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आदित्यनाथ को 'गढ़' में अपनों से ही मिल रही चुनौती, फूंके गए योगी के पुतले

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amanBy aman

Published on 26 Jan 2017 9:21 AM GMT

आदित्यनाथ को गढ़ में अपनों से ही मिल रही चुनौती, फूंके गए योगी के पुतले
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गोरखपुर: कभी अपने किले में अजेय माने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ अब अपने ही घर में घिरते नजर आ रहे हैं। इस समय था जब गोरखपुर से एक ही आवाज आती थी 'गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है'। लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही है।

गोरखपुर में बुधवार (26 जनवरी) को स्थानीय सांसद योगी आदित्यनाथ के पुतले फूंके गए। खास बात ये थी कि योगी के खिलाफ यह प्रदर्शन खुद उनकी ही पार्टी के लोगों ने किया।

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कल थे अपने, अब विरोधी

यूपी विधानसभा के मद्देनजर बीजेपी के टिकट बंटवारे में योगी आदित्यनाथ का खासा प्रभाव दिखा। लेकिन यही विवाद का कारण भी बना। पार्टी के कई कद्दावर नेता अब उनके खिलाफ भी हो गए। गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, सहजनवां और चौरी-चौरा से जिन नेताओं का टिकट कट गया उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। कई जगहों पर पार्टी विरोधी नारे लगाए। तो कहीं सांसद योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंका।

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नेताओं के समर्थकों ने योगी के फूंके पुतले

प्रदर्शन करने वालों में गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर रहे राम भुआल निषाद के समर्थक भी थे। इन्होंने योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंका और बीजेपी के सभी बड़े नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी कड़ी में पिपरईच से पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल की पत्नी अनीता जायसवाल भी हैं। बीजेपी ने अनीता को टिकट नहीं दिया है इस वजह से उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है।

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अश्वनी अब होंगे निर्दलीय प्रत्याशी

इसी तरह सहजनवा सीट से दावेदारी पेश कर रहे अश्वनी चौबे के समर्थक भी अपने नेता के समर्थन में सड़क पर उतर आए। बीजेपी से टिकट कटने के बाद चौबे ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है।

विरोधी कह रहे ये कमजोर प्रत्याशी

गौरतलब है कि इन तीनों ही सीटों पर योगी के ख़ास लोगों को टिकट दिया गया है। विरोधियों का कहना है कि ये तीनों कमजोर प्रत्याशी हैं, मगर आदित्यनाथ की जिद के चलते इन्हें टिकट मिला है।

सोशल साइट पर किया दर्द बयां

योगी के करीबी और हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह भी आहत दिखे। अपना टिकट कटने के बाद सुनील सिंह ने फेसबुक पर अपना दर्द बयां किया।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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