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चाचा ने भतीजे को किया चैलेंज तो ‘बबुआ’ ने दिया ये जवाब, जानिए पूरा माजरा

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 22 Sep 2018 6:02 AM GMT

चाचा ने भतीजे को किया चैलेंज तो ‘बबुआ’ ने दिया ये जवाब, जानिए पूरा माजरा
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कानपुर: कन्नौज लोकसभा सीट से चाचा ने भतीजे को खुला चैलेंज किया है। लेकिन भतीजे ने उन्हें चैलेंज नही किया है बल्कि कहा कि वो बड़े थे और उन्हें मन में उदारता का भाव रखना चाहिए थे।

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ये कहना है कन्नौज के समाजवादी पार्टी के वरिष्ट नेता और जिलाध्यक्ष मुन्ना दरोगा का। समाजवादी पार्टी पर सेक्युलर मोर्चे का कोई असर दिखने वाला नही है। कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादियो का गढ़ रहा है हम लगातार यहाँ से लोकसभा सीट जीतते चले आ रहे है। 1984 में कांग्रेस की शीला दीक्षित ने यहाँ से एक बार चुनाव जीता था इसके बाद से यहाँ पर समाजवादियो का कब्ज़ा रहा है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नोज से लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे है । समाजवादी पार्टी से अलग हुए शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन किया है। समाजवादी केक्युलर मोर्चा अब अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी अखिलेश यादव को मान रहा है।

मोर्चे के संयोजक शिवपाल सिंह यादव इस की घोषणा कर चुके है कि वो मुलायम सिंह यादव के खिलाफ अपना कंडीडेट मैदान पर नहीं उतरेंगे लेकिन वो अखिलेश यादव को बक्सने के मूड में नहीं है और उन्हें घेरने की योजना तैयार कर रहे है।

कन्नौज लोकसभा सीट से समाजवादी सेक्युलर मोर्चा मुस्लिम कंडीडेट को टिकट देकर उतारने की रणनीति में जुटी है। कन्नौज लोकसभा सीट का जातिगत अकड़ा बड़ा ही दिलचस्प है। कन्नोज में सबसे अधिक ओबीसी वोटर है 46 फीसदी है।

इसके बाद अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाती और मुस्लिम और जनरल वोटर है। यदि समाजवादी सेक्युलर मोर्चे से मुस्लिम कंडीडेट चुनाव लड़ता है तो मुस्लिम वोट कटेगा जिससे बीजेपी को सीधा फायदा होगा और सपा का नुकसान होना तय माना जा रहा है।

वही सपा के जिलाध्यक्ष और वरिष्ट सपा नेता मुन्ना दरोगा उर्फ़ मजहरुल हक़ के मुताबिक कन्नौज समवादियो का गढ़ रहा है। चाचा ने भतीजे को चैलेंज किया है भतीजे ने चाचा को चैलेन्ज नही किया। ये सब कन्नोज की जनता देख रही है,वो बड़े है और उन्हें उदारता का भाव रखना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया है। समाजवादी केक्युलर मोर्चा कन्नोज से चुनाव लडेगा तो इसका सपा पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है।

बसपा ने एक बार मुस्लिम कंडीडेट अकबर अली बंसी को यहाँ से मैदान पर उतारा था लेकिन अकबर अली बंसी को करारी शिकस्त मिली थी ,बीजेपी भी भी कई अपने अच्छे नेताओ को यहाँ से चुनाव लड़ा कर उसका नतीजा देख चुकी है। यहां की जनता सिर्फ समाजवादियों को ही पसंद करती है।

कन्नौज से मुलायम सिंह ,अखिलेश यादव डिम्पल यादव और प्रदीप सिंह जैसे कद्दावर नेता जीत चुके है। सन 1984 में कांग्रेस की शीला दीक्षित एक बार चुनाव जीती थी और गृहमन्त्री बनी थी लेकिन वो भी 1989 का चुनाव कन्नोज से हार गयी थी।

यदि समाजवादी सेक्युलर के संस्थापक कन्नोज को भूल नही पा रहे है जबकि वो यहाँ के इतिहास से भलीभांति परचित है। सपा यहां से गठबंधन में चुनाव लड़ेगा तो उसे इसका भी सीधा फायदा पार्टी को होगा। एक-एक कार्यकर्ता दिन रात मेहनत कर पार्टी की जमीन तैयार करने में लगा हुआ है। अखिलेश यादव यहां से बड़े मार्जन से जीतेगे।

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