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देखें वीडियो: मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) ने कैसे रखा पॉलिटिक्स में कदम?

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NewstrackBy Newstrack

Published on 14 Sep 2020 9:00 AM GMT

देखें वीडियो: मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) ने कैसे रखा पॉलिटिक्स में कदम?
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मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) की अवैध सम्पत्तियों पर सूबे की योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। इसको मद्देनज़र रोज़ाना मुख़्तार पर कई तरह की ख़बरें सामने आती हैं। मुख़्तार अंसारी के बारे में अगर बात करें तो वो डॉन होने के साथ ही साथ विधायक भी था। उसके ऊपर क़रीब 40 से ज़्यादा मुकदमें दर्ज हैं।

लेकिन, डॉन मुख़्तार अंसारी कैसे नेता मुख़्तार अंसारी बना, इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। तो आइये आपको ले चलते हैं; मुख़्तार अंसारी के डॉन से नेता बनने के सफर पर...

डॉन मुख़्तार अंसारी से नेता मुख़्तार अंसारी

70 के दशक में पूर्वांचल की स्थिति को सुधारने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने कई योजनाओं का ऐलान किया। इन योजनाओं के ठेके पाने के लिए वहां कई गैंग्स पनपने लगे। दो बड़े गुट उभरकर सामने आए। इनमें मुख़्तार मकनु सिंह के गैंग से ताल्लुकात रखता था। दूसरी तरफ साहिब सिंह का गैंग था।

सैदपुर में एक प्लॉट को लेकर दोनों गैंग्स की भिड़ंत हुई और यहीं से यह दुश्मनी शुरू हो गई। कहानी गैंग्स ऑफ़ वासेपुर जैसी चलने लगी। रोज़ाना मार-काट, कोयला, रेलवे, शराब का ठेका औऱ गुंडा टैक्स को लेकर आपस में दोनों गैंग भिड़ते रहते।

इधर, साहिब सिंह गैंग से अलग होकर बृजेश सिंह ने अपना एक अलग गैंग बना लिया। अब फिरौती, रंगदारी, किडनैपिंग, और करोड़ों की ठेकेदारी को लेकर मुख़्तार और ब्रजेश सिंह के गैंग में भिड़त होती रहती।

जिसके बाद 1995 के करीब मुख़्तार अंसारी पॉलिटिक्स में उतर आया और चार बार मऊ से MLA बना। पहला चुनाव बसपा से और आगे दो निर्दलीय। 1990 से 2008 के करीब तक बनारस, गाजीपुर और जौनपुर दोनों गैंग की दुश्मनी के बीच अपराध का गढ़ बन गया।

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