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IND vs AUS Final: टीम इंडिया के लिए फिर अनलकी साबित हुआ यह अंपायर, लाबुशेन को दिया नॉटआउट, सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोलिंग

IND vs AUS Final: रिचर्ड कैटलबोरो पहले भी कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारत के लिए अनलकी साबित हुए हैं और इस कारण सोशल मीडिया पर उनकी जमकर ट्रोलिंग भी की जा रही है।

Anshuman Tiwari
Written By Anshuman Tiwari
Published on: 20 Nov 2023 11:23 AM IST
IND vs AUS Final
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IND vs AUS Final (Photo: Social Media)

IND vs AUS Final: आईसीसी वनडे विश्व कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के हाथों टीम इंडिया की हार से करोड़ों फैंस का दिल टूट गया है। भारतीय टीम के 240 रनों पर ऑलआउट होने के बाद आस्ट्रेलिया ने फाइनल मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया। इस मैच के दौरान एक समय ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 47 रनों पर तीन विकेट गंवा दिए थे मगर उसके बाद ट्रेविस हेड और मार्नस लाबुशेन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

हालांकि लाबुशेन को पारी के 28वें ओवर के दौरान अंपायर रिचर्ड कैटलबोरो की ओर से नॉटआउट दिए जाने का बड़ा फायदा भी मिला। जसप्रीत बुमराह की इस ओवर की पांचवीं गेंद लाबुशेन के पैड पर लगी थी। टीम इंडिया की ओर से रिव्यू लिए जाने के बावजूद अंपायर्स कॉल होने के कारण लाबुशेन आउट होने से बच गए। रिचर्ड कैटलबोरो पहले भी कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारत के लिए अनलकी साबित हुए हैं और इस कारण सोशल मीडिया पर उनकी जमकर ट्रोलिंग भी की जा रही है।

अंपायर के फैसले से ऑस्ट्रेलिया को फायदा

दरअसल पारी के 28वें ओवर के दौरान लाबुशेन के पैड में गेंद लगने के बाद विकेटकीपर राहुल को पूरा विश्वास था कि लाबुशेन आउट थे। उन्होंने कप्तान रोहित शर्मा से डीआरएस का इस्तेमाल करने को कहा। कप्तान रोहित ने भी देरी नहीं की और डीआरएस मांगा। करोड़ों क्रिकेट फैंस की उम्मीद भी इस डीआरएस पर टिकी हुई थी। लाबुशेन के आउट होने पर टीम इंडिया इस मैच में वापसी कर सकती थी मगर ऐसा नहीं हो सका।

अंपायर रिचर्ड कैटलबोरो एक बार फिर टीम इंडिया के लिए दुर्भाग्यशाली साबित हुए। रिव्यू में साफ दिखा कि यह फैसला अंपायर्स कॉल था। यानी अगर अंपायर ने उसे नॉटआउट दिया तो नॉटआउट, अगर आउट दिया होता तो आउट। यदि उस समय अंपायर कैटलबोरो लाबुशेन को आउट देते तो भारत को बड़ी कामयाबी मिल सकती थी और इस मैच की तस्वीर भी बदल सकती थी।

विकेट से टकरा रही थी गेंद

रिव्यू में साफ दिखा कि गेंद विकेट से टकरा रही थी, लेकिन वह अंपायर्स कॉल था। अंपायर्स कॉल का मतलब है कि गेंद इधर उधर हो सकती थी, यानी एरर ऑफ मार्जिन का फायदा अंपायर को दिया जाता है। पिछले काफी लंबे समय से अंपायर्स कॉल को लेकर काफी विवाद होता रहा है और कई क्रिकेट दिग्गजों ने भी इस पर उंगली उठाई है।

पहले भी अनलकी साबित हुए

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब अंपायर रिचर्ड कैटलबोरो भारत के लिए अनलकी साबित हुए हैं। फाइनल मुकाबले के लिए उन्हें अंपायरिंग का जिम्मा सौंपे पर जाने के बाद ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप (2019) सेमीफाइनल, 2023 के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल और टी-20 वर्ल्ड कप (2014) के फाइनल मैच में कैटलबोरो ही मैदानी अंपायर थे। मजे की बात यह है कि इन मैचों में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा था।

सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोलिंग

50 वर्षीय रिचर्ड कैटलबोरो अंपायर बनने से पहले क्रिकेटर रहे हैं। कैटलबोरो ने 33 फर्स्ट क्लास और 21 लिस्ट-ए मैचों में कुल 1448 रन बनाए थे। फाइनल मुकाबले के बाद कैटलबोरो की सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोलिंग की जा रही है। कोई उन्हें पनौती बता रहा है तो कोई उन्हें टीम इंडिया के लिए अशुभ और अनलकी बता रहा है। कई लोगों ने तो यहां तक लिख डाला है कि उन्हें अंपायर बनाए जाने से ही टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व क्रिकेटर अंपायर्स कॉल के खिलाफ

अंपायर्स कॉल को लेकर कई पूर्व क्रिकेटर भी नाराज दिखे हैं और उन्होंने इसकी तीखी आलोचना की है। पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान, गौतम गंभीर और हरभजन सिंह समेत पाकिस्तान के वसीम अकरम, शोएब मलिक, मिस्बाह उल हक समेत कई दिग्गजों ने इसकी आलोचना करते हुए इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

उनका कहना है कि अगर गेंद किसी भी तरह से विकेट से टकराती है तो उसे आउट दिया जाना चाहिए। यह नियम नहीं होना चाहिए कि कुछ मौकों पर जब अंपायर उसे आउट कहे तब बल्लेबाज आउट हो और किसी समय जब बल्लेबाज को नॉटआउट दिया जाए तो बल्लेबाज नॉटआउट घोषित हो। रविवार को फाइनल मुकाबले के दौरान ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज लाबुशेन को इसका बड़ा फायदा मिला और वे नॉटआउट माने गए।

Snigdha Singh

Snigdha Singh

Leader – Content Generation Team

Hi! I am Snigdha Singh, leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

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