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कौन कमबख्‍त कहता है – अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, यहां तो पूरा शहर ही हिल गया...

sudhanshu

sudhanshuBy sudhanshu

Published on 16 Sep 2018 10:37 AM GMT

कौन कमबख्‍त कहता है – अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, यहां तो पूरा शहर ही हिल गया...
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कानपुर: आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है। लेकिन कानपुर शहर को पिछले 27 घंटों से एक अकेले शख्‍स ने हिला कर रख दिया है। जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर आम जनमानस तक उससे मनुहार करते नजर आ रहे हैं। लेकिन उस शख्‍स पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं कानपुर नगर में एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधन से नाराज किशन भट्ट की। किशन भट्ट अकेले ही आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं l यह लगभग 27 घंटे से आमरण अनशन पर बैठे हैं। किशन की जिद है कि जब तक एससी-एसटी कानून में बदलाव नहीं किया जायेगा मै यहाँ से नहीं हटूंगा l इसके लिए चाहे मुझे अपनी जान भी क्यों न गंवानी पड़ जाये। आमरण अनशन के बाद से जिला प्रशासन के भी हाथ पैर फूले हुए हैं। जहां एक ओर पारिवारिक सदस्य और अन्य मिलने जुलने वाले लोग भी उसे समझाने के प्रयास में जुटे हैं। वहीं दूसरी तरफ आम जनमानस को उसकी बातों में सच्‍चाई नजर आ रही है। लोग उसकी खुलकर तारीफ भी कर रहे हैं।

ये है पूरा मामला

बर्रा थाना क्षेत्र स्थित बर्रा में रहने वाले किशन भट्ट एम्आर है। बर्रा के शास्त्री चौक स्थित लाल बहादुर शात्री की प्रतिमा के नीचे बीते शनिवार को एक बैनर लगाकर आमरण अनशन पर बैठ गया। बैनर में लिखा हुआ है बीजेपी हटाओ, देश बचाओ एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करो। पहले लोग समझ नहीं पाए कि ये कौन शख्स बैठा हुआ है, लेकिन जब उसने पूरी रात उसी स्थान पर बिता दी और दिन में भी उसी स्थान पर बैठा हुआ देखा गया तो लोगों ने पास में जाकर पूछा। इस पर उसने बताया कि मैं तब तक आमरण अनशन पर बैठा रहूँगा, जब तक इस कानून में संशोधन नहीं हो जाता है। इसके लिए चाहे मुझे अपनी जान क्यों न गंवानी पड़ जाये।

ये कैसा देश बना रहे नेता

किशन भट्ट ने बताया कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को कैसा देश बनाकर दे रहे हैं। जहां जातिवाद पर इतना कठोर कानून बना दिया कि जिसने वो अपराध किया भी न हो तो उसे जेल की सजा कटनी पड़ेगी। उन्होंने एक उदहारण देते हुए कहा कि यदि मैं बाइक से सड़क पर जा रहा हूँ। मेरी बाइक की टक्कर किसी राह चलते इन्सान से हो जाये और मेरी उससे कहा सुनी हो जाये और वो इन्सान दलित वर्ग का हो तो वो मुझ पर एससी-एसटी लगवा सकता है। राह चलते मुझे तो नहीं पता कि वो इन्सान हिन्दू है, मुस्लिम है या दलित वर्ग का है। वोट बैंक की राजनीति में हमारे राजनेता इस तरह का अँधा कानून बना रहे। वो भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर संसद में पास करा रहे हैं।

क्या इसी दिन के लिए हमने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को चुना था। मैंने भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था, लेकिन जब से ये कानून पास हुआ है, समझ में आ गया कि ये पार्टी अब सवर्णों की नहीं रही है। दलित वर्ग भी इसी देश के नागरिक हैं और हमारे भाई बंधू हैं, उनसे भी हमारी सहानुभूति है। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के द्वारा हिन्दू समाज को भी बांटने का काम किया जा रहा है।

आने वाली पीढ़ी को हमें विकासशील नहीं बल्कि विकसित देश देने के विषय में सोचना चाहिए था। हमारे राजनेता आज भी जातिवाद का जहर घोलने का काम कर रहे हैं। हम लड़ना नहीं चाहते हैं फिर भी हमें लड़ाने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ भी हो मैं अपने आमरण अनशन से पीछे हटने वाला नहीं हूँ। मैं कोई नेता नहीं हूँ, न ही मुझे राजनीति करनी है। मैं एक आम हिन्दुस्तानी हूँ और अपने हक की लड़ाई में मुझे जो भी करना पड़ेगा वो मै करूंगा।

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