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Naresh Ganpat Mhaske Wikipedia: एक जमीनी, प्रभावशाली और मजबूत संगठनकर्ता के तौर पर पहचाने जाते हैं शिवसेना नेता नरेश गणपत म्हस्के
Naresh Ganpat Mhaske Wikipedia: नरेश गणपत म्हस्के एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनका अधिकांश जीवन ठाणे में ही बीता...
Politician Naresh Ganpat Mhaske Wikipedia
Naresh Ganpat Mhaske Wikipedia: नरेश गणपत म्हस्के वर्तमान में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सदस्य हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में ठाणे निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद के रूप में चुने गए। ठाणे नगर निगम (TMC) के पूर्व महापौर के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नगर विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया। उनकी राजनीतिक शैली शिवसेना की पारंपरिक आक्रामक शैली से मिलती-जुलती है, जिसमें वे विरोधियों के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। वे शहर के मुद्दों, मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की राजनीति पर बेधड़क अपनी राय रखते हैं।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
नरेश गणपत म्हस्के का जन्म महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 24 मार्च 1970 को हुआ। इनके पिता गणपत म्हस्के और माता का नाम ताई गणपत म्हस्के है। वे एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनका अधिकांश जीवन ठाणे में ही बीता। इनकी पत्नी का नाम माधवी नरेश म्हस्के है। इनकी दो संताने एक पुत्र और एक पुत्री है।
शिक्षा
उनकी प्रारंभिक शिक्षा ठाणे में हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की, लेकिन उनका झुकाव प्रारंभ से ही राजनीति की ओर था, जिससे उन्होंने युवावस्था में ही राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया।
राजनीतिक करियर
नरेश म्हस्के ने शिवसेना के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर वे पार्टी से जुड़े और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ठाणे शहर में पार्टी को मजबूत करने के लिए कई कार्य किए। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें ठाणे नगर निगम (TMC) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं।
ठाणे नगर निगम के महापौर के रूप में कार्यकाल (2019-2022)
राजनीतिक सफर की शुरुआत के साथ ही 2019 में नरेश म्हस्के को ठाणे नगर निगम का महापौर चुना गया। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने ठाणे शहर में कई विकास कार्य किए, जिनमें प्रमुख रूप से, सड़क और परिवहन व्यवस्था का सुधार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष पहल जैसे प्रयास, कोविड-19 महामारी के दौरान राहत कार्यों का संचालन, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं लागू करना, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजनाओं का क्रियान्वयन जैसे अनगिनत सामाजिक कर्तव्यों के प्रति सराहनीय योगदान दिया।
नरेश गणपत म्हस्के ने 2024 के लोकसभा चुनाव में ठाणे निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और विजय प्राप्त की। उन्होंने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के उम्मीदवार राजन विचारे को 2,17,011 मतों के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ, नरेश म्हस्के ने ठाणे में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की स्थिति को मजबूत किया है। उनकी जीत को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र उनकी राजनीतिक पकड़ का केंद्र रहा है। यह चुनाव परिणाम दर्शाता है कि ठाणे के मतदाताओं ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) में विश्वास जताया है, जिससे पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीतियों में यह जीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अन्य राजनीतिक भूमिकाएं और जिम्मेदारियां
महापौर के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे ठाणे में शिवसेना के एक प्रमुख रणनीतिकार के रूप में सक्रिय रहे। 2022 में शिवसेना में एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच विभाजन हुआ। नरेश म्हस्के ने बालासाहेब ठाकरे के प्रति निष्ठा रखते हुए शिवसेना (उद्धव गुट) का समर्थन किया। वर्तमान में, वे शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के एक प्रमुख नेता के रूप में काम कर रहे हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
धारित पद
2012: ठाणे नगर निगम में नगरसेवक के रूप में निर्वाचित।
2017: ठाणे नगर निगम में पुनः नगरसेवक चुने गए।
2017: ठाणे नगर निगम में सदन के नेता के रूप में चुने गए।
2019: ठाणे नगर निगम के महापौर चुने गए।
2024: ठाणे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य के रूप में चुने गए ।
उपलब्धियां और योगदान
1. ठाणे नगर निगम के प्रभावशाली महापौर पद पर रहते हुए शहर में आधारभूत संरचना और नागरिक सुविधाओं में सुधार किया।
3. कोविड-19 महामारी के दौरान राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
4. शिवसेना संगठन में प्रमुख पदों पर रहते हुए शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अभियानों का नेतृत्व किया।
विवाद और चुनौतियां
2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में शिवसेना में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच सत्ता संघर्ष के दौरान, नरेश म्हस्के को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा स्थानीय राजनीति में विरोधियों से संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसके चलते ठाणे में बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट के साथ कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। यही नहीं इन्हें नगर निगम प्रशासन को लेकर कई आरोपों का भी सामना करना पड़ा। महापौर रहते हुए कुछ योजनाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को बेदाग बताया।
नरेश गणपत म्हस्के शिवसेना के लिए ठाणे जिले में एक प्रभावशाली चेहरा बने हुए हैं।
उनका राजनीतिक सफर शिवसेना की नीतियों और विचारधारा को आगे बढ़ाने में समर्पित रहा है।
संभावित भविष्य की योजनाएं
लोकसभा सांसद बनने के बाद उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के गठबंधन में उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
ठाणे क्षेत्र में उनकी पकड़ को देखते हुए, वे आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बन सकते हैं।
नरेश गणपत म्हस्के की छवि एक जमीनी, प्रभावशाली और जुझारू संगठनकर्ता की है। उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सूझबूझ ने उन्हें ठाणे क्षेत्र में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है।