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सब्जियों के बीजों ने चमका दी इन पत्रिकाओं की किस्मत

यूनाइटेड किंग्डम में प्रिंट और डिजिटल सब्स्क्रिप्शन के सबसे बड़े बाजार आई सब्स्क्राइब के अनुसार यूके में लॉक डाउन के बाद से पत्रिकाओं की बिक्री 260 फीसदी बढ़ गई है। इसकी वजह लोगों का घरों में कैद हो जाना और उनके पास समय की कमी न होना है।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 26 May 2020 8:15 AM GMT

सब्जियों के बीजों ने चमका दी इन पत्रिकाओं की किस्मत
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लखनऊ। आज के दौर में बागबानी बहुत लोकप्रिय हॉबी हो गई है। इतनी लोकप्रिय कि इसने कुछ डूबती मैगजीनों यानी पत्रिकाओं को मदद का सहारा दे दिया है।

देश में लॉकडाउन शुरू होने के बाद एक दक्षिण भारतीय पारिवारिक पत्रिका ने मार्केटिंग की एक नई रणनीति का परीक्षण करने का फैसला किया। इस रणनीति के तहत पत्रिका के हर अंक के साथ सब्जियों के बीजों के छोटे छोटे पैकेट चिपका दिये गए। नतीजा हैरतअंगेज निकला। पत्रिका का सर्कुलेशन 30 फीसदी बढ़ गया। माना जा रहा है कि बीजों ने ही कोरोना काल में पत्रिका को सहारा दिया है।

पत्रिकाओं के कवर पर एक्स्ट्रा का चलन

सब्जियों के बीज तो एक पहलू हैं ही, वैसे भी पत्रिकाओं के कवर पर एक्सट्रा आइटम देने का चलन 60 के दशक से जारी है। अमेरिका और यूरोप में उस समय में पत्रिकाओं के कवर पर रिकॉर्ड एक्सट्रा आइटम के रूप में दिये जाते थे। 90 और 2000 के दशक में कवरमाउंट के रूप में सीडी का खूब चलन रहा। ये इतना लोकप्रिय थे कि प्रख्यात गायक प्रिंस ने 2007 में अपने प्लानेट अर्थ के डेब्यू सीडी को यूके के द मेल अखबार के साथ बंटवाया था।

भारत में भी उस समय कम्प्युटर की पत्रिकाओं के साथ सीडी और डीवीडी दिये जाते द। बहुत सी पत्रिकाओं की बिक्री का मुख्य आधार यही सीडी हुआ करती थीं। 90 के दशक में अमेरिका ऑन लाइन यानी एओएल फूड पैकेट्स, कॉर्न फ़्लेक्स के डिब्बों और पत्रिकाओं के कवर पर सीडी चिपका कर बांटा करता था। एक अनुमान है कि उस वक्त एओएल कंपनी 300 मिलियन डालर जे ज्यादा कीमत के सी डी मुफ्त में बांटती थी।

स्पेशलिस्ट मीडिया की चांदी

अब कोरोना वायरस काल में दुनिया की पारंपरिक मीडिया इंडस्ट्री संकट की स्थिति में पहुँच गई है। जहां विज्ञापन से होने वाली आमदनी रसातल में पहुँच गई है वहीं विषय विशेष पर आधारित स्पेशलिस्ट मीडिया ने अपने को इस अभूतपूर्व समय के अनुरूप ढाल लिया है और बिक्री व नए ग्राहकों की संख्या में जबर्दस्त उछाल दर्ज किया है।

भारी मांग

बज़फीड के अनुसार पश्चिमी देशों में लॉकडाउन के दौर में चमकदार पत्रिकाओं के ग्राहक बढ़े हैं, पजल्स व बच्चों की सामग्री देने वाली पत्रिकाओं की बिक्री बढ़ी है। घरों में कैद गैर पेशेवर कुक, बेकरी और बागबानी करने वालों के हुनर का फायदा उठाने वाली वेब साइट्स को रिकार्ड संख्या में ट्रैफिक मिल रहा है।

इंटेरनेशनल मीडिया कंपनी कोन्दे नास्ट की पत्रिकाओं - न्यूयॉर्कर, वैनिटी फेयर, जीक्यू, वायर्ड, आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट आदि स्पेशलिस्ट पत्रिकाओं के ग्राहकों की संख्या रिकार्ड लेवल पर पहुँच गई है। इन पत्रिकाओं के डिजिटल या ऑनलाइन संस्करण सर्वाधिक बिकते हैं। सिर्फ अमरीका ही नहीं बल्कि भारत, चीन, जर्मनी, स्पेन और रूस में इनके ग्राहकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। यूनाइटेड किंग्डम में तो नए ग्राहकों की संख्या पिछले साल की तुलना में 420 फीसदी बढ़ गई है।

यूनाइटेड किंग्डम में प्रिंट और डिजिटल सब्स्क्रिप्शन के सबसे बड़े बाजार आई सब्स्क्राइब के अनुसार यूके में लॉक डाउन के बाद से पत्रिकाओं की बिक्री 260 फीसदी बढ़ गई है। इसकी वजह लोगों का घरों में कैद हो जाना और उनके पास समय की कमी न होना है।

नीलमणिलाल की रिपोर्ट

राम केवी

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