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संसद अविश्वास प्रस्ताव: दोस्ती से उपजे अविश्वास के चन्द्रबाबू

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 19 July 2018 4:40 AM GMT

संसद अविश्वास प्रस्ताव: दोस्ती से उपजे अविश्वास के चन्द्रबाबू
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लखनऊ: एक वक़्त था जब आन्ध्र प्रदेश के सीएम और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू एनडीए के घटक दलों के दोस्त हुआ करते थे लेकिन आज वो विपक्ष के साथ खड़े है। संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। 10 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आज नोटिस दे दिया है। इसे स्वीकार भी कर लिया गया है। शुक्रवार को इस पर चर्चा होगी।

दोस्ती से उपजे अविश्वास के बारे में newstrack.com आपको बताने जा रहा है कि ये रंग आखिर कैसे बदल गये।

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दिल्ली जाने पर कभी खाली हाथ नहीं लौटते थे

चंद्रबाबू नायडू की गिनती कभी एनडीए के घटक दलों में एक कद्दावर नेता के तौर पर होती थी। चाहें अटल बिहारी की सरकार रही हो या नरेंद्र मोदी की। दोनों से इनकी काफी नजदीकियां थी। उनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि वे दबाव बनाकर केंद्र सरकार से राज्य के लिए धन ले आते थे। इससे पहले भी जब अटल बिहारी वाजपेई के समय चंद्रबाबू नायडू दिल्ली आते थे तो कहा जाता था कि वे कभी भी खाली हाथ नहीं लौटते थे।

एनडीए से नाराजगी की ये है वजह

आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू अपने राज्य के लिए केंद्र सरकार से विशेष दर्जा देने की मांग कर रहे थे लेकिन बीजेपी ने उनकी मांग को ठुकरा दिया। जिसके बाद नाराज होकर नायडू ने अमरावती में प्रेस कांफ्रेंस करके गठबंधन के बजाय सरकार छोड़ने का एलान कर दिया।

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राजनीतिक फायदे के लिए चला ये दांव

जानकारों की माने तो टीडीपी प्रमुख चन्द्रबाबू नायडू ने गठबंधन के बजाय सरकार छोड़ने का फैसला राजनीतिक फायदे को ध्यान में रखते हुए किया।

इस दांव को चलने के पीछे एक खास कारण ये भी था कि बीजेपी यदि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्ज को मंजूर या नामंजूर कर देती तो दोनों ही सूरत में फायदा चंद्रबाबू नायडू को ही मिलता। क्योंकि आंध्र प्रदेश में अगले ही साल लोक सभा और विधान सभा दोनों के चुनाव है।

ऐसे में अगर केंद्र सरकार उनकी मांग को मान लेती तो वे इलेक्शन के समय जनता के बीच जाकर इस बात के लिए सारा क्रेडिट खुद ले लेते और अगर सरकार इसे नामंजूर कर देती तो वे जनता के बीच जाकर सहानुभूति लेने की कोशिश करते।उन्हें ये मैसेज देने की कोशिश करते कि केंद्र सरकार ने उनके राज्य को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया इसलिए उन्हें सरकार में बीजेपी से अलग होना पड़ रहा है।

सदन में दलगत स्थिति

  • कुल सदस्‍यों की संख्‍या : 545
  • लोकसभा में मौजूदा सदस्‍यों की संख्‍या : 535 सांसद

सत्‍ता पक्ष का गणित

  • एनडीए : कुल संख्या 310
  • भाजपा : 273 सांसद
  • शिवसेना : 18
  • एलजेपी : 06
  • अकाली दल : 04
  • अन्‍य : 09 सदस्य

(सरकार यह मानकर चल रही है कि प्रस्‍ताव पर बीजेडी, टीआरएस और एआइएडीएमके का समर्थन भले न मिले पर ये पार्टियां तटस्थ रह सकती हैं।)

विपक्ष का गणित

  • विपक्ष: 222 सदस्य
  • कांग्रेस एंड यूपीए: 63
  • एआइएडीएमके : 37
  • टीएमसी : 34
  • बीजेडी : 20
  • टीडीपी : 16

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