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निकाय चुनाव-2017 : सरकार बनाने की लड़ाई का हो चुका है आग़ाज़

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 11 Nov 2017 8:17 AM GMT

निकाय चुनाव-2017 : सरकार बनाने की लड़ाई का हो चुका है आग़ाज़
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शहर की सरकार बनाने की लड़ाई का आग़ाज़ हो चुका है। इस लड़ाई में सबसे तेज ताल ठोंकी है सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने। सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा बहुजन समाजपार्टी भी खासतौर पर लखनऊ नगर निगम में बहुत गंभीरता से लड़ रही है। इस चुनाव को गंभीरता से ले रही भाजपा के लिए न सिर्फ यह सियासी दंगल है बल्कि नाक की लड़ाई है।

इस चुनाव के जरिए ही 8 महीने पहले आई योगी सरकार का लिटमस टेस्ट होगा वहीं यह भी साबित करना होगा कि बीजेपी आने वाले समय के चुनाव और चुनौतियों के लिए देश के सबसे अहम सूबे में कितनी तैयार है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली बार महिला मेयर होगी और भाजपा ने दांव लगाया है अपनी पुरानी कार्यकर्ता संयुक्ता भाटिया पर। समाजवादी पार्टी ने आचार्य नरेन्द्र देव की पौत्रवधू मीरावर्धन को उतारा है, जबकि बहुजन समाजपार्टी ने वरिष्ठ अधिवक्ता बुलबुल गोदियाल को अपना प्रत्याशी बनाया है।

कांग्रेस ने श्रीमती प्रेमा अवस्थी को प्रत्याशी बनाया है। यहां से आम आदमी पार्टी प्रियंका माहेश्वरी भी भाग्य आजमा रही हैं। इन सभी प्रत्याशियों से अपना भारत संवाददाता अनुराग शुक्ल और सुधांशु सक्सेना ने उनके विजन को लेकर लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसी बातचीत के प्रमुख अंश -

संयुक्ता भाटिया : भाजपा

  • क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि 74वां संविधान संशोधन क्या है?
  • जी हां मैं पूरी तरह से जानती हूं कि 74वां संविधान संशोधन क्या है। मैं इस बात से भी वाकिफ हूं कि मेयरों के पास फिलहाल कोई शक्ति नहीं है पर केंद्र में भी हमारी सरकार है और राज्य में भी हमारी सरकार है, ऐसे में पैसों की कमी तो कोई समस्या होगी ही नहीं। जहां तक अधिकारों की बात है। केंद्र और राज्य दोनों जगह ऐसी सरकार है जो जनता का हित चाहती है ऐसे में अधिकारों की जरुरत ही नहीं पड़ती है।
  • आपके हिसाब से लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या क्या है ?

    सबसे बड़ी समस्या जलभराव है, जल निस्तारण की समस्या है। शहर की गंदगी बहुत बड़ी समस्या है । मोदी जी ने भी इसी वजह से एक हमें आयाम दिया है। स्वच्छ भारत बनाए और स्वस्थ भारत बनाएं।

  • क्या आपने कोई ब्लूप्रिंट बनाया है ?

    देखिए ब्लूप्रिंट के बारे में अभी बात करना थोड़ी सी जल्दबाजी होगी। मैं इससे पहले कभी नगर निगम की राजनीति में नहीं रही, मैं हमेशा संगठन में रही हूं। लेकिन मुझे समस्याओं के बारे में पता है मुझे पता है कि समस्याएं क्या हैं और उनका इलाज कैसे किया जाएगा।

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  • आपको क्या लगता है नगर निगम की समस्या क्या है ?

    नगर निगम की सबसे बड़ी समस्या है कि नगर निगम के पास पैसों की कमी है। जैसा कि अखबारों में भी सबने पढ़ा और मैंने भी अध्ययन किया है कि नगर निगम में पैसे की कमी के कारण आवश्यकताएं पूरी नहीं की जा पा रही हैं।

  • पैसों की समस्या के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास करेंगी?

    देखिए केंद्र सरकार से भी उत्तर प्रदेश को सीधे पैसे मिल गए हैं। केंद्र योजनाओं को सीधे फंड कर रहा है। जैसे कि लखनऊ में चलने वाली मेट्रो ट्रेन के लिए केंद्र सरकार ने बहुत फंड दिया बहुत मदद की। हमारे राज्य में भी बेहद संवेदनशील सरकार है और जनता के हित के लिए हर काम करने को तैयार है।

  • आपका एजेंडे में क्या ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए कुछ है?

    देखिए अभी आपने जिस समस्या का नाम लिया वही हमारे लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या है। हम कहीं भी जाते हैं तो हमारा आधे से ज्यादा समय ट्रैफिक जाम में चला जाता है इसकी सबसे बड़ी वजह अधिक्रमण है ऐसे में ठेले वालों, रेहड़ी वालों लोगों को एक बेहतर पुनर्वास पैकेज के तहत कहीं और किसी तरह का नुकसान न हो और शहर की समस्या से मुक्ति मिल सके।

  • अतिक्रमण हटाना वोट बैंक से खेलना भी है क्या आप इसके लिए तैयार हैं?

    मैं सिर्फ अतिक्रमण हटाने की बात नहीं कर रही हूं बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या को एक बड़ी समस्या के तौर पर देख रही हूं। मैंने अतिक्रमण हटाने की बात अगर कर रही है तो मैं सब से बात करने के बाद ही इसे लागू करवाऊंगी।

  • आप लखनऊ की पहली महिला मेयर बनेंगी, महिला सुरक्षा कितना एहम मुद्दा है।

    महिलाओं की सुरक्षा मेरे लिए सबसे सबसे अहम है क्योंकि महिलाओं में असुरक्षा की भावना बहुत बड़ी है। पिछली सरकारों ने पिछले 15 साल से सब कुछ नहीं किया।

मीरावर्धन : सपा

  • क्या आप संविधान के 74वें संविधान संशोधन के बारे में जानती हैं?

    जी हां। मुझे पता है। हालांकि अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। यह निकाय की स्वायत्ता के लिए बहुत जरूरी है।

  • तो आपको यह भी पता होगा कि मेयर के पास सीमित शक्तियां हैं तो ऐसे में आप निर्वाचित होने पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन कैसे करेंगी?

    मेयर की शक्तियां सीमित होती हैं लेकिन फिर भी मैं उन सीमित शक्तियों का व्यापक प्रयोग करके जनहित के कामों को सही ढग़ से करवाने का काम करूंगी।

  • लखनऊ मेयर पद के लिए आप जनता के बीच क्या विजन लेकर उतरी हैं। जनता को कैसे आश्वस्त करेंगी?

    मेरा विजन होगा समुचित विकास। जनता अपने मेयर तक बिना हिचक पहुंचे और उनकी हर छोटी-बड़ी समस्या का त्वरित निस्तारण हो। मेरी प्राथमिकता रहेगी।

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  • आपकी नजर में लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

    मैं लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या पानी की अनुपलब्धता को मानती हूं। मैं जनता को आश्वस्त करूंगी कि अगर मुझे मेयर के रूप में सेवा का अवसर मिला तो मैं पानी को इतनी मात्रा में उपलब्ध करवा दूंगी कि जनता को जहां एक ओर साफ पानी मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर जनता को उसे समुचित रूप से संचय करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी।

  • लखनऊ में पहली बार महिला मेयर चुना जाना है। आपका महिलाओं को लेकर क्या विजन है?

    मुझे इस बात की खुशी है कि लखनऊ में पहली बार एक महिला लखनऊ नगर निगम के महापौर के पद को सुशोभित करेगी। जहां तक महिलाओं की बात है तो मेरा ऐसा मानना है कि शहर की अंधेरी गलियों में अपराध जन्म लेता है। इसके लिए उनकी कोशिश रहेगी कि शहर की कोई भी गली अंधेरे में डूबी न रहे।

प्रियंका माहेश्वरी : आप

  • क्या आप संविधान के 74 वें संविधान संशोधन के बारे में जानती हैं?

    जी हां। मैं इसके लिए एक्शन प्लान बनाकर एक प्रस्ताव लाऊंगी। मेरी कोशिश है कि इसे संघर्ष करके लागू करवाया जाए। जिससे निकाय स्वायत्ता के साथ जनहित के कामों को कर सकें।

  • तो आपको यह भी पता होगा कि मेयर के पास सीमित शक्तियां हैं तो ऐसे में आप निर्वाचित होने पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन कैसे करेंगी?

    मेयर के पास सीमित अधिकार हैं। सीमित अधिकारों में काम करना हमें आता है। दिल्ली में हमने यही किया है। सीमित अधिकारों में भी जो काम किया है। वह जनता के सामने है। जितना काम हमने किया है, उतना किसी ने नहीं किया। यहां भी पिछले 22 सालों में काम नहीं हुआ है। हम काम करने के लिए मैदान में उतरे हैं।

  • लखनऊ मेयर पद के लिए आप जनता के बीच क्या विजन लेकर उतरी हैं। जनता को कैसे आश्वस्त करेंगी?

    लखनऊ में पिछले 22 सालों से काम न के बराबर हुआ है। चारों तरफ गंदगी का अंबार है। जनता की बड़ी समस्याएं तो छोडि़ए छोटी समस्याओं को नहीं निस्तारित किया जा रहा है। मैं जनता से अपील करूंगी कि हमारे दिल्ली के कामों को देखकर हमें वोट करे। हम अपने घोषणा पत्र के एक एक वादे को हर संभव पूरा करेंगे।

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  • आपकी नजर में लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

    शहर की सबसे बड़ी समस्या है सफाई। इसके साथ-साथ लोगों की छोटी-छोटी समस्याएं जैसे पब्लिक प्लेस पर टायलेट का अभाव, कूड़ा निस्तारण की सही प्रणाली का अभाव, नालियों की सफाई न होना, टूटी हुई सडक़े, वॉटर एटीएम का अभाव आदि का निस्तारण नहीं हो पाता है। बतौर मेयर जनता से सीधा संवाद करके उनकी समस्याओं का निस्तारण करना ही मेरी प्राथमिकता रहेगी।

  • लखनऊ में पहली बार महिला मेयर चुना जाना है। आपका महिलाओं को लेकर क्या विजन है?

    लखनऊ के लिए यह हर्ष का विषय है कि पहली महिला मेयर यहां निर्वाचित होने जा रही है।बतौर महिला सार्वजनिक स्थानों जैसे बस स्टापों, मार्केट प्लेस आदि जगह महिलाओं के लिए बायो ग्रीन टायलेट बनवाने का काम करेंगी। इसके साथ लखनऊ को सीसीटीवी से लैस करेंगी। इसके साथ साथ वह अंधेरी गलियों को रोशन करने का काम करेंगी। ताकि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

बुलबुल गोदियाल : बसपा

  • बुलबुल जी आप अपर महाधिवक्ता रही हैं अचानक से कोर्टरुम के बाहर जनता के बीच दलील पेश करने की कैसे सोची?

    देखिए मैं सबसे पहले जनता को नमस्कार करना चाहती हूं। मैं मायावती जी का भी शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुझे अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाया, मुझे मौका दिया कि मैं लखनऊ की जनता के सामने अपना पक्ष रख सकूं। बहुत दिनों से मेरे जेहन में यह बात थी कि मैं वकालत के पेशे से निकलकर समाज के लिए कुछ कर सकूं, सामाजिक जीवन में जा सकूं। मायावती जी ने मुझे यह मौका दिया है उसके लिए मैं उनके आभारी हूं। मेरा मानना है कि जब तक पढ़े-लिखे अच्छे विचारों के लोग सामाजिक जीवन में नहीं आएंगे राजनीति का भला नहीं हो सकता और इसके बिना हमारे शहर का, हमारे देश का उत्थान संभव नहीं हुआ। बहुत सोच-समझ कर मैंने यह कदम उठाया है।

  • क्या आपको पता है संविधान का 74 वां संशोधन का ठीक ढंग से लागू ना होना महापौर को शक्तिविहीन बना रहा है?

    देखिए यह बात सही है कि जिस तरह से 74 वें संशोधन में कहा गया है उस तरह का पावर मेयर को नहीं है। वैसी शक्ति नहीं है जैसा कि हम चाहते हैं या हम समझ रहे हैं। कहीं ना कहीं मैं समझती हूं कि भले ही कानूनी हक ना हो लेकिन कोई अच्छा काम करने के लिए पब्लिक ओपिनियन बनाने के लिए और जनता के लिए काम करने के लिए कोई किसी को रोक नहीं सकता। अगर हम ठीक ढंग से संवैधानिक मर्यादाओं में रहते हुए अपने प्रयास जारी रखेंगे तो हमारे शहर को मिलने वाले लाभ कोई भी संवैधानिक प्रतिष्ठान उसे रोक नहीं सकता है।

  • इस कमी को पूरा कैसे करेंगी?

    मेरी कोशिश तो यह भी होगी कि हम जनता जनता के दबाव और जनता की शक्ति का उपयोग करें। हम सरकार को बाध्य करें कि वह 74 वें संशोधन के अनुरूप महापौरों को शक्ति दे। जिस तरह से दूसरे राज्यों में महापौर के पास शक्ति है उसी तरह इस राज्य में भी महापौर को ताकत मिले और वह जनता के लिए काम कर सके।

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  • आपके हिसाब से लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

    लखनऊ की बहुत सारी समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या तो यहां का हर जगह जबरदस्त अतिक्रमण है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या कही जा सकती है की सडक़ों के हालात। बहुत खराब है। सडक़ें टूटी-फूटी हैं, सडक़ों पर लाइट नहीं है वह अंधेरे में डूबी रहती हैं और गंदगी बहुत ज्यादा है। एक बहुत बड़ी समस्या कचरा निस्तारण की है। अपने घरों को तो साफ कर देते हैं लेकिन शहर को कूड़ेदान बना दिया गया है।

  • आप की दूसरी प्राथमिकताएं क्या हैं?

    पेड़ की बहुत कमी है। पेड़-पौधे बात कम हो गए हैं प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है। अगर किसी को हल्की से खांसी हो जा रही है तो उसे 15-20 तक दवाओं का भी असर नहीं हो रहा है। ऐसा इस वजह से क्योंकि यहां पर प्रदूषण बहुत ज्यादा है और हवाओं में ज़हर खुला हुआ है। मेरा बहुत बड़ा एजेंडा साफ सफाई, और गंदगी मिटाने पर होगा। चाहे वह नाले की हो, चाहे वह सडक़ की हो या फिर घर के आसपास की।

  • क्या आपने कुछ ब्लूप्रिंट भी बनाया है?

    देखिए अगर आप ब्लूप्रिंट की बात करें तो ब्लूप्रिंट जैसा कुछ तो अभी मैंने नहीं बनाया है लेकिन मुझे समस्याएं पता है, उनका समाधान पता है और उनको करने का तरीका आता है। अगर एजेंडे की बात की जाय तो मैं पूरी तरह से मायावती जी का जो संदेश है सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय उसके आधार पर ही अपना काम करूंगी। यही मेरे ब्लूप्रिंट का आधार होगा। जनता से जुडक़र काम करना चाहूंगी।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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