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Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar: संस्कृति, परंपरा और आधुनिक राजनीति के समन्वयकर्ता के तौर पर लोकप्रिय हैं यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार

Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar Wiki in Hindi: यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार का जन्म 24 मार्च 1992 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, जिनकी शाही वाडियार वंश से गहरी कड़ी है...

Jyotsna Singh
Published on: 24 March 2025 9:43 AM
Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar Wikipedia
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Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar Wikipedia 

Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar: यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार मैसूर के वाडियार राजघराने के 27वें संरक्षक हैं। वह महाराजा जयचामाराजेंद्र वयार के परपोते हैं , और उन्हें श्रीकांत दत्त वाडियार की मृत्यु के बाद 10 दिसंबर 2013 को प्रमोदा देवी वाडियार ने गोद लिया था। 2015 में एक निजी समारोह में उन्हें "मैसूर के महाराजा" के रूप में स्थापित किया गया। यदुवीर वाडियार वाडियार वंश की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले उत्तराधिकारी हैं, जिनका परिवार मैसूर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा है। वे अपने दत्तक पिता महाराजा श्रीकांतदत्त वाडियार की विरासत को संजो रहे हैं और शाही परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में मैसूर-कोडागु से सांसद हैं।उनकी छवि संस्कृति, परंपरा और आधुनिक राजनीति के समन्वयकर्ता के रूप में उभर रही है।

यदुवीर वाडियार का वंश और जीवन परिचय

यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार का जन्म 24 मार्च 1992 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, जिनकी शाही वाडियार वंश से गहरी कड़ी है। उनके पिता स्वरूप आनंद गोपालराज उर्स और माता राजकुमारी लीला त्रिपुरसुंदरी देवी हैं। उनकी एक छोटी बहन जयथमिका लक्ष्मी हैं।

उनके परदादा सरदार गोपालराज उर्स थे, जो महाराजा चामराजेंद्र वाडियार एक्स (Chamarajendra Wadiyar X) के सबसे बड़े भाई थे। महाराजा चामराजेंद्र वाडियार एक्स को उनके नाना महाराजा कृष्णराज वोडेयार तृतीय ने दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया था और वे 1868 में मैसूर के सिंहासन पर बैठे थे। इस प्रकार, यदुवीर का संबंध प्रत्यक्ष रूप से मैसूर के शाही वंश से जुड़ता है।

मातृक पक्ष (मां की ओर से)

यदुवीर की माता, लीला त्रिपुरसुंदरी देवी, कल्लहल्ली सामंती सम्पदा (जो ऐतिहासिक रूप से मैसूर राज्य के अधीन थी) के धारक कंथराज बसवराज उर्स की पुत्री हैं। उनकी माता की माता राजकुमारी गायत्री देवी थीं, जो महाराजा जयचामराजेंद्र वाडियार की सबसे बड़ी बेटी थीं। इस कारण, महाराजा जयचामराजेंद्र वाडियार यदुवीर के नाना हुए। यदुवीर की नानी महाराजाकुमारी गायत्री देवी ही उनके दत्तक पिता स्वर्गीय महाराजा श्रीकांतदत्त वाडियार की बहन थीं। इसी वजह से, जब श्रीकांतदत्त वाडियार की मृत्यु हुई, तो मैसूर के शाही परिवार ने यदुवीर को दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया और उन्हें राजगद्दी का उत्तराधिकारी घोषित किया।

शाही दत्तक ग्रहण और उत्तराधिकार

महाराजा श्रीकांतदत्त वाडियार, जो मैसूर के 26वें महाराजा थे, की 2013 में मृत्यु हो गई। उनकी कोई संतान नहीं थी, जिसके चलते उनकी पत्नी महारानी प्रमोदा देवी वाडियार ने परिवार की परंपरा के अनुसार एक उत्तराधिकारी खोजने का निर्णय लिया। यदुवीर, जो वाडियार वंश से रक्त संबंध रखते थे, को 2015 में प्रमोदा देवी वाडियार ने औपचारिक रूप से दत्तक पुत्र के रूप में अपनाया और वे मैसूर के 27वें महाराजा बने। उत्तराधिकार समारोह 28 मई 2015 को मैसूर पैलेस में हुआ, जिसमें पारंपरिक विधि-विधानों के साथ उन्हें राजगद्दी पर बैठाया गया।

व्यक्तिगत जीवन

यदुवीर वाडियार ने 2016 में त्रिशिका कुमारी सिंह से विवाह किया, जो राजस्थान के डूंगरपुर शाही परिवार से संबंध रखती हैं। उनके एक पुत्र भी हैं, जिनका जन्म 6 दिसंबर 2022 को हुआ।

महत्व और भूमिका

यदुवीर वाडियार वर्तमान में मैसूर के शाही परिवार के संरक्षक और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। वे दशहरा उत्सव जैसी पारंपरिक शाही रस्मों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं और मैसूर पैलेस के प्रशासन से जुड़े हुए हैं। हालांकि भारत में अब राजशाही की कोई आधिकारिक राजनीतिक भूमिका नहीं है, फिर भी वाडियार वंश का सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव बना हुआ है।

यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार की शैक्षणिक योग्यता

यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार विद्या सागर, बैंगलोर से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के साथ विद्या निकेतन स्कूल, बैंगलोर 2008 में आईसीएसई (10वीं कक्षा के समकक्ष) प्रमाणपत्र प्राप्त किया। कैनेडियन इंटरनेशनल स्कूल, बैंगलोर 2010 में आईबी डिप्लोमा (12वीं कक्षा) पूरा किया।

उच्च शिक्षा:

मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय, एमहर्स्ट, अमेरिका, 2015 में अर्थशास्त्र और अंग्रेजी में कला स्नातक (BA in Economics & English Literature) की डिग्री प्राप्त की। अपने अंतिम सेमेस्टर के दौरान, वे फरवरी 2015 में मैसूर लौटे, जब उन्हें आधिकारिक रूप से वाडियार राजघराने का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। इसके बाद वे अपनी डिग्री पूरी करने के लिए अमेरिका वापस गए। यदुवीर वाडियार की शिक्षा का संयोजन भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों को समाहित करता है, जिससे उन्हें न केवल राजनीति और प्रशासन बल्कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी एक व्यापक दृष्टि प्राप्त हुई।

राजनीतिक सफर

यदुवीर वाडियार 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। उन्हें मैसूर-कोडागु लोकसभा सीट से भाजपा का उम्मीदवार घोषित किया गया। उनका चुनावी अभियान संस्कृति, परंपरा और विकास पर केंद्रित रहा है। इन्होंने राजघराने की लोकप्रियता और अपनी स्वच्छ छवि के आधार पर राजनीति में सफलता हासिल की। यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मैसूर-कोडागु निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और कांग्रेस के एम. लक्ष्मण को 1,39,262 मतों के अंतर से पराजित किया। ​

इस जीत के साथ, यदुवीर वाडियार अपने परिवार के दूसरे सदस्य बने जिन्होंने सांसद का पद संभाला है। उनके पिता, श्रीकांतदत्त नरसिम्हाराजा वाडियार, चार बार सांसद रह चुके हैं। ​यदुवीर वाडियार की इस जीत को मैसूर राजघराने की विरासत और भाजपा की रणनीति का सफल समन्वय माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।​

यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार की राजनीतिक उपलब्धियां

1. 2024 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत

यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार हाल ही में राजनीति में सक्रिय हुए हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में पहली बार सांसद चुने गए। हालांकि, वे पहले से ही मैसूर राजघराने के 27वें संरक्षक के रूप में सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यह जीत भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे कर्नाटक में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई।

2. दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ मजबूत करना

दक्षिण भारत, विशेष रूप से कर्नाटक में, भाजपा को एक विश्वसनीय विकल्प बनाने में योगदान दिया। राजघराने की लोकप्रियता और भाजपा के विकास एजेंडे को एक साथ मिलाकर जनता तक अपनी पहुंच बनाई।

3. मैसूर राजघराने की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना

मैसूर दशहरा महोत्सव के संरक्षण और इसे भव्य तरीके से आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैसूर पैलेस और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए कई पहल कीं। क्षेत्रीय संस्कृति, विरासत और पारंपरिक कला के संवर्धन के लिए कार्य किए।

4. सामाजिक और शैक्षिक योगदान

मैसूर और कोडागु क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़े। ग्रामीण विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर सक्रिय रहे। यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने मैसूर में स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य किया, जब शहर को 2015 और 2016 में लगातार दो वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया था। उनके नेतृत्व में, मैसूर ने स्वच्छता और सफाई के उच्च मानकों को बनाए रखा, जिससे यह उपलब्धि संभव हो सकी।

5.भविष्य की संभावनाएं

अपने कार्यकाल में बतौर सांसद, वे कर्नाटक में भाजपा के मजबूत चेहरों में से एक बन सकते हैं। वे संस्कृति, पर्यटन, और ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। यदि वे सफल सांसद के रूप में उभरते हैं, तो उन्हें भाजपा में बड़ी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। हालांकि यदुवीर वाडियार की राजनीतिक यात्रा अभी नई है, लेकिन उनकी पारंपरिक विरासत, शिक्षा और जनता से जुड़ाव उन्हें एक प्रभावशाली नेता बना सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी जीत उनकी पहली बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है, और अब वे अपनी सांसद के रूप में भूमिका निभाते हुए अपनी राजनीतिक पहचान और मजबूत कर सकते हैं।

यदुवीर वाडियार को भाजपा में युवा, शिक्षित और राजनैतिक रूप से जागरूक नेता के रूप में देखा जा रहा है। वे भाजपा की राजनीतिक विचारधारा और पारंपरिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

Admin 2

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