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UP Politics: अखिलेश-शिवपाल में किसका साथ देंगे आजम खां, यहां जाने किसके साथ जमेगी जोड़ी

Azam Khan: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के जेल से बाहर आते ही सियासत तेज हो गयी है। पार्टी के अंदर से लेकर बाहर तक तरह-तरह की बयानबाजी हो रही है।

Shreedhar Agnihotri
Updated on: 21 May 2022 3:55 AM GMT
Samajwadi party Azam khan
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समाजवादी पार्टी विधायक आजम खान (Social media)

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Azam Khan Latest News: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता आजम खां के जेल से बाहर आते ही सियासत तेज हो गयी है। पार्टी के अंदर से लेकर बाहर तक तरह तरह की बयानबाजी हो रही है। साथ ही इस बात पर अब सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में आजम खां शिवपाल सिंह यादव के साथ या फिर अपने पुराने दोस्त मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव के राजनीतिक हमसफर बने रहेगें।

रामपुर में अपने घर पर मीडिया से रूबरू होने के दौरान आजम खां तल्खी साफ दिखी। उन्होंने किसी का न तो नाम लिया और न ही सीधे आरोप लगाया पर शायराना अंदाज वाली अपनी पुरानी शैली में कई बातें कही -दरख्तों की जड़ों में अपनों ने ही जहर डाला है। मेरी तबाहियों के लिए मेरे अपने जिम्मेदार है।

ज्ञानवापी मस्जिद के लिए भी संघर्ष करने को तैयार

उनका दर्द साफ झलक रहा था, कहा कि मुझे उन कोठरियों में रखा गया जिन कोठरी में उन लोगों को रखा जाता था, जिनको फाँसी दी जानी थी। मेरी कोठरी के बाहर फांसी घर भी था। हमने अपनी मोहब्बत और वफादारी साबित कर दी अब बाकी का सबूत आपको देना है। बातचीत में उन्होेने इस बात के भी संकेत दिए कि वह मुस्लिमों के रहनुमा बने रहेगें और ज्ञानवापी मस्जिद के लिए भी संघर्ष करने को तैयार हैं।

अब सवाल इस बात का है कि यदि वह अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) का साथ छोडकर शिवपाल सिंह यादव के साथ आते हैं तो शिवपाल की छवि काफी नम्र और उदार है। यही नहीं, उनके भाजपा नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने उनके रूख को और लचीला किया है। जबकि आजम खां आक्रामक शैली के नेता कहे जाते है। ऐसे में दोनो नेताओं का एक साथ चलना कितना सही होगा कितना गलत,यह भी एक बडा सवाल है।

आजम खां के जेल से छूटने के पहले शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश यादव से पहले ट्विट कर उनका स्वागत किया। इसके साथ ही शायरी की एक लाइन लिखी, झूठ के लम्हे होते हैं सदियां नहीं. यानी साफ है कि आजम खान के रसूख को देखते हुए शिवपाल सिंह यादव हो या अखिलेश यादव सभी लोग उन्हें अपने साथ रखना चाहते हैं।

अब्दुल्ला आजम ने ट्वीट कर बयां किया अपना दर्द

इससे पहले बिना पिता के हुई ईद के दिन आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने ट्वीट कर जो अपना दर्द बयां किया था, उससे कम से कम यह साफ है कि वह अखिलेश के साथ नहीं हैं।

उधर दूसरी तरफ जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव अब आजम खां से मिलने रामपुर भी जाना चाह रहे हैं। पर जेल में उनके आजम खां से ने मिलने और उनकी रिहाई के लिए कोई बडी कोशिश किए जाने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आजम खान पर पिछले कई सालों में शत्रु संपत्ति, फर्जी पासपोर्ट, पैन कार्ड समेत कई दर्जन मुकदमे लिखे गए. जौहर विश्वविद्यालय में सरकारी जमीन कब्जे का मामला दर्ज हुआ। जिसपर पहले आजम खान और फिर उनके बेटे और पत्नी को भी जेल जाना पड़ा। आजम खां को 27 महीने जेल में रहना पड़ा।

उधर भाजपा अभी भी आजम खां पर हमलावर है। पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है कि उन्हे उनकी करनी की सजा मिल रही है। उनके खिलाफ जितने भी मुकदमे दाखिल किए गए हैं, वह पीड़ितों और गरीबों द्वारा दाखिल कराए गए हैं, जिन पर सत्ता के रसूख के दम पर आजम खान ने अत्याचार किया था।

अब सवाल इस बात का है कि आजम खां से दोस्ती के चलते शिवपाल सिंह यादव अपना राजनीतिक भविष्य क्या तय करते है और अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढाने में आजम खां के हमसफर बनते हैं या अकेले ही चलने में अपनी बेहतरी समझते हैं।

Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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