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नीतीश सुशासन के इंजीनियर, यहां पढ़ें इनका राजनीतिक सफर

नीतीश कुमार एक मजबूत नेता हैं, जिन्होंने अपने राज्य की तरक्की के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हुए हैं। उनका नाम देश के उन नेताओं में गिना जाता है और इनकी छवि साफ़ सुथरी और ईमानदार नेता की है। नितीश कुमार को बिहार के संदर्भ में समाज सुधारक कहा जाता है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 5 Nov 2020 2:22 PM GMT

नीतीश सुशासन के इंजीनियर, यहां पढ़ें इनका राजनीतिक सफर
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बिहार में टीकाकरण कार्य सबसे निचले स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और ऊपरी स्तर पर मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और पटना एम्स में होगा।
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नील मणि लाल

बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे और आखिरी चरण के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि यह चुनाव उनका आखिरी चुनाव है। नीतीश पिछले पंद्रह वर्षों से राज्य की गद्दी संभाल रहे हैं। इस बार भी वो एनडीए गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा हैं।

नीतीश कुमार एक समाज सुधारक

नीतीश कुमार एक मजबूत नेता हैं, जिन्होंने अपने राज्य की तरक्की के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हुए हैं। उनका नाम देश के उन नेताओं में गिना जाता है और इनकी छवि साफ़ सुथरी और ईमानदार नेता की है। नितीश कुमार को बिहार के संदर्भ में समाज सुधारक कहा जाता है। उन्होंने बिहार में व्याप्त जातीय और लिंग के आधार पर भेदभाव को न्यूनतम करने जैसे महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनकी साफ और निष्पक्ष छवि के कारण ही विपक्षी दलों के प्रतिष्ठित और अग्रणी नेता जैसे सोनिया गांधी, पी. चिदंबरम, राहुल गांधी ने उन्हें एक सफल, विकास के लिए प्रयासरत राजनेता और मुख्यमंत्री कहकर संबोधित किया है।

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प्रगतिवादी और व्यवहारिक सोच वाले नेता हैं नीतीश कुमार

नीतीश सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक सम्मानित राजनेता हैं। वे प्रगतिवादी और व्यवहारिक सोच वाले नेता हैं। वह जनता दल यूनाइटेड के एक अग्रणी और प्रतिष्ठित नेता हैं। वह नई विचारधारा से प्रभावित लेकिन गंभीर व्यक्तित्व के स्वामी हैं। नीतीश कुमार समाजवादी राजनीतिज्ञों की श्रेणी से संबंध रखते हैं।

उन्होंने राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, वी.पी सिंह जैसे राजनैतिक दिग्गजों की देख-रेख में राजनीति के सभी पक्षों को ध्यान से समझा है। अपने कार्यों से नीतीश कुमार ने साबित कर दिया है कि वे सुशासन के इंजीनियर हैं।

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जेपी आन्दोलन का हिस्सा रह चुके हैं नीतीश कुमार

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और आधुनिक बिहार के संस्थापकों में से एक महान गांधीवादी अनुग्रह नारायण सिन्हा के करीबी थे। नीतीश कुमार ने बिहार इंजीनियरिंग कालेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई थी। इसलिए वे इंजीनियर साहब के नाम से भी जाने जाते हैं। नीतीश कुमार जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में शामिल रहे थे। राजनीति में आने से पहले नीतीश ने बिहार राज्य बिजली बोर्ड में नौकरी भी की थी।

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राजनीतिक सफ़र

नीतीश कुमार पहली बार बिहार विधानसभा के लिए 1985 में चुने गये थे। 1986 में वे युवा लोकदल के अध्यक्ष बने। 1989 में उन्हें बिहार में जनता दल का सचिव चुना गया और उसी वर्ष वे नौंवी लोकसभा के सदस्य भी चुने गये थे। 1990 में वे पहली बार वीपी सिंह के मंत्रिमंडल में बतौर कृषि राज्यमंत्री शामिल हुए।

1991 में वे एक बार फिर लोकसभा के लिए चुने गये और उन्हें इस बार जनता दल का राष्ट्रीय सचिव चुना गया तथा संसद में वे जनता दल के उपनेता भी बने। 1989 और 2000 में उन्होंने बाढ़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1998-1999 में कुछ समय के लिए वे केन्द्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री भी रहे। अगस्त 1999 में गैसाल में हुई रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया था।

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2000 में बने सीएम

नीतीश कुमार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने लेकिन उन्हें सिर्फ सात दिनों में त्यागपत्र देना पड़ा। उसी साल वे फिर से केन्द्रीय मंत्रीमंडल में कृषि मंत्री बने। मई 2001 से 2004 तक वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केन्द्रीय रेलमंत्री रहे।

प्रथम बार रेल मंत्री रहते हुए नीतीश ने रेलवे की स्थिति सुधारने के लिए कई अच्छे कार्य किए थे और इन्हीं कार्यों के चलते इन्हें साल 2001 में फिर से ये पद सौंपा गया था। वे तीन साल तक हमारे देश के रेलवे मंत्री रहे थे। 2004 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने बाढ़ और नालंदा से चुनाव लड़ा लेकिन वे बाढ़ की सीट हार गये।

राजद शासन को उखाड़ फेंका

नीतीश कुमार नवंबर 2005 में लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल की बिहार में पंद्रह साल पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंकने में सफल हुए और मुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी हुई। इस बार ये पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहे थे और इन्होंने बिहार के विकास के लिए कई सारे कार्य भी किए थे। इनके इन्हीं कार्यों के चलते उन्हें सुशासन बाबू के नाम से पुकारा जाने लगा।

वर्ष 2010 के बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों के आधार पर वे भारी बहुमत से अपने गठबंधन को जीत दिलाने में सफल रहे और फिर से मुख्यमंत्री बने। 2014 में उन्होनें अपनी पार्टी की संसदीय चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

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छह बार रहे चुके हैं बिहार के मुख्यमंत्री

बिहार में नीतीश छह बार सीएम रह चुके हैं। साल 2015 में इन्होंने लालू प्रसाद यादव की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और ये सरकार केवल दो साल तक ही चल पाई थी। इनकी पार्टी ने लालू की पार्टी से अपना गठबंधन तोड़ दिया था। जिसके कारण इनकी सरकार गिर गई थी। वहीं इस सरकार के गिरने के बाद नीतीश ने भाजपा से हाथ मिला लिया था और फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बन गए।

मुख्यमंत्री कार्यकाल

1. मार्च, 2000 से 10 मार्च 2000

2. 24 नवंबर, 2005 से 24 नवंबर, 2010

3. 26 नवंबर, 2010 से मई 2014

4. 22 फरवरी, 2015 से 19 नवंबर, 2015

5. 20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017

6. 27 जुलाई से अभी तक

नीतीश कुमार को मिले हैं कई पुरस्कार

बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने अपने राज्य के विकास और सुशासन की दिशा में बहुत काम किया है। अपने बेहतरीन कार्यों के लिए नीतीश को कई अवार्ड भी दिए गए हैं।

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उपलब्धियां

- 2015 में बतौर मुख्यमंत्री नीतेश कुमार ने एक लाख स्कूली शिक्षकों की भर्ती की थी ताकि बिहार में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सके और लोगों को रोजगार भी मिल सके।

- बिहार में लड़कियों की शिक्षा के लिए भी नीतीश ने कई अहम कार्य किए हैं। उन्होंने स्कूल जाने वाली हर लड़की को साइकिल दी थी, ताकि लड़कियों को स्कूल जाने में कोई दिक्कत ना हो और अधिक से अधिक लड़कियां स्कूल जा सकें।

- नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में सूचना के अधिकार के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण की शुरुआत की। उन्होंने मनरेगा में ई-शक्ति कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत फोन पर ही रोजगार से जुड़े समाचार उपलब्ध कराए जाते हैं।

- इनके कार्यकाल के दौरान बिहार में फैस्ट ट्रैक न्यायालयों के तहत पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया।

- नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान मुफ्त दवाइयां, चिकित्सीय सेवाएं और किसानों को ऋण देने जैसी सेवाएं भी शुरू की गईं।

- पूर्व राष्ट्रपति अबुल कलाम और नीतीश की पहल के कारण नालंदा अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई।

- रेल मंत्री रहते हुए नीतीश ने रेल सेवा को सुचारु रूप से चलाने और टिकटों की बुकिंग को आसान बनाने के लिए इंटरनेट टिकट बुकिंग और तत्काल सेवा प्रारंभ की। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए देश भर में बड़ी संख्या में रेलवे टिकट काउंटर खुलवाए। ऐसा माना जाता है कि नितीश कुमार के प्रयासों के द्वारा ही दिवालिया होती भारतीय रेल सेवा फिर से तीव्र गति से विकास करने लगी।

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