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महिलाओं के हक के लिए लड़ी हैं कई लड़ाई, तब जाकर बनी हैं तृप्ति देसाई

suman

sumanBy suman

Published on 26 Aug 2016 8:14 AM GMT

महिलाओं के हक के लिए लड़ी हैं कई लड़ाई, तब जाकर बनी हैं तृप्ति देसाई
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मुंबई : भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई महिला अधिकारों के लिए समय–समय पर आवाज उठाती रही है। इसके लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए भी उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। जब-जब उन्होंने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की, उन्हें बाहर निकाल दिया गया। बाद में इसके खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में अर्जी दायर की, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की इजाजत मिली और महिलाओं को समानता के अधिकार के तहत मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिली।

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कौन हैं तृप्ति देसाई

पुणे की रहने वाली तृप्ति अन्ना के आंदोलन से भी जुड़ी थी। उनकी पढ़ाई मुंबई के एसएनडीटी से हुई। उन्होंने महिला अधिकारों के लिए समय-समय पर आवाज उठाया है। पिछले कुछ सालों से उनकी संस्था भूमाता ब्रिगेड महिलाओं के लिए काम कर रही है। इस संस्था से 5 हजार महिलाएं जुड़ी है। ये संस्था पुणे के अलावा अहमदनगर, नासिक और शोले में है।

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दिलवाया मुस्लिम महिलाओं को हक

तृप्ति ने शनि मंदिर से रोक हटाने के बाद मुंबई के हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटाने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया था। इसके लिए उन्हें कई संगठनों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। उनके इस कदम के विरोध में एमआईएम और दूसरे धार्मिक संगठन भी थे, कुछ महिलाओं ने उनके इस कदम का विरोध किया था। चेहरे पर कालिख पोतने की धमकी भी मिली थी, लेकिन तृप्ति ने फिर भी हार नहीं मानी। मुंबई हाईकोर्ट के फैसले से तृप्ति के हौसलों को और भी मजबूती मिली है।

*तृप्ति देसाई पुणे की रहने वाली हैं और पिछले कई सालों से वह महिलाओं के हितों के लिए काम कर रही हैं

*महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने ‘भूमाता ब्रिगेड’ नाम की संस्था 2010 में शुरू की थी।

* 19 दिंसबर को तृप्ति देसाई ने खुद शनि मंदिर में जाने की कोशिश, लेकिन उन्हें यहां विरोध का सामना करना पड़ा।

*26 जनवरी 2016 को तृप्ति देसाई की अगुवाई में करीब 500 महिलाओं ने शनि मंदिर की परंपरा तोड़ने के लिए आंदोलन शुरू किया।

*8 अप्रैल 2016 को शनि मंदिर ट्रस्ट ने तृप्ति देसाई को पूजा के लिए आमंत्रित किया।

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क्या है हाजी अली प्रतिबंध मामला

वैसे आपको बता दें कि 2011 से पहले हाजी अली दरगाह की मजार पर महिलाओं के प्रवेश पर रोक नहीं थी, लेकिन उसके बाद महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। तृप्ति से पहले भी कई महिलाओं ने इस फैसले का विरोध किया था, कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हर बार हार हुई। इस बार तृप्ति के पक्के मंसूबे ने हाजी अली दरगाह पर महिलाओं के प्रवेश पर रोक से पाबंदी हटाने के लिए मजबूर कर दिया।

गौरतलब है कि बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह का निर्माण 1631 में हुआ और ये आस्था के केंद्र के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। इस दरगाह पर सभी धर्मों के लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए बाबा से मन्नते मांगते हैं और सर झुकाते हैं।

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