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गोल्ड मेडल जीतने वाला ये प्लेयर बेचता है चाय, वजह कर देगी दंग

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 18 July 2018 5:49 AM GMT

गोल्ड मेडल जीतने वाला ये प्लेयर बेचता है चाय, वजह कर देगी दंग
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लखनऊ: बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीत चुके युवा खिलाड़ी आयुष वैश्य सिस्टम की वजह से आज ठेला लगाकर चाय बेचने को मजबूर हैं। पिता की डेथ और गरीबी ने खेल में उसे आगे बढ़ने का ज्यादा मौका नहीं दिया। न ही कभी सरकार से उसे कोई मदद मिली। बॉक्सिंग से दूरी कभी खत्म न हो, इसके लिए उसने अखिलेश यादव से लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार के उच्‍चाधि‍कारि‍यों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हारकर चाय बेचने का काम शुरू कर दिया। आयुष वैश्य ने newstrack.com से बात की और और अपनी अनटोल्ड स्टोरी को बयां किया।

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ऐसे बीता था बचपन

मेरा जन्म राजधानी के सदर बाजार कैंट इलाके में 8 नवम्बर 1995 में हुआ था। पिता अनिल कुमार वैश्य लखनऊ के कैंट में कैंटीन चलाते थे। अब उनकी डेथ हो चुकी है। उनकी कमाई से ही घर का खर्च चलता था।

घर में दो बहन और एक भाई थे। मैं उनमें सबसे छोटा था। भाई -बहनों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चलाने में पापा को काफी मुश्किलें आती थी। लोगों से उधार मांगकर बड़ी मुश्किल से स्कूल की फ़ीस जमा हो पाती थी।

हाईस्कूल में टीचर ने खेलने के लिए किया था मोटिवेट

मैंने हाई स्कूल की पढ़ाई लखनऊ मांटेसरी स्कूल से पूरी की है। मेरे स्कूल में गेम्स खेलने पर ज्यादा जोर दिया जाता था।हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान ही एक दिन मेरे एक टीचर की मुझ पर नजर पड़ गई।

टीचर ने मुझें अपने आस बुलाकर कहां ‘इतनी अच्छी बॉडी है। तुम्हे बाक्सिंग की प्रेक्टिस करनी चाहिए। मैंने टीचर की बात को काफी सिरियसली लिया और वहीं से बाक्सिंग की प्रेक्टिस करना शुरू कर दिया।

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21 साल की उम्र में संभाल ली ये जिम्मेदारी

2016 में पापा को मल्टीप्ल डिजीज हो गया और ट्रीटमेंट के दौरान ही उनकी डेथ हो गई। उस टाइम मैं 21 साल का था और लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था।

घर में कोई दूसरा और कमाने वाला नहीं था। दोनों बहनों की शादी हो चुकी थी वे अपने घर जा चुकी थी। पिता की डेथ के बाद स्कूल की फ़ीस जमा करने में प्रोब्लम आने लगी और बाद में मेरी पढ़ाई छूट गई।

वहीं से मैंने चाय बेचने का फैसला किया। मैंने मां के साथ मिलकर सदर बाजार कैंट में चाय बेचने का काम शुरू कर दिया।

ये सपना रह गया अधूरा बनने सपना रह गया अधूरा

मेरी तमन्ना हमेशा से नेशनल लेवल का प्लेयर बनने की थी। लेकिन घर के हालात ने मुझें आगे बढ़ने का मौक़ा नहीं दिया। मैंने कई बार नेशनल और स्टेट लेबल के बाक्सिंग चैम्पियनशिप में पार्टिसिपेट किया।

2015 में केरल में नेशनल लेबल पर आयोजित 35 नेशनल गेम्स में पार्टीपेट किया थोड़े से नंबर से चूक गया।

2015 -16 में हरियाणा में नेशनल लेबल पर आल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पार्टिसिपेट किया। वहां पर भी कुछ नम्बरों से चूक गया। उसके बाद घर चलाने की जिम्मेदारी में फंस गया और बाक्सिंग बीच में ही छोडनी पड़ी।

इस वजह से करनी पड़ रही है पार्ट टाइम जॉब

माँ अक्सर बीमार रहती है। उसका ट्रीटमेंट चल रहा है।एक बुआ है वो हैंडीकैप है। उनकी अभी तक मैरिज नहीं हुई है। वो हमारे घर पर ही रहती है। पिता जिस स्थान पर दुकान लगाते थे वह दुकान ढह गई।

उस जमीन को लेकर अब कोर्ट केस चल रहा है। माँ बुआ की दवाई, दूकान की जमीन का केस लड़ने और घर का खर्चा चलाने के लिए मजबूरन अब पार्ट टाइम जॉब करनी पड़ रही है।

सुबह में 7 से 12 बजे तक सदर इलाके में ठेले पर मां और बुआ के साथ चाय बेचता हूं। उसके बाद 12 बजे से रात 8 बजे तक गोल्ड जिम में बच्चों को फिटेनस की ट्रेनिंग देता हूं।

चाय बेचने से महीने में 5 से 6 हजार की कमाई हो जाती है। जिम से हर महीने 9 हजार रूपये फिटेनस ट्रेनिंग के लिए मिलते है। इन पैसे से घर की जरूरतें पूरी करता हूं।

गेम्स में ये मेडल कर चुके है अपने नाम

-2013 में फरुखाबाद में आयोजित राज्य स्तरीय जूनियर बालक बाक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

-2013 में 43वीं जूनियर बालक उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

-2014 में मुरादाबाद में आयोजित 33 वीं उत्तर प्रदेश सीनियर पुरुष मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

-2012 में झांसी में 58वीं प्रादेशिक विद्यालयी मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

-2011 में मेरठ में 42 वीं जूनियर बालक उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

Aditya Mishra

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