Top

इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता— अंश और आशी ने जीता कांस्य पदक

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 8 Dec 2017 12:12 PM GMT

इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता— अंश और आशी ने जीता कांस्य पदक
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के अंश और आशी ने अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में न केवल कांस्य पदक जीतकर शाहजहांपुर का नाम रोशन किया है, बल्कि देश को भी गौरवान्वित किया। दोनों ने पंजाब में हुई इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। आशी की उम्र अभी 18 साल है, जबकि अंश मात्र 12 वर्ष की है। पंजाब में हुई इस जीत के बाद इनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। यह प्रतियोगिता 24, 25 और 26 नवंबर को पंजाब के अमृतसर में हुई थी। इस प्रतियोगिता में बंग्लादेश, इण्डोनेशिया, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों को खिलाडिय़ों को धूल चटाने वाले आशी और अंश की चाहत देश के लिये गोल्ड मेडल की है।

कांस्य पदक विजेता 18 साल की विजेता आशी ने बताया कि वह छोटे से कस्बे तिलहर में किराए के मकान में रहती है। उसके पिता सुदेश कुमार गुप्ता की मिठाई की दुकान है। दुकान भी किराए की है। पिता जी ने जैसे-तैसे मेहनत करके मेरी शुरूआती पढ़ाई करवाई। आशी के मुताबिक उसने और उसके परिवार ने बहुत स्ट्रगल किया है। आर्थिक स्थिति ऐसी है कि उसके पिता ने पैसे उधार लेकर दिए तब जाकर पंजाब में प्रतियोगिता में भाग ले सके हैं। आशी ने बताया कि कांस्य पदक जीतने के बाद उसे बेहद खुशी हो रही है। घर पर रिश्तेदार आते जा रहे हैं और बधाई देते रहे हैं।

आशी का सपना है कि वह ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करे। वहीं आठवीं के छात्र अंश के पिता अखिलेश गौतम यहां ग्राम विकास अधिकारी हैं और मां सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापिका है। अंश के माता-पिता की इच्छा है कि अंश ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम पूरी दुनिया में

रोशन करे।

raghvendra

raghvendra

राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

Next Story