इन 3 घोटालों ने शीला दीक्षित के उजले दामन को कर दिया था दागदार

कॉमनवेल्थ घोटाले के अलावा शीला दीक्षित का नाम वॉटर टैंकर घोटाले में शामिल था। इस घोटाले में आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड ने साल 2012 में 385 स्टील के टैंकर किराए पर लिए थे। तब दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी।

इन 3 घोटालों ने शीला दीक्षित के उजले दामन को कर दिया था दागदार

इन 3 घोटालों ने शीला दीक्षित के उजले दामन को कर दिया था दागदार

नई दिल्ली: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला दीक्षित का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 81 साल की थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्हें शुक्रवार सुबह सीने में जकड़न की शिकायत के बाद एस्कार्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह 15 वर्ष तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

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अब कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित का निधन हो गया है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे घोटालों के बारे में बताएंगे, जिनमें उनका नाम भी शामिल रहा।

कॉमनवेल्थ घोटाला

शीला दीक्षित का नाम कॉमनवेल्थ घोटाले में शामिल था। यह घोटाला कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान खरीदी गई लाइटों से जुड़ा मामला था। आरोप है कि 5,000-6,000 रुपये में मिलने वाली लाइट 27,000 रुपये में खरीदी गई।

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बता दें, दिल्ली के डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें शीला दीक्षित का नाम लेकर कहा गया है कि तत्कालीन सरकार ने प्राइवेट कंपनी को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया।

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रिपोर्ट के अनुसार, शीला दीक्षित को लाइट कंपनी ने एक प्रेजेंटेशन दिया और फिर अप्रूवल मिला। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि तत्कालीन दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग को इस खरीद से 27 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

वॉटर टैंकर घोटाला

कॉमनवेल्थ घोटाले के अलावा शीला दीक्षित का नाम वॉटर टैंकर घोटाले में शामिल था। इस घोटाले में आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड ने साल 2012 में 385 स्टील के टैंकर किराए पर लिए थे। तब दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी।

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उस दौरान सीएम के साथ ही दीक्षित दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष भी थीं। आरोप है दिल्ली सरकार ने जो टैंकर किराये पर लिए थे, उसमें करीब 400 करोड़ का घोटाला हुआ था। साल 2009 से लेकर 2015 के बीच का टैंकर घोटाला मामला है।

मगर जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार आई तब यह मामला सामने आया। इसके बाद इसकी शिकायत एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में हुई। हालांकि शीला दीक्षित लगातार आरोपों को नकारती रही हैं।

बैंक घोटाला

शीला दीक्षित की नाक के नीचे हुआ करोड़ों रुपये का बैंक घोटाला हुआ था। दावा है कि वह बैंक-घोटाला दबा रहे अधिकारियों के प्रति स्नेह दिखाती थीं। आरोप यह भी है कि दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक में साल 2012 में बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया।

वर्तमान में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव दीक्षित के उसी घोटाले के संदर्भ में जवाबदेही से बच रहे हैं और यही वजह है कि अधिकारी के प्रति पूर्व सीएम शीला दीक्षित का स्नेह उमड़ रहा है।