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CM योगी बोले- लोग जीते जी अपना स्मारक बनवाते थे, हम घर दे रहे हैं

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amanBy aman

Published on 17 Aug 2017 10:09 AM GMT

CM योगी बोले- लोग जीते जी अपना स्मारक बनवाते थे, हम घर दे रहे हैं
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LIVE: CM ने किया 'फसल ऋण मोचन योजना' का शुभारंभ, राजनाथ भी मौजूद
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लखनऊ: प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में आज (17 अगस्त) को स्मृति उपवन में 'फसल ऋण मोचन योजना' का शुभारंभ दीप जलाकर किया। इस दौरान लगभग 7,500 किसानों को फसल ऋण मोचन योजना का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके बाद सभी जिलों के प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में 5 सितम्बर को प्रमाण पत्र देंगे।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम आदित्यनाथ के अलावा इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य, सूर्य प्रताप शाही, राजेश अग्रवाल, आशुतोष टंडन आदि मौजूद हैं।

केशव ने बताया किसानों का दर्द

इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा, 'मेरा सवा बीघा खेत 5 हजार रुपए में गिरवी रख दिया गया। उसे छुड़ाने में 10 साल लग गए। मैं पिताजी के साथ चाय की दुकान पर जाता था। जब मैं खेत पर काम करता था। तब जो सबसे सड़ी सब्जी होती थी। पिताजी कहते थे, कि घर ले चलो, सब्जी बनेगी। सड़ी सब्जियां घर में बनने जाती थी। जब अध्यक्ष बन गया तब यह सारी बात समझ आई। यह कार्यक्रम, किसानों की पूजा है।'

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शीश झुककर अभिनंदन करता हूं

इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंच से कार्यक्रम को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, 'परंपरा है कि स्वागत एकतरफा नहीं होनी चाहिए। आपका शीश झुककर अभिनंदन करता हूं। चुनाव के समय कुछ पत्रकार मित्रों ने कहा, कि वादे तो किए जाते हैं, लेकिन पूरे नहीं होते। नेताओं की कथनी और करनी में अंतर होने के कारण जनता का विश्वास कम होता गया।'

सीएम की बड़ी सफलता

गृहमंत्री ने आगे कहा, 'सीएम योगी ने किसानों के कर्ज माफ करने में सफलता हासिल की है। भारत छोड़ो आंदोलन में आगे बढ़कर सबसे बड़ा काम किसानों ने ही किया था।'

पहले खाद, यूरिया खरीदने में लाठी खानी पड़ती थी

राजनाथ बोले, 'जब मैं वर्ष 2000 में प्रदेश का मुख्यमंत्री था, तब किसानों के उपज की खरीद हुई थी। अब 15 साल बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने उस काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, जब तक लागत मूल्य में कमी नहीं आएगी, किसानों की उपज लाभकारी नहीं होगी। पहले यूरिया, खाद की खरीद में लाठी तक खानी पड़ती थी। पर अब किसानों को लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ता है।'

पहले 20 फीसदी किसान ही बीमा कराते थे

गृहमंत्री बोले, 'पीएम ने कहा कि साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर देंगे। पहले फसल बीमा योजना से 100 में से 20 किसान ही बीमा कराते थे। अब सिर्फ 2 फीसदी रबी, डेढ़ फीसदी खरीफ और 5 फीसदी नकदी फसलों के लिए प्रीमियम देना पड़ता है। बाकी प्रीमियम सरकार के खाते से जमा होती है। पहले ज्यादा प्रीमियम होने के कारण ही किसान पीएम फसल बीमा योजना का लाभ नहीं उठा पाते थे।'

अब किसानों के लिए पोर्टल

उन्होंने कहा, 'अब किसानों के लिए एक ऐसा पोर्टल शुरू किया जा रहा है, जहां किसान का बेटा कंप्यूटर पर बैठकर देख सकता है कि उसकी उपज का मूल्य कहां ज्यादा मिल रहा है। वह वहां अपना उत्पाद बेच सकता है।'उन्होंने कहा, कि 'देश की सभी मंडियों को 'ई मंडी' से जोड़ा जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि फसल का सही दाम कहां मिल सकता है।

नए यूपी के साथ होगा नए भारत का निर्माण

राजनाथ बोले, 'भारत में प्रति हेक्टेयर 2,000 किलो अनाज का उत्पादन होता है, जबकि चीन में उसी एक हेक्टेयर में 6,000 किलो अन्न का उत्पादन करता है। अब हमारे किसान भी 6,000 किलो अन्न पैदा कर सकेंगे। इस तरफ कदम बढ़ाया जा रहा है। जब तक नए यूपी का निर्माण नहीं होगा, तब तक नए भारत का निर्माण नहीं हो सकता।'

किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में नहीं रहा किसान

इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित किया। बोले, 15 सालों में किसान किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में नहीं रहा। तब बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, कि यूपी में सबसे पहला काम किसानों के फसली ऋण माफ करने की होनी चाहिए। हमने पहले कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया। ऋण माफी लखनऊ से शुरू की गई है।'

सरकार अहसान नहीं कर रही, ये तो आपका हक़ है

सीएम बोले, यह सरकार किसानों पर कोई अहसान नहीं कर रही। आपका हक देने का काम कर रही है। यूपी में बीजेपी सरकार में किसान को बीज, खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा। 86 लाख किसानों के वेरिफिकेशन की कार्यवाही की जा रही है जिसमें 70 लाख से ऊपर पूरी हो चुकी है। त्रिस्तरीय व्यवस्था के अलावा किसान को कहीं भटकना नहीं पड़े, ऐसी व्यवस्था की गई है।

योजनाएं तुष्टिकरण की भेंट चढ़ाई गई

सीएम ने कहा, 'जिन किसानों का खाता आधार से लिंक हो गया है, उन्हें लोन माफी जल्द मिल जाएगा। पहले की सरकारों में योजनाओं को तुष्टिकरण की भेंट चढ़ाई गई। प्रशासन 15 वर्ष में भूल गया था, कि किसान की उपज का सही दाम मिलना चाहिए। पहली बार आलू का समर्थन मूल्य घोषित हुआ। आलू को मंडी शुल्क से मुक्त करने का फैसला किया। किसान स्टोर में रखे आलू को अगर कहीं और बेचना चाहे तो सरकार सुविधा देगी।' आदित्यनाथ बोले, हम वैसे 10 हजार से अधिक परिवारों को जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है उन्हें सोलर पंप देने जा रहे हैं। किसानों को फ्री बिजली का कनेक्शन उपलब्ध कराया है।

लोग जीते जी अपना स्मारक बनावाते थे, हम घर दे रहे हैं

सीएम आदित्यनाथ ने कहा, 'यूपी में नेताओं के बड़े-बड़े मकान बन जाते थे। जीते जी लोग अपना स्मारक बना देते थे। अब सरकार 2019 तक 24 लाख गरीबों को घर देने जा रही है। 6 लाख किसानों के खातों में आवास की पहली किश्त जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा, हम राजस्व के खातों को आधार से लिंक करने जा रहे हैं। अब फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा। अब जो भी किसान के खेत को धोखाधड़ी से हड़पने की कोशिश करेगा, वह जेल की सलाखों के पीछे जाएगा।'

भू माफियाओं पर कस रहे नकेल

योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'यूपी पशुपालन को योजना बनाने को कहा है। इसलिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स बनाए हैं। गौचर भूमि को कब्जे मुक्त करना है। गो सेवा आयोग से कहा है, कि वह पहले शहरी क्षेत्र और बुंदेलखंड को भू माफियाओं से मुक्त कराएं। अनुरोध है, कि आपलोग गो संपत्ति को दूध पीकर सड़क पर ना छोड़ दें।'

सब्सिडी का भुगतान सीधे किसानों के खाते में देंगे

सीएम ने कहा, 'पहले वर्षों तक एक गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो पाता था। हम 23 हजार 5 सौ करोड़ भुगतान कर चुके हैं। 2,000 करोड़ बचे हैं। उसके भुगतान के लिए प्रतिबद्ध हैं। पीएम साहब ने कहा था कि सब्सिडी का भुगतान हम चीनी मिलों के खातों में नहीं देंगे, बल्कि सीधे किसानों के खाते में देंगे।'

लद गए परिवारवाद की राजनीति के दिन

उन्होंने कहा, पहले की सरकार के लिए सत्ता व्यवसाय थी। ट्रांसफर-पोस्टिंग उनका धंधा था। यूपी में परिवारवाद की राजनीति के दिन लद गए हैं। अब किसान और युवा केंद्रित राजनीति होगी।

अपर मुख्य सचिव वित्त की तारीफ

सीएम योगी ने अपर मुख्य सचिव वित्त अनूप चंद्र पांडेय की तारीफ करते हुए कहा, 'इस योजना को कार्यान्वित करने में इन्होंने पूरी लगन से काम किया।' बता दें कि यहां 50 किसानों को प्रमाण पत्र मिलने हैं।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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