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रेसलर बजरंग पूनिया 2020 के ओलंपिक में जीतना चाहते हैं गोल्ड मेडल

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 16 Nov 2018 6:05 AM GMT

रेसलर बजरंग पूनिया 2020 के ओलंपिक में जीतना चाहते हैं गोल्ड मेडल
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गोरखपुर: गोरखपुर में आयोजित होने वाली स्टेट रेसलिंग चैंपियनशिप में रेसलर बजरंग पूनिया बतौर मुख्यातिथि के रूप में सम्मलित होने आए है। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट व अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित विश्व के नंबर वन रेसलर बजरंग पूनिया रेसलिंग की दुनिया में युवाओं के बढ़ते रुझान व डोपिंग के आरोपो से बचकर अपना कैरियर शिर्ष पर ला सकते है।

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कम समय में बड़ा नाम कमा कर भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन करने का काम किया है, इस दौरान उन्होंने बताया कि फिल्मों में रेसलिंग के आने से रेसलिंग करने वालों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। साथ ही उनका अगला लक्ष्य 2020 में होने वाले ओलंपिक चैंपियनशिप में अपना विश्व का नंबर 1 का खिताब बनाए और भारत को एक और गोल्डमेडल दिलाने में लगे हुए है।

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उन्होंने बताया कि वह पहली बार गोरखपुर आए हैं उन्हें काफी अच्छा लग रहा है और लोगों का प्यार और सम्मान उन्हें लगातार मिल रहा है। किसी खिलाड़ी के लिए वर्ल्ड रैंकिंग पर जाना हर खिलाड़ी का सपना होता है और मेरा भी यही सपना था और मेरी लगातार यही कोशिश है। कि मैं आगे भी नंबर वन के खिताब को बरकरार रखु और मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि जो आगे टूर्नामेंट होने वाले हैं।

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उनमें में नंबर 1 के खिलाफ पर बना रहा हूं। 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक प्रतियोगिता की तैयारियों में लगे हुए हैं, नंबर वन का खिताब पाने में पूरे देश का आशीर्वाद और गुरुओं का साथ मिला है साथ में मेरे माता-पिता मेहनत का फल है जो मैं आज नंबर 1 के खिताब पर कब्जा कर पाया हूं और मेरा यह सौभाग्य है कि मुझे इतने अच्छे गुरु मिले जो मुझे इतनी कम उम्र में यहां तक पहुंचाने का काम किया है।

वही अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने के संबंध में बताया कि एक खिलाड़ी के लिए राष्ट्रपति से सम्मान प्राप्त करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। खेल का सबसे बड़ा अवार्ड खिलाड़ी को मिली और मेरा भी यही सपना था और 2015 में मुझे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह अनुभव होता है। जब मेडल जीतने के बाद आपको दोबारा सम्मानित किया जाता है।

प्रतिबंधित दवाओं के सेवन को लेकर उन्होंने खिलाड़ियों को सुझाव दिया कि खिलाड़ियों की खुद की जिम्मेदारी होती है कि वह स्ट्राइड मिली प्रतिबंधित दवा का सेवन ना करें। यदि आप इस प्रतिबंधित दवा का सेवन करते हुए पाए जाते हैं तो आप को इसकी सजा जरूर मिलेगी और हर खिलाड़ी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब भी वह खेलने जाता है तो यह जरूरी नहीं कि वह भारत में जांच के दौरान अगर वह बच निकला तो विदेशों में यह जांच नहीं होगी वहां पर भी जांच होगी और अगर प्रतिबंधित दवाओं का सेवन करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है और इसकी जिम्मेदारी स्वयं खुद खिलाड़ी की होती है।

युवाओं को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह नेट पर भी सर्च करते हैं तो उन्हें पता चल जाएगा कि किन किन दवाओं व खाद्य पदार्थों में स्टेरॉयड मिला होता है। आप क्या लेते हैं और डोप में आता है कि नहीं आता है। इसकी जानकारी आपको मिल जाएगी।

वही रेसलिंग पर बन रही फिल्मों से इस खेल को काफी बढ़ावा मिल रहा है, लोगों का रुझान इस खेल के प्रति बड़ा है हमारे देश की कुश्ती इससे काफी ऊपर गई है हम चाहते हैं। कि टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में भारत में कम से कम रेसलिंग में 2 से 3 मेडल जरूर आये।

राजनीति का खेल में कितना प्रभाव है। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी फेडरेशन में मैं 2012 से सीनियर कैंप में हूं मुझे ऐसा नहीं लगा कि राजनीति का कोई हस्तक्षेप है। देश में क्रिकेट को ज्यादा बढ़ावा मिलता था रेसलिंग को कोई पूछने वाला नहीं था। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले हमारे देश में क्रिकेट को भी आगे लेकर जाते थे। लेकिन अब मीडिया और अन्य माध्यमों से इस खेल को बढ़ावा मिल रहा है।

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