×

Punjab Politics: पंजाब प्रभारी का पद छोड़ेंगे रावत, जानिए क्या है वजह

Punjab Politics: हरीश रावत पंजाब प्रभारी पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariShreyaPublished By Shreya

Published on 26 Aug 2021 11:28 AM GMT

Punjab Politics: पंजाब प्रभारी का पद छोड़ेंगे रावत, जानिए क्या है इसका कारण
X

हरीश रावत (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo

Punjab Politics: पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (CM Captain Amarinder Singh) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Punjab Congress President) नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के खेमों के बीच चल रही जंग के बीच कांग्रेस का संकट और बढ़ने के आसार दिख रहे हैं। कांग्रेस महासचिव और पंजाब के प्रभारी हरीश रावत (Harish Rawat) अब आगे पंजाब के दायित्व से मुक्त होना चाहते हैं।

अभी तक पंजाब संकट को सुलझाने में हरीश रावत (Harish Rawat) की बड़ी भूमिका रही है और वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की ओर से पंजाब संकट (Punjab Congress Crisis) के समाधान के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के भी अहम सदस्य थे। मगर अब वे पंजाब प्रभारी का दायित्व छोड़ना चाहते हैं।

रावत की ओर से इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी (Health Issues) कारण बताए गए हैं। उनका कहना है कि पोस्ट कोविड दिक्कतों (Post Covid Symptoms) की वजह से वे इस दायित्व से मुक्त होना चाहते हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों (Uttarakhand Assembly Elections 2022) पर भी उनकी नजर है। वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (Uttarakhand Chief Minister) रह चुके हैं और आगामी चुनाव में पार्टी की ओर से उन्हें उत्तराखंड में बड़ी भूमिका निभानी है। यही कारण है कि अब वे उत्तराखंड को ज्यादा समय देना चाहते हैं।

सोनिया गांधी संग हरीश रावत (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

सोनिया से रावत जल्द करेंगे चर्चा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि कोविड के बाद उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से उबरने के लिए अब वे थोड़ा आराम भी करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे पहले ही इस मुद्दे पर पार्टी हाईकमान से बातचीत करना चाहते थे, मगर पंजाब कांग्रेस का संकट बढ़ जाने के कारण वे इस दिशा में कदम नहीं उठा सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब के प्रभारी के दायित्व से मुक्त होने के लिए वे जल्दी ही पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि पंजाब से पहले वे असम में भी पार्टी के प्रभारी के दायित्व को निभा चुके हैं। असम के प्रभारी रहने के दिनों में उन्होंने पूरे राज्य का दौरा किया था और पार्टी को मजबूत बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि पंजाब के प्रभारी के रूप में भी मैंने अभी तक सक्रिय भूमिका निभाई है, लेकिन अब इस दायित्व को निभाना मेरे लिए मुश्किल साबित हो रहा है।

हरीश रावत (फाइल फोटो साभार- सोशल मीडिया)

अब उत्तराखंड में निभाएंगे बड़ी भूमिका

इसके साथ ही रावत उत्तराखंड में कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। उत्तराखंड में उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता रहा है उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत जी ने पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें उत्तराखंड भी शामिल है। पंजाब के प्रभारी का दायित्व निभाने के साथ रावत उत्तराखंड को ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं।

सियासी जानकारों का मानना है कि रावत की ओर से भले ही स्वास्थ्य संबंधी दलील दी जा रही हो मगर असलियत यह है कि वे उत्तराखंड में कांग्रेस के सीएम के चेहरे के रूप में अपनी दावेदारी को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। उत्तराखंड में इस बार भाजपा को पढ़कर नहीं देने के लिए कांग्रेस की ओर से जोरदार तैयारियां की जा रहे हैं ऐसे में रावत उत्तराखंड में सक्रिय बने रहना चाहते हैं।

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

सिद्धू खेमे की मुहिम को दिया झटका

इस बीच सिद्धू खेमे के नेताओं से मुलाकात के दौरान रावत ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कैप्टन ही कांग्रेस का चेहरा होंगे। उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान ने इस बाबत पहले ही फैसला ले लिया था और पार्टी अभी भी अपने उसी फैसले पर कायम है। सिद्धू खेमे से जुड़े नेताओं ने बुधवार को देहरादून आकर रावत से मुलाकात की थी और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी मगर रावत इन नेताओं की दलीलों से सहमत नहीं थे।

रावत ने मुख्यमंत्री के रूप में कैप्टन के कामों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाकर पंजाब के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल के मुद्दे पर कुछ विधायकों में जरूर नाराजगी है मगर जल्द ही कैप्टन सरकार की ओर से इस संकट को भी दूर कर लिया जाएगा। पंजाब के कुछ अन्य विधायकों की ओर से चुनावी वादों और स्थानीय मसलों के संबंध में कैप्टन और हाईकमान से चर्चा की जाएगी। रावत ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि इन सब मुद्दों का समाधान जल्द ही हो जाएगा।

अपने स्तर पर विवाद सुलझा लेने का दावा

पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को ठुकराए जाने के बाद सिद्धू खेमे से जुड़े नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने की बात कही है। इस संबंध में रावत का कहना है कि मैं अपने स्तर से विवाद को सुलझाने की कोशिश में जुटा हुआ हूं मगर जरूरत पड़ने पर विधायकों की सोनिया गांधी से भी मुलाकात हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पार्टी विधायकों की पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई बार ऐसी बातें सामने आती हैं जिन्हें लेकर पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात करना जरूरी हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि यह मामला पार्टी हाईकमान तक पहुंचने की नौबत नहीं आएगी और मैं अपने स्तर से ही इस संकट का समाधान करने में सफल रहूंगा।

कैप्टन अमरिंदर सिंह- नवजोत सिंह सिद्धू (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

कैप्टन को मजबूत बनाएं सिद्धू

उन्होंने कहा कि पंजाब में पार्टी के दोनों खेमों को पार्टी की मजबूती के लिए काम करना चाहिए। पार्टी हाईकमान की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब सिद्धू को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों को मजबूत बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई भी विवाद ऐसा नहीं होता जिसका समाधान बातचीत से न किया जा सके। पंजाब संकट का समाधान भी बातचीत के जरिए किया जा सकता है और इसके लिए दोनों खेमों को आगे बढ़कर आना होगा।

दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने के लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

Shreya

Shreya

Next Story