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सपा का साइकिल निशान फ्रीज कर सकता है चुनाव आयोग, अगले हफ्ते होगी दावों की सुनवाई

चुनाव आयोग के पूर्व सेक्रेटरी केजे राव ने बातचीत में कहा कि दोनों गुटों के बीच चुनाव चिह्न का टकराव जारी रहने की सूरत में सपा के साइकिल चुनाव चिह्न को फ्रीज़ करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

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zafarBy zafar

Published on 3 Jan 2017 8:19 AM GMT

सपा का साइकिल निशान फ्रीज कर सकता है चुनाव आयोग, अगले हफ्ते होगी दावों की सुनवाई
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उमाकांत लखेड़ा

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के चुनाव निशान साइकिल पर दावे को लेकर निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। मुलायम सिंह यादव गुट की ओर से आयोग को सोमवार को सौंपी गई शिकायत के बाद आयोग के कानूनी सलाहकार एसके मेंहदीरत्ता ने newstrack.com से बातचीत में इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि अभी सपा के दूसरे गुट की ओर से दावे और शिकायत मिलने के बाद ही आयोग सिम्बल विवाद पर उचित फैसला करेगा।

फ्रीज हो सकता है सिंबल

इस बीच चुनाव आयोग के पूर्व सेक्रेटरी केजे राव ने दावा किया कि सपा में जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं, उससे स्पष्ट लगता है कि पार्टी पूरी तरह दो खेमों में बंटने जा रही है। उनके मुताबिक सपा के हालात ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं कि पार्टी में असली पार्टी कौन बनेगी इसका विवाद बढ़ेगा। यह पूछे जाने पर कि इस तरह किसी दल के दो टुकड़े होने पर आयोग के सामने चुनाव चिह्न के दावे को लेकर क्या विकल्प बचते हैं तो राव ने कहा कि दोनों गुटों के बीच चुनाव चिह्न का टकराव जारी रहने की सूरत में सपा के साइकिल चुनाव चिह्न को फ्रीज़ करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

सवालों के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि साइकिल चुनाव चिह्न पर असली दावेदारी तय करने के लिए आयोग को कम से कम 3 से 4 माह का समय लगेगा। उनका कहना है कि इस तरह के विवादों पर पिछली परिपाटी यही रही है कि पार्टी के स्वामित्व पर अंतिम फैसला होने तक आगामी चुनाव में अपनी पहचान बनाए रखने और चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग पार्टी के नाम के साथ ही अलग-अलग चुनाव चिह्न बांट दिए जाते हैं।

अखिलेश गुट का दावा

आयोग के सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न और पार्टी पर वर्चस्व की दावेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श के लिए निर्चाचन आयोग की पूरी बेंच की बैठक एक सप्ताह में हो सकती है। ऐसे आसार हैं कि इस बैठक में सपा के दोनों गुटों को बुलाकर पार्टी संगठन, बहुमत और दल में विभाजन के सवालों पर उनके तर्कों व दावों का संज्ञान लिया जाएगा।

मुलायम गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग में यह दावा पेश किया कि 1 जनवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश व रामगोपाल यादव गुट द्वारा लखनऊ में बुलाया गया पार्टी का आपात प्रतिनिधि सम्मेलन अवैध है तथा जिन लोगों ने इसे आयोजित किया था वे लोग सपा का हिस्सा नहीं हैं। इस बीच अखिलेश यादव करीबी सूत्रों ने बताया कि उनकी ओर से मंगलवार सुबह 11.30 बजे निर्वाचन आयोग को कानूनी तौर पर इस बात के पुख्ता सबूत दिए जाएंगे कि मुलायम गुट पूरी तरह अल्पमत में है तथा पार्टी के 95 प्रतिशत से ज्यादा कार्यकर्ता, पदाधिकारी व राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर चुके हैं।

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