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Rajasthan Politics: सचिन आक्रामक और भाजपा का न्योता, क्या करेगी कांग्रेस

भाजपा नेता राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट को एक ऑफर दिया है कि भगवा पार्टी के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं जो भारत को प्राथमिकता देते हैं।

Ramkrishna Vajpei

Ramkrishna VajpeiWritten By Ramkrishna VajpeiShreyaPublished By Shreya

Published on 13 Jun 2021 4:35 PM GMT

Rajasthan Politics: सचिन आक्रामक और भाजपा का न्योता, क्या करेगी कांग्रेस
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कांग्रेस नेता अशोक पायलट, राहुल गांधी (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

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Rajasthan Politics: कांग्रेस नेता सचिन पायलट एक बार फिर मुखर हो उठे हैं और उन्होंने उन मांगों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर एक बार फिर दबाव बनाना शुरू कर दिया है जिन्हें हल करने का आश्वासन दिया गया था। जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के नेतृत्व के खिलाफ खुले तौर पर विद्रोह किया था, जो पार्टी आलाकमान द्वारा उन्हें आश्वस्त करने के बाद समाप्त हो गया कि उन्हें राज्य सरकार में उनका हक दिया जाएगा।

उधर जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) के भाजपा के खेमे में आ जाने से उत्साहित भाजपा नेता राज्यवर्द्धन सिंह राठौर (Rajyavardhan Singh Rathore) ने मौके का फायदा उठाने की नीयत से सचिन को एक ऑफर दे डाला है। भाजपा नेता राज्यवर्धन राठौर ने कहा है कि भगवा पार्टी के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं जो भारत को प्राथमिकता देते हैं और 'इंडिया फर्स्ट' कहने वाली अपनी विचारधारा को बदलते हैं।

इस बीच ऐसी खबरें भी हैं कि सचिन पायलट के तेवर तीखे हैं उन्होंने कांग्रेस महासचिव का पद संभालने से इनकार कर दिया है। साथ ही उनके राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात करने की भी कोई संभावना नहीं है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर में राठौर का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर राजस्थान कांग्रेस और सचिन पायलट के बीच चल रही अंदरूनी कलह को देखते हुए। राठौर ने कहा है कि जब आपके पास केंद्र में कमजोर नेतृत्व होता है, तो क्षेत्रीय नेता वही करते हैं जो वे चाहते हैं, चाहे आप जो भी संदेश भेजें, वह राजस्थान या पंजाब में हो। विजन के अभाव में नेता पार्टी छोड़ देंगे और विजन के साथ दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएंगे।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

भाजपा में शामिल होना होगा घाटे का सौदा?

हालांकि जानकारों का कहना है कि पायलट अगर भाजपा में शामिल होने का फैसला करते हैं तो वह अपने पांवों पर खुद कुल्हाड़ी मार लेंगे क्योंकि कांग्रेस में रहकर उनके राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने का अवसर है लेकिन अन्य दल में जाने पर वह यह वरीयता खो सकते हैं।

हालांकि राजस्थान में राज्य नेतृत्व के भीतर मतभेदों को दूर करने के लिए एक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) पैनल का भी गठन किया गया था, लेकिन इसका समाधान अभी तक सामने नहीं आया है। उधर पायलट को आक्रोश जताए लगभग एक साल हो गया है और उनके खेमे द्वारा उठाए गए मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं। जो कि मौजूदा हालात में काफी गंभीर हो चुका है।

कैबिनेट में जल्द विस्तार की संभावना

जानकारों का कहना है कि यह सही है कि जितिन प्रसाद के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जाने से कांग्रेस के भीतर राजस्थान गतिरोध को प्राथमिकता मिली होगी। शायद यही वजह है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाते हुए मुद्दों को हल कराने के लिए पायलट खेमा जुट गया है। हालांकि कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट खेमे के वफादारों को शामिल करने के लिए राजस्थान में कैबिनेट जल्द विस्तार की संभावना है।

सूत्रों ने संकेत दिया है कि संकट के समाधान के लिए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने खुद मोर्चा संभाला है। सचिन पायलट के प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मिलने की संभावना है।

6 से 7 मंत्री पद चाहते हैं पायलट

इस बीच, अशोक गहलोत ने अपने विधायकों और हाल ही में बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों के साथ नियमित बैठकें करना शुरू कर दिया है। अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में नौ रिक्तियां हैं। इन पदों पर सचिन के खेमे के अलावा करीब 18 निर्दलीय उम्मीदवारों की नजर भी है। सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट राज्य सरकार में करीब 6-7 मंत्री पद चाहते हैं।

सचिन पायलट के करीबी नेता भी दिल्ली में हैं। उनका कहना है कि वे अपना हक पाने के लिए लंबे इंतजार से धैर्य खो रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा पायलट का पक्ष छोड़ने के लिए उन पर "दबाव" डाला जा रहा है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पार्टी के ढांचे के भीतर "अपने अधिकारों के लिए" लड़ेंगे।

समस्याओं का समाधान नहीं हुआ: पायलट

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद, पायलट ने उनसे किए गए वादों का समाधान न होने का मुद्दा भी उठाया साथ ही कहा कि अब 10 महीने हो गए हैं। मुझे समझा दिया गया था कि समिति द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है, और उन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें जनादेश दिलाने के लिए काम करने वाले और अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है।

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