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राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने मी टू को बताया चीप पॉपुलरटी  स्टंट

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 15 Oct 2018 3:53 PM GMT

राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने मी टू को बताया चीप पॉपुलरटी  स्टंट
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गोरखपुर: जहाँ एक तरफ पूरे देश में मी टू अभियान के तहत हर रोज कई महिलायें अपने अतीत के दर्द और उत्पीडन को सामने ला रही है और उनका सपोर्ट हर कोई कर रहा है। वहीँ उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी इसे सिर्फ चीप पॉपुलरटी स्टंट बता रही हैं। अंजू चौधरी ने मी टू अभियान में सामने आ रही पीड़ितों की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बड़ी अजीब बात है कि जब उनके साथ हादसा हुआ उस समय कोई नासमझ नहीं थी ना ही कम उम्र की थी और ना ही कमसिन थी। जो इस मामले को बताने में संकोच कर रही थी इन लोगों ने अच्छी पापुलैरिटी पाने के लिए यह मी टू अभियान शुरू किया है। इनकी बातों में कहीं पर कोई ऐसा रीजन नहीं है जिससे पता चलता है और की इन के साथ कोई घटना घटित हुई है।

महिला सशक्तिकरण पर हो रहा है काम

हमारे देश में महिला सशक्तिकरण पर इतना काम हो रहा है सरकार इतनी सुविधाएं महिलाओं को दे रही है अगर आपके साथ उस समय कोई घटना हुई थी तो आपको उसी समय कहना चाहिए था। आप 15 साल बाद 20 साल बाद यह कह रही हैं कि मेरे साथ ऐसा हुआ था मेरे साथ वैसा हुआ था। क्या आपके पास इसका कोई सबूत है इसमें सच्चाई है कि नहीं है, इसको कैसे प्रूफ करेंगे। इस मामले में कंपनसेशन लेने के लिए और लाभ उठाने के लिए इस अभियान को शुरू किया गया है। आज अगर उनके साथ कोई बात हो और उस पर एक्शन ना हो तो हमें बताएं और हम उस पर कदम नहीं उठाएं तो कोई बात हो। लेकिन इतने सालों के बाद अपनी बातों को रखने का कोई मतलब नहीं है । यह लोग कोई कमसिन या नासमझ लड़कियां नहीं थी बल्कि सीनियर और मैच्योर लेडीज थी। यह सिर्फ चीप पॉपुलरटी स्टंट है। इन घटनाओं की तुलना हत्या से करते हुए अंजू चौधरी ने कहा कि 15 साल पहले अगर आप यहां किसी के मर्डर हो जाता है वह 15 साल बाद आप पुलिस के पास जाकर कहिए कि उनकी हत्या हो गई है तो क्या इसका प्रूफ होगा आपके पास। जो बातें जब होती हैं तो उसी समय उसको बताना चाहिए होता है। किसी भी घटना को लेकर के एक्शन तुरंत होना चाहिए ना कि 15 से 20 साल बाद। अंजू चौधरी ने कहा कि महिला को हर तरह से सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है महिला को हर तरह से फ्रीडम दिया गया है अगर उसमें वो कहती हैं कि उनको डर लग गया और उन्होंने शोर नहीं किया और कई साल बाद अब इस घटना को बताया तो इससे लगता है कि यह मामला पूरी तरह से संदिग्ध है और इसमें किसी तरह का कोई भी रीजन नहीं बनता है।

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