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बचपन में सिर से उठ गया था पिता का साया, चाचा से ली कुश्ती की ट्रेनिंग, अब जीता गोल्ड

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 21 Aug 2018 5:01 AM GMT

बचपन में सिर से उठ गया था पिता का साया, चाचा से ली कुश्ती की ट्रेनिंग, अब जीता गोल्ड
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नई दिल्ली: जकार्ता एशियन गेम्स में विनेश फोगाट ने इतिहास रच दिया। 50 किग्रा भारवर्ग का फाइनल अपना नाम करते हुए विनेश एशियाई खेलों की कुश्ती स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला बन गई। फोगाट परिवार से संबंध रखने वाली विनेश इस मुकाम तक काफी संघर्ष के बाद पहुंची।

बचपन में सिर से उठ गया था पिता का साया

राष्ट्रीय स्तर के पहलवान महावीर फोगाट की चार बेटियां हैं-गीता, बबीता, विनेश और रितु, जो खुद अपने पिता महावीर फोगाट की तरह शानदार पहलवान हैं और देश के लिए कई मेडल जीत चुकी हैं। महावीर की चार बेटियां और एक बेटा हैं, जिन्हें उन्होंने पहलवान बनाया है। इसके अलावा महावीर ने अपने भाई की भी दो बेटियों विनेश और प्रियंका फोगाट को पहलवानी की शिक्षा दी है। विनेश जब छोटी थीं तभी उनके पिता की हादसे में मौत गई थी। महावीर ने इस कमी को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद विनेश उस परिवार का ही एक हिस्सा बनकर रहने लगीं।

ताऊजी से ली ट्रेनिंग

विनेश पुरानी बातों को याद करते हुए कहती हैं कि मैं कुश्ती में काफी अच्छी थी लेकिन मुझे इसका कोई शौक नहीं था। लेकिन ताऊजी ट्रेनिंग में कोई कोताही नहीं बरतते थे। वह छड़ी लेकर हमसे ट्रेनिंग करवाते थे। अगर ऐसा नहीं होता तो मैं भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही होती।

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महावीर को ये गुण विरासत में मिला

महाबीर फोगाट के पिता मान सिंह गांवों में कुश्ती लड़ते थे। इसलिए महावीर को ये गुण विरासत में मिला। वो खुद 15 साल की उम्र से रेसलिंग कर रहे हैं। नेशनल लेवल पर कई कुश्ती लड़ चुके महावीर फोगाट की पत्नी का नाम दया कौर है, दोनों की पहली संतान का नाम गीता है, बेटी के जन्म होने के बाद ही दोनों पति-पत्‍नी ने ठान लिया था कि वो गीता को पहलवान बनाएंगे, लेकिन हरियाणा की एक लड़की मर्दों के साथ कुश्ती करे, ये सोचना भी शायद उस वक्त गलत था, जाहिर है मुश्किलें तो आनी ही थीं लेकिन महावीर और दया फैसले से टस से मस नहीं हुए।

रियो ओलम्पिक में चोट लगने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी

रियो ओलंपिक में चोट के बाद बाहर हुई महिला पहलवान विनेश फोगाट ने एशियाई खेलों में भारत को दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया। एशियन गेम्स के इतिहास में ये पहला मौका है जब भारत ने महिला रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीता है। विनेश ने इससे पहले 2014 के राष्ट्रमण्डल खेल में भी स्वर्ण पदक जीता था।

चोट के बाद विनेश ने कहा था कि ओलंपिक पदक मेरा सपना था और यह घुटने की चोट से टूट गया। मैं फ्रीस्टाइल स्पर्धा के 48 किलोग्राम भार वर्ग में चीन की सुन यानान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला लड़ रही थी और 1-0 से आगे भी थी लेकिन तभी सुन के दांव में मेरा घुटना चोटिल हो गया और मुझे स्ट्रेचर से बाहर लाया गया। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी।

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ऐसे मिली कामयाबी

सोमवार को भी एशियाई खेलों में विनेश जब अपनी बाउट में उतरीं तो वह पैर में दर्द की समस्या से जूझ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सभी बाउट जीतीं और जापानी पहलवान को कोई मौका नहीं दिया।

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