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लद्दाख सीमा विवाद में आखिरकार भारत चीन के बीच सुलह हो गयी है। शुक्रवार को राजनयिक स्तर की बातचीत के बाद चीन पूर्वी लद्दाख में पीछे हटने को तैयार हो गया है।

दोनों सेनाओं ने आपसी सहमति के साथ पीछे हटना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच मई महीने जारी तनाव के बाद अब ड्रैगन काबू में आता दिखाई दे रहा है। आज यानी सोमवार को चीनी सेना गलवान घाटी के पास हुई झड़प वाली जगह से एक किलोमीटर तक पीछे हटी है।

पीएम नरेंद्र मोदी  आज लेह में यात्रा करके सेनाओं का मनोबल ऊंचा करने गए, लेकिन राहुल गांधी हतोत्साहित करने का काम कर रहे है। यह बात आज बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा।

मंगलवार को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव पहले की ही तरह बरकरार है।

चीन को डर है कि अगर सेना की संख्या लोगों को पता चली तो देश में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह हो सकता है।

मंगलवार को पूर्वी लद्दाख पर भारत-चीन के बीच तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के मध्य वार्ता हुई है। बता दें, मंगलवार सुबह शुरू हुई ये वार्ता देर रात को समाप्त हुई थी।

चाणक्य ने कहा है कि दो पड़ोसी कभी मित्र नहीं हो सकते। पाकिस्तान और चीन जैसे धूर्त देशों को लेकर यह बात भले ही वर्षों से सही साबित हो रही हो लेकिन भारत और नेपाल...

हम यह क्यों नहीं समझ पा रहे हैं कि चीन हमारा कभी दोस्त नहीं हो सकता। लेकिन हमारी सरकारें हमेशा भ्रम पाले हुए हैं और दोस्ती के लिए लालायित रहती हैं।