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योगेश्वर दत्त बोले- कुदुखोव के परिवार के पास ही रहने दें ओलंपिक मेडल

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amanBy aman

Published on 31 Aug 2016 1:33 PM GMT

योगेश्वर दत्त बोले- कुदुखोव के परिवार के पास ही रहने दें ओलंपिक मेडल
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नई दिल्ली: भारत के मशहूर रेसलर योगेश्वर दत्त ने बुधवार को एक ऐसा फैसला लिया जो उन्हें 'श्रेष्ठतम' की सूची में ला खड़ा करता है। हुआ कुछ यूं था कि दो दिन पहले योगेश्वर के उस ब्रॉन्ज मेडल को 'सिल्वर' में तब्दील कर दिया गया जो उन्होंने साल 2012 लंदन ओलंपिक में जीता था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सिल्वर विजेता रूसी पहलवान खिलाडी बेसिक कुदुखोव डोप टेस्ट में फेल हो गए। इस खबर की पुष्टि खुद योगेश्वर ने की थी।

लेकिन बुधवार को योगेश्वर दत्त ने एक बार फिर ट्विट कर मानवीय संवेदना का हवाला देते हुए बेसिक कुदुखोव का मेडल उनके परिवार के पास ही रहने देने का अनुरोध किया। ट्विटर पर दत्त ने लिखा 'मौत के बाद उनका डोप टेस्ट में फेल होना दुखद है, खिलाड़ी के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूं।'



इसके बाद उन्होंने दूसरा ट्वीट किया:-



ऐसे हुई थी बेसिक कुदुखोव की मौत

उल्लेखनीय है कि बेसिक कुदुखोव चार बार के वर्ल्ड चैंपियन और दो बार ओलंपिक मेडल विजेता रह चुके थे। कुदुखोव की लंदन में सिल्वर जीतने के एक साल बाद ही एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। साल 2000 के सिडनी ओलंपिक के दौरान और इसके बाद कई डोपिंग के मामले सामने आए थे। अब वाडा पिछले 10 सालों के दौरान मेडल विजेता खिलाड़ियों के सैंपल की दोबारा जांच करवा रहा है। इसके नतीजे के मुताबिक पदकों का फिर से निर्धारण किया जा रहा है। इसी के तहत कुदुखोव के सैंपल की भी जांच की गई। उसमें प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा पाई गई। इसके बाद ही उनसे 'सिल्वर' मेडल छीनकर उस मुकाबले के ब्रॉन्ज विजेता को देने का निर्णय लिया गया।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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