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अखिलेश के बचाव में बोले योगी सरकार के मंत्री- शौचालय बनाने के लिए भी अनुमति लेना होगा?

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 5 Aug 2018 7:43 AM GMT

अखिलेश के बचाव में बोले योगी सरकार के मंत्री- शौचालय बनाने के लिए भी अनुमति लेना होगा?
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बलिया: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष व प्रदेश के काबिना मंत्री ओमप्रकाश राजभर सरकारी बंगला प्रकरण पर अखिलेश यादव के बचाव में उतर आये है। उन्होंने बलिया जिले के रसड़ा स्थित अपने आवास पर संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को स्वयं अपने सरकारी आवास में शौचालय बनाना होगा तो क्या अनुमति लेकर बनवाना पड़ेगा? सरकार व विभाग अब तक कहां रही, जब बगैर अनुमति के निर्माण हो रहा था। तब निर्माण के समय ही क्यों नही रोका गया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में पिछले दिनों 3 पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी आवास आवंटित करने पर भी सवाल उठाया। साथ ही अखिलेश का समर्थन करने की बात से इनकार कर दिया।

भारत को बताया जाति प्रदान देश

ओमप्रकाश राजभर ने एक विवादित बयान देते हुए कहा है कि भारत पहले कृषि प्रधान देश था लेकिन अब जाति प्रधान देश हो गया है। भारत की पहचान अब बदल गयी है। भले ही विकास का जितना भी ढिंढोरा पीटा जाय, विकास की बात करने वाली जनता ने दिल्ली में जबरदस्त विकास करने वाली शीला दीक्षित व स्वर्गीय इंदिरा गांधी को हरा दिया।

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पिछड़े वर्ग के लिए 54 फीसदी आरक्षण की मांग

राजभर ने कहा कि पिछड़े वर्ग के लिये 54 फीसदी आरक्षण की मांग करते हुए कहा कि मोदी सरकार को इसके लिये भी संसद में संशोधन पारित कराना चाहिये। जब मोदी सरकार 2 सांसद के दबाव में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन के लिये संसद में प्रस्ताव प्रस्तुत कर रही है तो उसे पिछड़े वर्ग के व्यापक हित मे पिछड़े वर्ग के आरक्षण को उसकी आबादी के अनुसार 54 फीसदी करने के लिये भी संसद में प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहिए।

उत्पीड़न झेलने वाले लोग ही समझ सकते है मर्म

उन्होंने पिछड़े वर्ग के सांसदों पर भी निशाना साधा तथा कहा कि पिछड़े वर्ग के सांसद केवल बड़े नेताओं की परिक्रमा करने में लगे हैं । उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम की प्रशंसा करते हुए कहा कि संसद में संशोधन पारित होने के पूर्व ही सोशल मीडिया पर जिस तरह विरोध के स्वर मुखरित हो रहे हैं, उसे अनसुना नही किया जा सकता। जिन्होंने नाजायज तरीके से उत्पीड़न झेला है, वही इसका मर्म समझ सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा की सहयोगी पार्टी होने के कारण पुनर्विचार की अपील करेंगे।

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