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प्रशासनिक सेवा से राजनीति की राह पर चल चुके हैं कई अधिकारी, डालें एक नजर

अरविन्द शर्मा प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले कोई पहले अधिकारी नही हैं। इससे पहले कई रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 15 Jan 2021 6:00 AM GMT

प्रशासनिक सेवा से राजनीति की राह पर चल चुके हैं कई अधिकारी, डालें एक नजर
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प्रशासनिक सेवा से राजनीति की राह पर चल चुके हैं कई अधिकारी, डालें एक नजर (PC: social media)
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श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ: यूपी में विधानसभा के चुनाव को एक साल बचा है। पिछले कई चुनावों की तरह ही इस बार भी प्रशासनिक सेवा से निकलकर अपनी सियासी पारी खेलने के लिए कई अधिकारी आने को तैयार हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक अधिकारियों का सासंद, विधायक और मंत्री बनना अब तो एक रिवाज बनता जा रहा है। हाल ही में 1988 बैच के गुजरात काडर के आईएएस अधिकारी अरविन्द कुमार शर्मा ने लम्बी प्रशासनिक सेवा करने के बाद जब राजनीति में उतरने का फैसला लिया है।

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रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारी अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं

Arvind Kumar Sharma Arvind Kumar Sharma (PC: social media)

अरविन्द शर्मा प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले कोई पहले अधिकारी नही हैं। इससे पहले कई रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं। इनमें से कुछ तो जहां राजनीतिक दलों में शामिल होकर सफल हुए तो कुछ ने नए दल बनाए पर इनमे से कइयों को राजनीति रास नहीं आई तो फिर इससे किनारा कर लिया।

केन्द्र मे सचिव रहे एसएटी रिजवी, भूरेलाल, पूर्व पुलिस प्रमुख प्रकाश सिंह, आईसी द्विवेदी के अलावा आईपीएस एसएन सिंह भी अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके है। मुलायम और मायावती की सरकारों में प्रमुख सचिव रहे पीएल पुनिया के सांसद फिर कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने के बाद खासतौर से अफसरों में माननीय बनने का क्रेज तेजी से बढ़ा।

चन्द्रपाल से पहले उनकी पत्नी विमला पाल जनता दल और सपा से विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं

राज्य सरकार में प्रमुख सचिव रहे डॉ. चन्द्रपाल ने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय आदर्श समाज पार्टी का गठन किया। पर वो इसमें सफल नहीं हो सके। चन्द्रपाल से पहले उनकी पत्नी विमला पाल जनता दल और सपा से विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं। प्रमुख सचिव रहे हरीश चंद्र भी राष्ट्रीय जनवादी पार्टी बना चुके हैं। जबकि आईआरएस रहे डॉ. उदित राज भी इंडियन जस्टिस पार्टी बनाकर काफी दिनों से तक सक्रिय रहे। फिर वह भाजपा में शामिल होकर सांसद भी बने।

रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रिटायर्ड आईपीएस एसआर दारापुरी भी पिछले लोकसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमा चुके हैं। केरल के डीजीपी रहे आईपीएस राजबहादुर भी पिछले विधानसभा चुनाव में सरोजनीनगर से निर्दलीय उम्मीदवार थे और परिणाम आने पर वे १२ वें स्थान पर नजर आए। आईएएस रहते हुए भ्रष्ट्राचार के खिलाफ जंग लडने वाले धर्मसिंह रावत (दिवंगत) ने बर्खास्त होने के बाद भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी बनाई। लेकिन उन्हें भी कामयाबी नहीं मिली।

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रिटायर्ड एडीजी अजय सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए

सेवानिवृत्त होने के बाद कई जिन आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने दल नहीं बनाया बल्कि उन्होंने व्यवस्था से लड़ने और चुनाव के मददेनजर सियासी दलों का झंडा उठा लिया है। रिटायर्ड एडीजी अजय सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। इससे पूर्व पीपीएस अधिकारी शैलेन्द्र सिंह भी नौकरी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और लोकसभा का चुनाव भी लड़े। जबकि इससे पूर्व फैजाबाद के एसएसपी रहे डीबी राय दो बार भाजपा से सांसद रहे।

वीआरएस लेकर भाजपा में शामिल होने वाले अधिकारी अरविन्द कुमार शर्मा के बाद अब जल्द ही कुछ और पूर्व ब्यूरोक्रेट्स राजनीति के रास्ते पर बढ़ते दिखाई देंगे।

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