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अखिलेश के 'स्‍मार्ट फोन' ने विरोधी दलों को किया बेचैन, चुनाव आयोग से शिकायत की तैयारी

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Published on 6 Sep 2016 5:15 AM GMT

अखिलेश के स्‍मार्ट फोन ने विरोधी दलों को किया बेचैन, चुनाव आयोग से शिकायत की तैयारी
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akhilesh yadav

Suyash Mishra Suyash Mishra

लखनऊ: यूपी चुनाव की घोषणा से पहले सीएम अखिलेश के 'वोट दो और स्मार्ट फोन लो' के स्टंट से विरोधी पार्टियों में खलबली मच गई है। सियासत में अखिलेश के इस नए पैतरे ने सबकी नींद उड़ा दी है। विरोधी दल इसे वोटरों को खरीदने की कोशिश बता रहे हैं। इतना ही नहीं वह इसके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत करने की बात भी कह रहे हैं।

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सपा के इस स्टंट से विरोधी दलों की बेचैनी भी वाजिब है, क्योंकि पिछले चुनाव में मुफ्त में युवाओं को लैपटॉप देने का वादा कर सपा ने यूपी में सरकार बना ली थी। विधानसभा चुनाव करीब है और यूपी सीएम अखिलेश यादव ने मुफ्त में 'स्मार्ट फोन' देने की घोषणा करके अपना दांव खेल दिया है। राजनीति में चुनाव से पहले ऐसे लुभावने वादे आम बात हैं, लेकिन अखिलेश के इस नए स्‍टंट ने सबको बेचैन कर दिया है।

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दरअसल अखिलेश ने सोमवार को यूपी के लोगों स्‍मार्ट फोन देने की घोषणा की है। इसमें खास बात यह है कि सीएम ने कहा है कि चुनाव जीतने के बाद साल की दूसरी छमाही में वह फोन बांटेंगे, लेकिन इसके लिए अभी से रजिस्‍ट्रेशन करने होंगे। एक महीने के अंदर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। अखिलेश की इस रणनीति से विरोध्‍ाियों में खलबली है। कुछ लोगों का मानना है कि अलिखेश रजिस्‍ट्रेशन की आड़ में वोटरों को खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रदेश प्रवक्‍ता विजय बहादुर पाठक ने क्‍या कहा

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्‍ता विजय बहादुर ने newstrack से बातचीत में कहा कि अखिलेश की घोषणा महज छलावा है। वह पहले भी बेरोजगारी भत्‍ता देने का वादा करके लोगों को ठग चुके हैं। अखिलेश के वादों पर अब यूपी के नौजवानों को भरोसा नहीं रहा। सीएम अखिलेश यादव पिछले चुनाव में ही युवाओं को प्रलोभन और झूठे वादे देकर विश्‍वसनीयता खो चुके हैं। वह चुनाव से पहले छात्रों को लैपटाॅप देने का वादा करते हैं और जीतने के बाद नियम व शर्तें लगा देते हैं। उनके इस छल को अब यूपी की जनता समझ चुकी है। 'स्‍मार्ट फोन' का वादा करके वह यूपी के लोगोें को लुभा नहीं सकते।

बिहार चुनाव में बीजेपी नेता ने क्‍या किया था

चुनाव से पहले वोटरों को खींचने के लिए लुभावने वायदे आम बात हैं इससे पहले बिहार चुनाव के दौरान भी ऐसा देखा गया था। बिहार में बीजेपी के सीनियर नेता सुशील मोदी ने कथित तौर पर बीजेपी कैंडिडेट आनंद भूषण पांडेय के पक्ष में एक चुनावी रैली की थी। इसमें संबोधन के दौरान उन्होंने मतदाताओं को लैपटॉप, रंगीन टेलीविजन और धोती-साड़ी देने का वायदा किया था। इसके बाद सुशील मोदी के खिलाफ भबुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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स्मार्टफोन पाने वालों का ऐसे होगा चुनाव

-समाजवादी स्मार्ट फोन के लाभार्थियों के चयन का तरीका पूरी तरह से पारदर्शी होगा।

-इस योजना के लाभार्थियों को राज्य सरकार के किसी ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

-आॅनलाइन लाभार्थी के चयन के बाद स्मार्ट फोन सीधे लाभार्थी के घर भेज दिया जाएगा।

-जिससे इसमें किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार संभव न हो सके।

-इच्छुक लाभार्थी को कम से कम हाईस्कूल पास होना चाहिए।

-इसके लिए एक महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा।

-इसके आॅनलाइन आवेदन के लिए उत्तर प्रदेश का नागरिक होना जरूरी है।

आवेदक की न्यूनतम आयु 18 साल होना जरूरी

-आवेदक की न्यूनतम आयु 01 जनवरी, 2017 को कम से कम 18 वर्ष अवश्य होनी चाहिए।

-सरकारी सेवा में काम करने वाले व्यक्ति आवेदन के पात्र नहीं होंगे।

-इसके अलावा यदि आवेदक का अभिभावक भी सरकारी सेवा में कार्यरत है तो आवेदन नहीं किया जा सकता।

-यदि कोई आवेदक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है और उसके परिवार की सालाना इनकम 02 लाख रुपए से कम है, तभी आवेदन किया जा सकेगा।

-आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन करते समय केवल हाईस्कूल प्रमाण-पत्र की स्कैन काॅपी अपलोड करना जरूरी होगा।

-इसके अलावा रजिस्ट्रेशन के समय और कोई डाक्यूमेंट्स नहीं देने होंगे।

-स्मार्ट फोन का वितरण साल 2017 की दूसरी छमाही में फर्स्टकम/रजिस्ट्रेशन फर्स्ट सर्व की व्यवस्था के माध्यम से किया जाएगा।

-आवेदक को रजिस्ट्रेशन के समय एप्लीकेशन में दी गई सूचना को सेल्फ अटेस्ट करना होगा।

-इसके साथ ही एप्लीकेशन के प्रत्येक स्तर पर एमएमएस के माध्यम से अलर्ट मैसेज देने की भी व्यवस्था की जाएगी।

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