मोहन भागवत के खिलाफ इस दिग्गज नेता ने दर्ज कराया केस, जानें पूरा मामला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी हनुमंत राव ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ नेता ने यह कहकर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

हैदराबाद : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी हनुमंत राव ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई।

उन्होंने आरोप लगाया कि संघ नेता ने यह कहकर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है कि सभी 130 करोड़ भारतीय ‘हिंदू’ हैं। भागवत ने 25 दिसंबर को यहां एक जनसभा में कहा था कि धर्म और संस्कृति पर ध्यान दिये बिना, जो लोग राष्ट्रवादी भावना रखते हैं और भारत की संस्कृति तथा उसकी विरासत का सम्मान करते हैं, वे हिंदू हैं और आरएसएस देश के 130 करोड़ लोगों को हिंदू मानता है।

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राज्यसभा के पूर्व सदस्य राव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया, ‘भागवत के बयान से न केवल मुस्लिमों, ईसाइयों, सिखों, पारसियों आदि की भावनाओं और आस्थाओं को ठेस पहुंची है, बल्कि यह भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ भी है।

उन्होंने कहा, ‘इससे जनता के बीच सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा और इससे हैदराबाद में कानून एवं व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है.’

एलबी नगर पुलिस थाने के निरीक्षक अशोक रेड्डी ने संपर्क किए जाने पर बताया कि उन्हें कांग्रेस नेता से एक शिकायत मिली थी और इस संबंध में कानूनी राय ली जा रही है कि इसमें कोई मामला बनता है या नहीं।

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कौन हैं मोहन भागवत?

पेशे से पशु चिकित्सक और 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का जन्म 11 सितंबर 1950 को चंद्रपुर में हुआ था। पिता मधुकरराव भागवत चंद्रपुर क्षेत्र के संघ प्रमुख थे, साथ ही उन्होंने गुजरात के प्रांत प्रचारक के रूप में भी कार्य किया।

चार भाई-बहन में सबसे बड़े मोहन भागवत ने अकोला से पशु चिकित्सा में पढाई पूरी की। 1975 में इमरजेंसी के दौरान भागवत पशु चिकित्सक का काम छोड़ पूर्णकालिक स्वयंसेवक बन गये।

इसके बाद वह नागपुर और विदर्भ क्षेत्र के प्रचारक भी रहे। 1991 में वे आरएसएस के शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अखिल भारतीय प्रमुख बने और 21 मार्च 2009 को के.एस. सुदर्शन की जगह सरसंघचालक मनोनीत हुए। भागवत को सबसे कम उम्र में सरसंघचालक बनने का सम्मान हासिल है।

आरक्षण पर समीक्षा को बताया था जरुरी

आपको बता दें कि भागवत ने संघ के मुखपत्र पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर में दिए इंटरव्यू में भागवत ने आरक्षण नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

उनका कहना था कि आरक्षण का राजनीतिक उपयोग किया गया है और सुझाव दिया कि ऐसी अराजनीतिक समिति गठित की जाए जो यह देखे कि किसे और कितने समय तक आरक्षण की जरूरत है।

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