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सिद्धू के हमलावर रुख से राहुल नाराज, कैप्टन को सबको साथ लेकर चलने की नसीहत

Punjab Political News: पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से की जा रही सार्वजनिक बयानबाजी से राहुल गांधी काफी नाराज बताए जा रहे हैं।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariShivaniPublished By Shivani

Published on 23 Jun 2021 8:33 AM GMT

सिद्धू के हमलावर रुख से राहुल नाराज, कैप्टन को सबको साथ लेकर चलने की नसीहत
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Punjab Political News: कांग्रेस हाईकमान पार्टी की पंजाब इकाई (Punjab Congress) में चल रही गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश में जुट गया है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव (Punjab Vidhan Sabha Election 2022) होने हैं और ऐसी स्थिति में हाईकमान जल्द से जल्द पंजाब कांग्रेस में असंतोष की आग को बुझाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amrinder Singh) को राज्य में विधायकों की नाराजगी दूर करने और एक टीम के रूप में काम करने की नसीहत दी गई है।

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से की जा रही सार्वजनिक बयानबाजी से राहुल गांधी काफी नाराज बताए जा रहे हैं। पंजाब कांग्रेस का झगड़ा सुलझाने के लिए बनी सुलह समिति ने भी सिद्धू की ओर से कैप्टन पर खुलेआम हमले और उनकी आलोचना पर सख्त नाराजगी जताई है।

कैप्टन की सुलह समिति से लंबी बातचीत

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को दिल्ली पहुंचे थे। मंगलवार को उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय सुलह कमेटी से मुलाकात की। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई वाली इस समिति के साथ कैप्टन की मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली। कमेटी में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश अग्रवाल भी शामिल हैं।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक समिति की ओर से कैप्टन से विधायकों का दिल जीतने की बात कही गई है। उन्हें विधायकों के काम करके उनकी नाराजगी दूर करने को भी कहा गया। समिति के सदस्यों ने कहा कि चूंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए समय रहते विधायकों की नाराजगी दूर किया जाना जरूरी है।

सुझावों पर अमल करने को कैप्टन तैयार

सूत्रों के मुताबिक कैप्टन ने समिति की ओर से दिए गए सुझावों पर अमल करने की बात कही है। उन्होंने कमेटी से वादा किया कि वे नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश करेंगे। असंतुष्ट नेता नवजोत सिंह सिद्धू गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और ड्रग्स मामले को लेकर लगातार हमलावर हैं। कैप्टन ने इन दोनों मामलों में तेजी से कार्रवाई करने की भी हामी भरी है।

सिद्धू की बयानबाजी से नेतृत्व नाराज

इस बीच कैप्टन से नाराज नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमले शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि पंजाब में दो ही राजघराने बदल-बदल कर राज्य करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने इन घरानों का नाम नहीं लिया मगर उनका साफ तौर पर इशारा कैप्टन और बादल घराने की ओर था।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सुलह समिति और पार्टी के नेता राहुल गांधी सिद्धू की ओर से सार्वजनिक रूप से की गई बयानबाजी से नाराज हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सिद्धू को इस तरह की बयानबाजी से दूर रहना चाहिए जिससे पार्टी के मतभेद खुलकर सामने दिखें।
चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी से पार्टी को बड़ा सियासी नुकसान हो सकता है। कमेटी के सामने कैप्टन की पेशी के बाद अब सबकी नजरें सिद्धू की प्रतिक्रिया पर लगी हुई हैं। इस बात का भी इंतजार किया जा रहा है कि राहुल की नाराजगी के बाद सिद्धू अपनी बयानबाजी बंद करते हैं या नहीं।

पंजाब के कई नेताओं से मिले राहुल

सुलह समिति से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कई मंत्री और विधायक भी शामिल थे। पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत सिद्धू की बयानबाजी पर नाराजगी जताते हुए इस बात का संज्ञान लेने की बात कही है।

दूसरी ओर राहुल गांधी भी पंजाब कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं से लगातार मुलाकात में जुटे हुए हैं। उन्होंने अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और फतेहगढ़ साहिब के विधायक कुलजीत सिंह नागरा के अलावा पंजाब के कई और नेताओं से मुलाकात की है। जल्द ही उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ से भी मुलाकात होने वाली है। सुनील जाखड़ का कहना है कि उन्हें हाईकमान की ओर से मुलाकात का संदेश मिला है और वे जल्द ही राहुल गांधी से मुलाकात करके पंजाब कांग्रेस के संकट पर बातचीत करेंगे।

सिद्धू और कैप्टन में एकता की संभावना नहीं

सियासी जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में जब अकाली दल-बसपा से गठबंधन करके चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ है, कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है। कैप्टन और सिद्धू के बीच सियासी रिश्ते इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि पार्टी नेताओं की ओर से तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों के बीच एक होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि पार्टी का नेतृत्व चिंतित और परेशान है। पार्टी की चुनावी संभावनाओं को मजबूत बनाने के लिए इसीलिए नेतृत्व की ओर से अब गंभीर प्रयास शुरू किया गया है।
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