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Punjab Politics: अब कैप्टन की कड़ी शर्तों ने बढ़ाई मुसीबत, धुर विरोधी बाजवा से मिलाया हाथ

Punjab Politics :मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नवजोत सिंह सिद्धू से मेल मिलाप कराने की हाईकमान की कोशिशें फेल साबित होती दिख रही हैं।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariShivaniPublished By Shivani

Published on 18 July 2021 4:06 AM GMT

Punjab Politics: अब कैप्टन की कड़ी शर्तों ने बढ़ाई मुसीबत, धुर विरोधी बाजवा से मिलाया हाथ
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अमरिंदर और प्रताप सिंह बाजवा (Photo Twitter)

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Punjab Politics : पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) की आंतरिक कलह को सुलझाना पार्टी (Congress Crisis) हाईकमान के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नवजोत सिंह सिद्धू से (Amarinder Singh vs Navjot Singh Sidhu) मेल मिलाप कराने की हाईकमान की कोशिशें फेल साबित होती दिख रही हैं। सिद्धू से मुलाकात के लिए कैप्टन ने इतनी कड़ी शर्तें रख दी हैं जिनका पूरा हो पाना नामुमकिन सा लग रहा है। हाईकमान की ओर से कैप्टन को समझाने के लिए भेजे गए पंजाब प्रभारी हरीश रावत (Harish Rawat) से कैप्टन ने साफ तौर पर कहा कि वे सिद्धू से तभी मिलेंगे जब सिद्धू उनके खिलाफ की गई बयानबाजी के सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे। इस मांग के साथ उन्होंने हाईकमान का सिद्धू से मिलने का अनुरोध ठुकरा दिया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा है कि उन्हें हाईकमान का हर फैसला मंजूर होगा।

इसके साथ ही कैप्टन ने अपने धुर विरोधी और पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) के साथ मिलकर नई सियासी बिसात बिछाने की कोशिश की है। सिद्धू के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कैप्टन ने अपने धुर विरोधी को भी घर बुलाने से परहेज नहीं किया। हालांकि इन दोनों नेताओं की इस महत्वपूर्ण बैठक में हुई चर्चा का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। बाजवा भी सिद्धू को पसंद नहीं करते और इस तरह एक दुश्मन को निपटाने के लिए दो विरोधियों ने हाथ मिला लिया है।

सिद्धू के माफी मांगने की कड़ी शर्त

शुक्रवार को कैप्टन की ओर से कड़ा तेवर अपनाने के बाद शनिवार को हाईकमान की ओर से कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत को चंडीगढ़ भेजा गया था। रावत ने कैप्टन से सिद्धू से मुलाकात का अनुरोध किया जिस पर कैप्टन ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया। उनका कहना था कि जब तक सिद्धू मेरे खिलाफ बोले गए अपमानजनक शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, तब तक उनसे मुलाकात संभव नहीं है।

रावत की ओर से कई बार अनुरोध करने के बावजूद कैप्टन अपनी बात पर अड़े रहे। कैप्टन ने रावत से यह भी कहा कि पंजाब कांग्रेस के मामले को सही ढंग से निपटाने में हाईकमान पूरी तरह नाकाम रहा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कैप्टन ने रावत से मुलाकात के दौरान कुछ मुद्दे रखे हैं जिनके संबंध में रावत सोनिया से बातचीत करेंगे। कैप्टन से मुलाकात के बाद रावत ने कहा कि कैप्टन पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी का हर फैसला मानने के लिए पूरी तरह तैयार हैं मगर माना जा रहा है कि कैप्टन के रुख से हाईकमान अजीब दुविधा की स्थिति में फंस गया है।

धुर विरोधी बाजवा के संग कैप्टन की बैठक

पार्टी हाईकमान की ओर से सिद्धू की ताजपोशी के ऐलान से पहले कैप्टन अपनी जवाबी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने शनिवार को अपने धुर विरोधी माने जाने वाले प्रताप सिंह बाजवा के साथ भी बैठक की। इस बैठक के दौरान पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह भी मौजूद थे। पंजाब के सियासी जानकारों का कहना है कि कैप्टन के साथ ही बाजवा को भी सिद्धू का बढ़ता कद परेशान किए हुए है। ऐसे में अब धुर विरोधी माने जाने वाले बाजवा और कैप्टन दोनों मिलकर अपने साझा दुश्मन सिद्धू को निशाना बनाने की कोशिश में जुट गए हैं।
माना जा रहा है कि कैप्टन और बाजवा की ओर से हाईकमान को संदेश दिया गया है कि पंजाब में पार्टी की बागडोर किसी पुराने कांग्रेसी के हाथ में ही सौंपी जानी चाहिए। सिद्धू ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी और ऐसे में उनको जरूरत से ज्यादा महत्व देना कैप्टन और बाजवा दोनों को रास नहीं आ रहा है। जानकारों का कहना है कि कैप्टन का विरोध करने वाले कुछ और नेता भी सिद्धू के खिलाफ उनके साथ आ सकते हैं।

हाईकमान को चिट्ठी में दिखाए थे तेवर

सिद्धू की ताजपोशी के प्रयासों के खिलाफ कैप्टन ने शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में तीखे तेवर दिखाए थे। उन्होंने पार्टी हाईकमान पर पंजाब के मामलों में जबरन दखल देने का आरोप लगाया था और कहा था कि हाईकमान के गलत कदम से पार्टी और सरकार दोनों को पंजाब में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अपने ओएसडी के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में कैप्टन ने यह भी स्पष्ट किया था कि सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेश का अध्यक्ष बनाने से कांग्रेस गुटों में बंट जाएगी और पार्टी को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है। कैप्टन पिछले दो दिनों से अपने समर्थक मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ बैठक करके अपनी भावी रणनीति पर चर्चा करने में जुटे हुए हैं। कैप्टन के इस रुख को देखते हुए पार्टी हाईकमान सिद्धू की ताजपोशी का ऐलान अभी तक नहीं कर सका है।

ताजपोशी से पहले सक्रिय हुए सिद्धू

दूसरी ओर सिद्धू ने ताजपोशी के ऐलान से पहले पंजाब के नेताओं से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है। उन्होंने शनिवार को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ से पंचकूला में उनके आवास पर मुलाकात की और पंजाब की राजनीति को लेकर करीब एक घंटे तक चर्चा की। जानकारों का कहना है कि सिद्धू ने पार्टी की मजबूती के लिए जाखड़ से सहयोग मांगा है।
जाखड़ के अलावा सिद्धू ने पंजाब के कई अन्य प्रमुख नेताओं से मुलाकात करके अपनी रणनीति तैयार की। सिद्धू ने सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, राजस्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़, स्वास्थ्य मंत्री बलविंदर सिंह सिद्धू और मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह सहित कई अन्य नेताओं और विधायकों से मुलाकात की और उनसे सहयोग मांगा। माना जा रहा है कि सिद्धू को हाईकमान की ओर से प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने का संकेत मिल चुका है और यही कारण है कि उन्होंने विभिन्न नेताओं से मिलकर अपनी भावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

पंजाब कांग्रेस में खेमेबंदी तेज

पंजाब कांग्रेस में कैप्टन और सिद्धू खेमे के बीच काफी दिनों से झगड़ा चल रहा है राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं मगर दोनों खेमों के झगड़े के कारण अभी तक पार्टी की ओर से चुनाव की तैयारियां नहीं शुरू हो सकी हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक पार्टी हाईकमान इस झगड़े का निपटारा नहीं कर सका है।
हाईकमान के रुख से साफ है कि उसे कैप्टन की ताकत का एहसास है मगर इसके साथ ही वह सिद्धू को भी साधने की कोशिश में जुटा हुआ है। हाईकमान की इसी दुविधा की स्थिति के कारण पंजाब कांग्रेस में खेमेबंदी काफी तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव में पार्टी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
Shivani

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