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कांग्रेस से जंग जीतने के बाद भाजपा के भीतर छिड़ी ये बड़ी जंग

शिवराज या नरेंद्र सिंह तोमर में से कौन मुख्यमंत्री होगा यह भले अभी तक तय न हो पाया हो लेकिन मोटे तौरपर यह बात तय की जा चुकी है कि उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं इनमें तुलसी सलावत और नरेंद्र मिश्रा का नाम है।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 22 March 2020 11:06 AM GMT

कांग्रेस से जंग जीतने के बाद भाजपा के भीतर छिड़ी ये बड़ी जंग
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योगेश मिश्र

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में भले ही कांग्रेस में तोड़फोड़ करके सरकार के लिए बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया हो लेकिन मुख्यमंत्री का पेंच कुछ ऐसा फंसा है जो निकलने का नाम ही नहीं ले रहा हैं। मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हाईकमान की पेशानी पर बल पड़ रहे हैं। हाल फिलहाल मुख्यमंत्री बनने के लिए शिवराज सिंह के रास्ते में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर चट्टान की तरह आकर अड़ गए हैं।

शिवराज या नरेंद्र सिंह तोमर में से कौन मुख्यमंत्री होगा यह भले अभी तक तय न हो पाया हो लेकिन मोटे तौरपर यह बात तय की जा चुकी है कि उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं इनमें तुलसी सलावत और नरेंद्र मिश्रा का नाम है। तोमर मुख्यमंत्री बनते हैं तो शिवराज और सिंधिया को अगले महीने होने वाले मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में मंत्री पद थमा दिया जाएगा। हाल फिलहाल शिवराज और तोमर की रेस में तोमर आगे दिख रहे हैं।

शिवराज का गणित

कल मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक दल की बैठक होनी है। शिवराज सिंह तकरीबन डेढ़ दशक तक मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री रहे हैं। पहली बार उन्हें भले ही उमा भारती की मेहनत मशक्कत से बनी सरकार का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिल गया हो लेकिन उन्होंने अपनी अगुवाई में दो चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश में भाजपा के बड़े नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है।

जब कमलनाथ सरकार का पराभव हो रहा था तभी उनकी फिर मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें कुलाचें मारने लगी थीं। लेकिन जब शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री के लिए अपना नाम आगे किया तब नरेंद्र सिंह तोमर खेमे ने यह चलाया कि उनकी अगुवाई में मध्यप्रदेश में भाजपा चुनाव हार चुकी है इसलिए अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया तो जनता में गलत संदेश जाएगा।

शिवराज पर दबाव के लिए उछले घोटाले

नरेंद्र सिंह तोमर और शिवराज के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के दौरान ही सोशल मीडिया में शिवराज के कार्यकाल का व्यापम घोटाला, ट्रिक्स घोटाले का सामने आना यह संदेश दे रहा है कि शिवराज को बनाया जाना पार्टी और जनता के हित में नहीं होगा।

यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने ही शिवराज को ठिकाने लगाने के लिए ही सोशल मीडिया पर इन इश्यूज को हवा दी है। नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री बनाने वालों के तर्क यह भी है कि मध्यप्रदेश में 25 उपचुनाव होने हैं। जिनमें दो उपचुनाव विधायकों के निधन के चलते होने हैं तथा 23 उपचुनाव विधायकों के इस्तीफे की वजह से होने हैं। इनमें 22 कांग्रेस विधायक ऐसे हैं जिन्होंने इस्तीफा देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा है। इनमें से 16 ग्वालियर और चंबल इलाके से आते हैं यह इलाका सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर का है।

तोमर के पक्ष में तर्क

माना जा रहा है कि अगर तोमर मुख्यमंत्री होंगे तो सभी 16 सीटें जीतने में मदद मिलेगी। तोमर आसानी से दो उपमुख्यमंत्री रखने के लिए तैयार भी हो जाएंगे। इसमें गोपाल भार्गव नरोत्तम मिश्रा और तुलसी सलावत के नाम हैं। सिंधिया खेमा भी तोमर को मुख्यमंत्री बनाने पर जुटा है। क्योंकि उसे अपने खास तुलसी सलावत को उपमुख्यमंत्री बनाना है। सलावत कमलनाथ की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। नरोत्तम मिश्रा भाजपा विधायक हैं और शिवराज सरकार में कई विभागों के मंत्री रहे हैं। जब भाजपा विपक्ष में थी तो गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष थे।

शिवराज इसके लिए कभी तैयार न होंगे

शिवराज को लेकर यह आशंका जताई जा रही कि वह बिना उपमुख्यमंत्री वाली सरकार के लंबे समय तक मुखिया रहे हैं। इसलिए शायद वह दो उपमुख्यमंत्री रखने पर तैयार न हो। शिवराज किरार जाति से आते हैं। जो मध्यप्रदेश में अति पिछड़ी मानी जाती है। शिवराज समर्थक यह फिलर देने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर तोमर को मुख्यमंत्री बनाया गया तो भाजपा टूट सकती है। जबकि कमलनाथ सरकार गिराने में तोमर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

दिल्ली हाईकमान भी चाहता है कि राज्य में नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री बनाकर शिवराज और ज्योतिरादित्य दोनो को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दे दी जाए। अगले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद सुनी जा सकती है।

राम केवी

राम केवी

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