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बिहार NDA में अंदरूनी खींचतान, नीतीश ने भाजपा को घेरा तो मांझी भी समर्थन में कूदे

बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए की सरकार तो जरूर बन गई है मगर एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया और फिर उसके बाद जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए इशारों-इशारों में बीजेपी पर हमला बोला।

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AshikiBy Ashiki

Published on 11 Jan 2021 4:16 AM GMT

बिहार NDA में अंदरूनी खींचतान, नीतीश ने भाजपा को घेरा तो मांझी भी समर्थन में कूदे
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पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए की सरकार तो जरूर बन गई है मगर एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया और फिर उसके बाद जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए इशारों-इशारों में बीजेपी पर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पता ही नहीं चला कि उनका कौन दोस्त है और कौन दुश्मन। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए में सीट बंटवारे में हुई देरी से भी जदयू को काफी नुकसान उठाना पड़ा। सियासी गलियारों में यह तेज चर्चा है कि नीतीश कुमार ने भाजपा को लेकर यह बयान दिया है। नीतीश के बाद एनडीए में शामिल हम के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी नाम लिए बिना भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि नीतीश के खिलाफ चुनाव के दौरान साजिश की गई।

नीतीश नहीं कर पा रहे मंत्रिमंडल विस्तार

बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं कि एनडीए में अंदरूनी खींचतान चल रही है। नीतीश कुमार ने पिछले दिनों में मीडिया से बातचीत में मंत्रिमंडल में विस्तार हो रही देरी के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया था। उनका कहना था कि भाजपा की ओर से अभी तक इस बाबत कोई प्रस्ताव न दिए जाने के कारण वह चाहकर भी नए मंत्रियों को शपथ नहीं दिला पा रहे हैं। नीतीश ने कहा कि बिहार में उनके कार्यकाल के दौरान पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार में इतनी देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले के कार्यकाल के दौरान वे हमेशा शुरुआत में ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया करते थे।

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जदयू प्रत्याशियों ने भाजपा को कोसा

इसके बाद जदयू प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के दौरान चुनाव हारने वाले कई प्रत्याशियों ने खुलकर कहा कि उनकी हार का कारण लोक जनशक्ति पार्टी नहीं बल्कि भाजपा रही। मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के समधी और जदयू के वरिष्ठ नेता चंद्रिका राय ने तो खुले तौर पर कहा कि भाजपा की ओर से विश्वासघात के कारण ही उन्हें चुनावी मैदान में पराजय झेलनी पड़ी। चंद्रिका राय के अलावा बोगो सिंह, जय कुमार सिंह, ललन पासवान, अरुण मांझी और आसमां परवीन ने चुनाव के दौरान भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से कोई मदद नहीं मिली और उन्हें भाजपा से गठबंधन का कोई फायदा नहीं मिला।

लोजपा से ज्यादा भाजपा जिम्मेदार

मटिहानी विधानसभा सीट से चुनाव हारने वाले जदयू प्रत्याशी बोगो सिंह ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान एक नारा लगातार गूंज रहा था-एलजेपी-बीजेपी, भाई-भाई। उन्होंने कहा कि इस नारे का खामियाजा जदयू प्रत्याशियों को भुगतना पड़ा। उन्होंने खुलकर कहा कि जदयू को हराने में लोजपा से ज्यादा जिम्मेदार भाजपा रही क्योंकि राज्य में लोजपा का कोई वजूद ही नहीं है।

नहीं हो सकी दोस्त और दुश्मन की पहचान

जिस वक्त जदयू के नेता भाजपा के खिलाफ आग उगलने में जुटे हुए थे, उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह मौन होकर सबकी बातें ध्यान से सुन रहे थे। बाद में बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने भी इस बात का उल्लेख किया कि चुनाव के दौरान दुश्मन और दोस्त की सही पहचान ही नहीं हो पाई। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के समय पार्टी की बातें जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाई जिसका असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि पार्टी कार्यकर्ता लोगों तक सरकार द्वारा किए गए कामों को नहीं पहुंचा सके।

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सीट बंटवारे में देरी से नुकसान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि एनडीए में सीट बंटवारे में हुई देरी की वजह से भी जदयू को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पांच महीने पहले ही सीट बंटवारे का काम पूरा कर लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि जदयू को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि लोगों ने हमें समर्थन जरूर दिया मगर मेरे और मेरी पार्टी के खिलाफ झूठा प्रचार भी किया गया।

नीतीश कुमार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने भी एनडीए के दलों में आंतरिक विरोध और साजिशों का जिक्र किया है। रविवार को किए गए ट्वीट में मांझी ने कहा कि राजनीति में गठबंधन धर्म को निभाना अगर सीखना है तो नीतीश कुमार से सीखा जा सकता है। गठबंधन में शामिल दलों के आंतरिक विरोध और साजिशों के बावजूद उनका सहयोग करना नीतीश को राजनीतिक तौर पर महान बनाता है उन्होंने नीतीश कुमार को सलाम भी ठोका है। नीतीश के बयान के बाद मांझी का यह ट्वीट सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Jitan Ram Manjhi,

तेजस्वी को बताया बिहार का भविष्य

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में मांझी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को बिहार का भविष्य बताया है। मांझी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि तेजस्वी यादव जी, आप बिहार के भविष्य हैं। आपको अनर्गल बयान से बचना चाहिए उन्होंने तेजस्वी यादव से सवाल भी किया है कि वे मंत्री परिषद के विस्तार पर इतना क्यों उतावले हो रहे हैं। सही वक्त पर सबकुछ हो जाएगा।

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जदयू में उमेश कुशवाहा की ताजपोशी

इस बीच नीतीश कुमार ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश जदयू की कमान उमेश कुशवाहा को सौंप दी है। जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौंका दिया। वशिष्ठ नारायण सिंह ने अस्वस्थ होने के चलते प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की तो उनकी जगह 2020 के विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेलने वाले उमेश सिंह कुशवाहा की ताजपोशी कर दी गई। कुशवाहा को गत विधानसभा चुनाव में महनार विधानसभा सीट से राजद प्रत्याशी बीना सिंह से हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बयानों से एनडीए में खींचतान उजागर

बिहार की सियासत में पिछले दिन कुछ दिनों से चल रही घटनाएं और बयानबाजी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सियासी जानकारों का कहना है कि इन बयानों से साफ है कि एनडीए में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। एनडीए के घटक दलों के बीच आपसी खींचतान चल रही है। हालांकि भाजपा नेताओं की ओर से खुलकर कुछ नहीं कहा जा रहा है मगर जदयू नेताओं के बयानों से साफ है कि गाड़ी पटरी पर चलती नहीं दिख रही है। अरुणाचल प्रदेश की घटना के बाद अब एक बार फिर जदयू नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी में भाजपा के रवैये को लेकर नाराजगी दिख रही है।

रिपोर्ट: अंशुमान तिवारी

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