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नीतीश की सूची में चौंकाने वाले नाम, बालिका गृह कांड की आरोपी मंजू वर्मा को टिकट

नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को भी चुनाव मैदान में उतारा है। मंजू वर्मा 2018 के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की आरोपी हैं।

Shivani

ShivaniBy Shivani

Published on 8 Oct 2020 3:39 AM GMT

नीतीश की सूची में चौंकाने वाले नाम, बालिका गृह कांड की आरोपी मंजू वर्मा को टिकट
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अंशुमान तिवारी

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में विभिन्न सियासी दलों की ओर से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा का दौर जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने अपने कोटे की 115 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है। जदयू की सूची में दो बातों ने हर किसी को चौंकाया है।

नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को भी चुनाव मैदान में उतारा है। मंजू वर्मा 2018 के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की आरोपी हैं और उन्हें पार्टी ने खुद निकाल दिया था। ‌ दूसरी चौंकाने वाली बात यह रही कि वीआरस लेकर जदयू की सदस्यता लेने वाले पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को टिकट नहीं मिला है।

20 फीसदी महिलाओं को बनाया प्रत्याशी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार करीब 20 फ़ीसदी महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है। जदयू की 115 उम्मीदवारों की सूची में 22 महिलाएं शामिल है। इनमें 13 महिलाएं तो ऐसी हैं जिन्हें पार्टी ने पहली बार चुनाव मैदान में उतारा है।

2015 के चुनाव में जदयू ने 9 महिला प्रत्याशियों को ही टिकट दिया था मगर इस बार उनकी संख्या बढ़ाकर जदयू ने साबित कर दिया है कि वह महिला सशक्तिकरण का पक्षधर है।

मंजू वर्मा के टिकट ने सबको चौंकाया

जदयू की ओर से जिन महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा गया है उनमें एक नाम है ऐसा भी है जिसे देखकर हर कोई चौक गया। नीतीश की सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रह चुकीं मंजू वर्मा को भी पार्टी ने टिकट दिया है। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस कांड में 34 बच्चियों के साथ रेप किए जाने की पुष्टि हुई थी।

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विपक्ष को मिला हमले का बड़ा मौका

इस कांड को लेकर इतना विवाद पैदा हो गया था कि जदयू ने उन्हें पार्टी से निलंबित भी कर दिया था। विपक्षी दलों ने मंजू वर्मा को लेकर जदयू को खूब घेरा था मगर मंजू वर्मा इस बार फिर टिकट पाने में कामयाब रहीं।

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बता दें कि मंजू वर्मा इस समय जमानत पर बाहर हैं। उन्हें पार्टी ने चेरिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि मंजू वर्मा को टिकट देकर नीतीश कुमार ने विपक्ष को हमले का एक बड़ा मौका भी दे दिया है।

मंजू के पति का भी नाम आया था सामने

मंजू वर्मा को टिकट देने का फैसला इसलिए भी हैरान करने वाला माना जा रहा है क्योंकि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के समय वे समाज कल्याण विभाग की मंत्री थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि उनकी नाक के नीचे ही बालिका गृह कांड हुआ है।

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इस मामले में मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का भी नाम सामने आया था। उनके पति पर भी आरोपी बृजेश ठाकुर के साथ संपर्क रखने और अवैध हथियार मिलने के कारण कार्रवाई हुई थी।

गुप्तेश्वर पांडेय का कटा पत्ता

जदयू की सूची में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का नाम ना होना भी चौंकाने वाला है। गुप्तेश्वर पांडेय ने डीजीपी पद से वीआरएस लेने के बाद जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली थी और सियासी हलकों में इस बात की जोरदार चर्चा थी कि वे जदयू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे मगर सूची में उनका नाम नदारद है।

उनके बक्सर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही थी मगर यह सीट भाजपा के कोटे में चली गई। इसके बाद उम्मीद थी कि वे किसी और सीट पर चुनाव मैदान में उतारे जा सकते हैं मगर उनके अरमानों पर पानी फिर गया है।

फेसबुक पोस्ट में कही अपनी बात

जदयू की सूची जारी होने के बाद पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर अपनी बात कही है। उनका कहना है कि मेरा जीवन संघर्षों में ही बीता है और मैं जीवन भर जनता की सेवा में जुटा रहूंगा।

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पांडेय के मुताबिक मैं अपने शुभचिंतकों के फोन से परेशान हो गया हूं। वीआरएस लेने के बाद हर किसी को उम्मीद थी कि मैं चुनाव मैदान में उतारूंगा मगर मैं इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहा हूं, लेकिन इससे हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है।

लोगों से प्यार बनाए रखने का अनुरोध

पूर्व डीजीपी ने कहा कि लोगों को धीरज बनाए रखना चाहिए क्योंकि मेरा जीवन बिहार की जनता की सेवा में समर्पित है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि बक्सर के लोगों का खासतौर पर जिक्र करते हुए उनसे अनुरोध किया है कि वे अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें।

अब देखने वाली बात यह होगी कि गुप्तेश्वर पांडेय का अगला सियासी कदम क्या होता है। वैसे उन्हें नीतीश का करीबी माना जाता है और आगे चलकर किसी अन्य तरीके से भी उनका राजनीतिक समायोजन किया जा सकता है।

तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय को भी टिकट

जदयू की सूची में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय को परसा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है। चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या और तेज प्रताप के बीच अदालत में इस समय तलाक का मुकदमा चल रहा है।

चंद्रिका राय

दोनों परिवारों के बीच इस मुद्दे पर तनातनी बढ़ने के बाद चंद्रिका राय ने राजद छोड़कर जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली थी और उसी समय से उनके चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही थी। चंद्रिका राय समय-समय पर लालू के दोनों बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव पर निशाना साधते रहे हैं।

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