गूंजती चीखें, प्रसव वेदना और प्रवासी ट्रेन में मासूम की किलकारी

घण्टों की मशक्क्त के बाद अनीता ने एक बच्चे को जन्म दे दिया, आज सुबह जब उनका परिवार लखनऊ रेलवे स्टेशन पर उतरा, तो उनके चेहरे रात का मंजर साफ़ पढ़ा जा सकता था। लेकिन बुरा वक्त बीत चुका था अनीता के चेहरे पर अपने नवजात का चेहरा देखकर मातृत्व की आभा चमक उठी थी।

special trains

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आशुतोष त्रिपाठी

लखनऊ : महाराष्ट्र से जब ट्रेन चली तो उत्तर प्रदेश के गोंडा की अनीता गर्भवती थी। कोख में एक नन्हीं जान पल रही थी। लेकिन लखनऊ में उतरी तो उसकी गोद भर चुकी थी।

लेकिन अनीता ने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि महाराष्ट्र से गोंडा का उसका ये सफर कठिन परीक्षा की घड़ी बनने वाला है।

ट्रेन जब चली तो उसकी कोख में पल रही नन्हीं जान शांत थी उसे भी कोई कष्ट नहीं था।

लेकिन ट्रेन के सूरत पहुंचते-पहुंचते अनीता की हालत ख़राब होने लगी। शुरू में उसे लगा थोड़ी देर में दर्द कम हो जाएगा।

क्योंकि अभी तो वह लॉकडाउन के दर्द के सदमे से भी नहीं उबर पाई थी। लेकिन अनीता का ये दर्द न थमना था न थमा।

अनीता की मुश्किल घड़ी आ चुकी थी उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी थी, पीड़ा से चीत्कार कर रही अनीता की चीखें सुनकर चलती ट्रेन के सहयात्री भी सहम गए।

वो चिल्लाती रही थी और सभी बुत बने बैठे थे। पास में बैठा पति बार- बार ढांढस दे रहा था, लेकिन वो खुद नहीं समझ पा रहा था कि वो क्या करे।

घण्टों की मशक्क्त के बाद अनीता ने एक बच्चे को जन्म दे दिया, आज सुबह जब उनका परिवार लखनऊ रेलवे स्टेशन पर उतरा, तो उनके चेहरे रात का मंजर साफ़ पढ़ा जा सकता था। लेकिन बुरा वक्त बीत चुका था अनीता के चेहरे पर अपने नवजात का चेहरा देखकर मातृत्व की आभा चमक उठी थी।

अनीता के पति ने बताया कि रेलवे प्रशासन द्वारा उनकी कोई मदद नहीं की गई, हालांकि लखनऊ रेलवे स्टेशन पर उन्हें व्हील चेयर उपलब्ध करा दी गयी थी।

ख़ुशी की बात यह है कि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। पिता ने बच्चे का नाम अनिकेश कुमार रखा है।