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Milkha Singh Death: मिल्खा सिंह को पाक में मिला था फ्लाइंग सिख का खिताब, पं.नेहरू के समझाने पर लाहौर गए थे दौड़ने

Milkha Singh Death: मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का नाम पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने दिया है।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariDharmendra SinghPublished By Dharmendra Singh

Published on 19 Jun 2021 4:35 AM GMT

Milkha Singh Flying Sikh
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मिल्खा सिंह (काॅन्सेप्ट फोटो: सोशल मीडिया)

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Milkha Singh Death: करीब एक महीने तक कोरोना से जंग लड़ने के बाद फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का चंडीगढ़ पीजीआई में शुक्रवार को निधन हो गया। एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले ओलंपियन मिल्खा सिंह गत 20 मई को कोरोना से संक्रमित हुए थे।

दौड़ के क्षेत्र में पूरी दुनिया में नाम कमाने वाले मिल्खा सिंह फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर थे मगर यह जानना भी दिलचस्प है कि मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का खिताब 1960 में पाकिस्तान में मिला था। उन्हें यह खिताब पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने दिया था।

पूरी दुनिया थी मिल्खा की प्रतिभा की दीवानी

अपने दौर में मिल्खा सिंह की गिनती दुनिया के महान धावकों में की जाती थी क्योंकि उन्होंने अपनी रफ्तार से पूरी दुनिया को दीवाना बना रखा था। उन्होंने एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ ही 1960 के रोम ओलंपिक में भी गजब का प्रदर्शन किया था। हालांकि वे ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से चूक गए थे। वे चौथे स्थान पर रहे थे और दौड़ के दौरान पीछे मुड़कर अन्य धावकों को देखना उनके लिए मह॔गा साबित हुआ था।

ठुकरा दिया था लाहौर में दौड़ का आमंत्रण

1960 में मिल्खा सिंह को पाकिस्तान में दौड़ने के लिए निमंत्रित किया गया था, लेकिन मिल्खा सिंह भारत-पाक बंटवारे के दौरान हुए दंगों से इतना ज्यादा दुखी थे कि वे पाकिस्तान में दौड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। मिल्खा सिंह खुद पाकिस्तान में पैदा हुए थे और उनका परिवार विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आ गया था।
उनके परिवार ने काफी दिन दिल्ली के शरणार्थी शिविर में गुजारे थे। इसलिए उन्होंने विभाजन के दर्द को काफी नजदीक से महसूस किया था। यही कारण था कि उन्होंने पाकिस्तान में दौड़ने का आमंत्रण ठुकरा दिया था।

पूर्व पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ मिल्खा सिंह (फाइल फोटो: सोशल मीडिया)
पंडित नेहरू ने पुरानी बातें भूलने को कहा
मिल्खा सिंह की ओर से पाकिस्तान में दौड़ने का आमंत्रण ठुकराने की खबर अगले दिन अखबारों में प्रमुखता से छपी। उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और उन्हें भी मिल्खा सिंह के पाकिस्तान में दौड़ने का आमंत्रण ठुकराने की जानकारी मिली।
यह जानकारी मिलने के बाद नेहरू ने तत्काल मिल्खा सिंह को बुलाया और उनसे पुरानी बातें भूल जाने के लिए कहा। नेहरू ने मिल्खा सिंह को समझाया कि खेल के क्षेत्र में खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने मिल्खा सिंह से पुरानी बातें भूल कर लाहौर में दौड़ का आमंत्रण स्वीकार करने की बात कही।

पाकिस्तान में हुआ था गजब का स्वागत

तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के समझाने के बाद मिल्खा सिंह लाहौर में दौड़ने के लिए तैयार हो गए। 1960 में लाहौर में होने वाली इस दौड़ में हिस्सा लेने के लिए मिल्खा सिंह बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गए थे।
पाकिस्तान में भी मिल्खा सिंह के प्रति गजब की दीवानगी थी। वे खुली जीप में सवार होकर लाहौर पहुंचे। उनके प्रति लोगों का इतना ज्यादा प्यार था कि सड़क के दोनों और भारी भीड़ उनके स्वागत के लिए खड़ी हुई थी और भीड़ के हाथों में पाकिस्तान ही नहीं भारत के भी झंडे लहरा रहे थे।

प्रतियोगिता के दौरान दौड़ते मिल्खा सिंह (फाइल फोटो: सोशल मीडिया)
मिल्खा ने मौलवियों से कही थी यह बात
उस समय पाकिस्तान में अब्दुल खालिक नाम के मशहूर धावक थे और खालिक का मुकाबला करने के लिए ही मिल्खा सिंह को पाकिस्तान आमंत्रित किया गया था। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों की नजर मिल्खा और खालिक के बीच होने वाले इस मुकाबले पर टिकी हुई थी।
दौड़ शुरू होने से पहले कुछ मौलवियों ने आकर खालिक से कहा कि खुदा आपको यह दौड़ जीतने की पूरी ताकत दे। यह कहकर जब मौलवी जाने लगे तो मिल्खा ने कहा की मैं खुदा का बंदा हूं और खुदा से मुझे भी ताकत देने के लिए दुआ करिए। इस पर मौलवियों ने मिल्खा सिंह को भी ताकत देने की दुआ मांगी।

अयूब खान ने दिया था फ्लाइंग सिख का खिताब

इस दौड़ के दौरान अब्दुल खालिक और मिल्खा सिंह के बीच जोरदार मुकाबला हुआ मगर मिल्खा सिंह ने अपनी रफ्तार से खालिक को पछाड़ दिया और दौड़ जीतने में कामयाबी हासिल की।
उस दौर के दो दिग्गज धावकों के बीच इस चर्चित मुकाबले को देखने के लिए दर्शक दीर्घा में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान भी मौजूद थे। दौड़ के बाद उन्होंने मिल्खा सिंह के गले में मेडल डालते हुए उन्हें फ्लाइंग सिख का खिताब दे डाला।

दौड़ के बाद इसी नाम से मशहूर हुए मिल्खा सिंह

जनरल अयूब खान ने मिल्खा सिंह से कहा कि तुम पाकिस्तान आकर दौड़े नहीं हो बल्कि ऐसा लगा जैसे तुम पाकिस्तान में उड़ रहे हो। आज पाकिस्तान तुम्हें फ्लाइंग सिख का खिताब दे रहा है। इस दौड़ के बाद मिल्खा सिंह फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर हो गए। बाद में उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान फ्लाइंग सिख का खिताब देने के लिए जनरल अयूब खान के प्रति शुक्रिया भी अदा किया था।

भारतीयों के दिल में मिल्खा के लिए खास जगह

मिल्खा सिंह अपने करियर के दौरान ही नहीं बल्कि खेल की दुनिया से संन्यास लेने के बाद भी भारत में काफी लोकप्रिय रहे। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिल्खा सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि हर भारतीय के दिल में मिल्खा सिंह के लिए एक खास जगह थी।
पीएम मोदी ने कहा कि मिल्खा सिंह के व्यक्तित्व ने उन्हें लाखों लोगों का चहेता बना दिया। उनके निधन के साथ देश ने एक ऐसा महान खिलाड़ी को दिया है जिन्होंने देश की कल्पना पर कब्जा किया था।


Dharmendra Singh

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