मोहाली वन डे: कोटला की हार धोने उतरेगा भारत,कीवी साबित करेंगे संयोग नहीं थी जीत

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वन डे में अपनी अंतिम सेंचुरी 2013 में ऑस्ट्रेलिया में इसी मोहाली ग्राउंड पर लगाई थी। 139 नाबाद का वह धमाका उनके जेहन में होगा। तब से अब तक उनका बल्ला शतक का इंतजार कर रहा है। धोनी का बल्ला काफी दिनों से नहीं गरजा है और उनके पास इस ग्राउंड पर अपनी धमक दोहराने का मौका है।

Published by zafar Published: October 22, 2016 | 5:23 pm
Modified: October 22, 2016 | 5:34 pm
मोहाली वन डे: कोटला की हार धोने उतरेगा भारत,कीवी साबित करेंगे संयोग नहीं थी जीत

मोहाली: रविवार को टीम इंडिया जब मोहाली में न्यूजीलैंड के खिलाफ वन डे खेलने उतरेगी, तो दिल्ली की करीबी हार का बदला उसके ध्यान में सबसे ऊपर होगा। फिरोजशाह कोटला की हार टीम इंडिया के लिए धक्के जैसी है। उसका कारण यह है कि इससे पहले वह टेस्ट और पहले वन डे में न्यूजीलैंड को स्वीप करती हुई आ रही थी। दूसरी तरफ, कोटला में न्यूजीलैंड को भारत की धरती पर 13 साल बाद कोई जीत मिली है।

कप्तान से उम्मीद
-कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वन डे में अपनी अंतिम सेंचुरी 2013 में ऑस्ट्रेलिया में इसी मोहाली ग्राउंड पर लगाई थी। 139 नाबाद का वह धमाका उनके जेहन में होगा। तब से अब तक उनका बल्ला शतक का इंतजार कर रहा है। धोनी का बल्ला काफी दिनों से नहीं गरजा है और उनके पास इस ग्राउंड पर अपनी धमक दोहराने का मौका है।
-यह ग्राउंड टेस्ट कप्तान विराट कोहली के लिए भी खास है। वर्ल्ड टी-20 के मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 51 गेंदों पर 82 रनों की वह धुआंधार पारी विराट को भी याद होगी, जिसने मुकाबले में टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचाया था।
-कोटला ग्राउंड पर जहां अन्य बल्लेबाजों ने निराश किया, केदार जाधव ने धोनी के साथ पांचवें विकेट के लिए 66 रन जोड़ कर एक ठोस जमीन बनाई है। उन्होंने सर्वाधिक 41 रनों का योगदान दिया। उम्मीद है कि कोटला में जादव मौजूद रहेंगे और कंसिस्टेंसी का सुबूत देंगे।

जेहन में बदला
-कोटला की करीबी हार ने टीम में निराशा जरूर भरी होगी। क्योंकि कलीन स्वीप की तरफ बढ़ती टीम इंडिया के लिए यह बड़ा झटका था। 243 का लक्ष्य टीम इंडिया के पिछले लगातार प्रदर्शन को देखते हुए बड़ा नहीं था, लेकिन ऐन मौकों पर बल्लेबाजों के पैर उखड़ने और अति आत्मविश्वास में विकेट गंवाने के कारण टीम पिछड़ गई।
-अजिंक्य राहाणे से बड़ी उम्मीदें हैं। उनमें क्रिकेट भरी हुई है, लेकिन घायल शिखर धवन की जगह मौका मिलने के बाद भी ओपेनर के रूप में वह कोटला में उम्मीद के मुताबिक बड़ा स्कोर नहीं दे सके। उनके ऊपर मोहाली में कुछ बड़ा करने का दबाव होगा।
-महज 19 रन की पारी खेल कर मनीष पांडे ने भी फिलहाल तो निराश ही किया है। वन दे में उनके औसत के अनुरूप बड़ी पारियां आना अभी बाकी हैं।
-मध्य क्रम में इसलिए भी दूसरे खिलाड़ियों से बड़ी पारियों की जरूरत है ताकि सारा बोझ विराट पर न पड़े।

गेंद से बेहतर
-अभी टीम इंडिया गेंद से काफी बेहतर है।
-उमेश यादव और हार्दिक पांड्या ने टीम को गेंद से अच्छी शुरुआत देकर दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाई है। बुमरा से भी इन दोनों गेंदबाजों को अच्छा सहयोग मिला है। कोटला में महज 35 रन देकर तीन विकेट का उनका प्रदर्शन बेहतरीन माना जाएगा।
-स्पिनर के रूप में अमित शर्मा प्रभावशाली साबित हुए हैं। कोटला में उनके तीन विकेट अहम हैं। अक्षर पटेल ने भी पुरानी गेंद का बेहतरीन इस्तेमाल किया है।

लौटना चाहेगा न्यूजीलैंड
-न्यूजीलैंड की तरफ से कप्तान केन विलियम्सन और टॉम लोथम कंसिस्टेंट बल्लेबाज के रूप में स्थापित हैं।
-गप्टिल और रॉस टेलर का बल्ला भी किसी समय फिर चमक सकता है।
-कीवीज ने पिछले मैच में तीन बदलाव किेए थे। इनमें ट्रेंट बोल्ट नई गेंद से प्रभावशाली रहे। मोहाली में उनके बने रहने की संभावना है।
-गेंद से साउथी का प्रदर्शन कोटला में अच्छा रहा है।

-स्पिनर सैंटनर और सोढ़ी में से किसी एक के ही टीम में होने की उम्मीद है। कप्तान के सामने दोनों को चुनने की चुनौती होगी।
-बहरहाल, लंबे इंतजार के बाद कोटला की जीत से न्यूजीलैंड उत्साहित है, और उसे कम करके नहीं आंका जा सकता।

(फोटो साभार:espncricinfo.com)

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