दी जाएगी। जिन राज्यों में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की बिड बराबरी पर छूटेगी वहां 50-50 बांट दिया जाएगा।

योजना करीब 12000 करोड़ रुपए की हो सकती है। जीएसटी लागू करने के दौरान जो गलतियां हुई थीं, सरकार उनको दोहराना नहीं चाहती है।

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