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अधिकांश सीटों पर करीबी होता है मुकाबला, 4 % मतदाता तय कर सकते हैं भाग्य

गोरखपुर की नौ विधानसभा सीटों में छह सीटें ऐसी हैं जहां लड़ाई कड़ी होती है और जीत हार का मार्जिन कम होता है। इस बार के चुनाव में काफी फेरबदल हुआ है।बसपा के विधायक भाजपा में हैं। बसपा ने सहजनवां व बांसगांव के विधायकों का टिकट काट दिया है।

zafar
Updated on: 22 Jan 2017 8:51 AM GMT
अधिकांश सीटों पर करीबी होता है मुकाबला, 4 % मतदाता तय कर सकते हैं भाग्य
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गोरखपुर: जिले की 9 विधानसभा सीटों में 6 सीटें ऐसी हैं जहां महज 4 से 9 फीसदी वोट हार जीत का फैसला करते हैं। ऐसा आंकड़े कहते हैं। पिछले चुनाव में बसपा ने गोरखपुर से सर्वाधिक 4 सीटें निकाली थीं। भाजपा ने 3, सपा और एनसीपी 1-1 सीट जीतने में कामयाब हुई थीं।

कड़ा होता है मुकाबला

-पिछले विस चुनाव में कैम्पियरगंज सीट पर एनसीपी के फतेह बहादुर सिंह ने सपा की चिंता यादव को 4.56 फीसद यानी 8958 वोटों से हराया था।

-सपा ने चिंता यादव पर दोबारा भरोसा जताया है।

-वहीं भाजपा से फतेह बहादुर टिकट की उम्मीद लगाये हुए हैं।

-बसपा ने आनंद निषाद का टिकट काट कर उनकी पत्नी अर्चना निषाद को प्रत्याशी बनाया है।

-पीस पार्टी गठबंधन ने मोहम्मद मोईनुद्दीन उर्फ चांद भाई को टिकट दिया।

कम होता है मार्जिन

-बात करें चिल्लूपार की, तो यहां से बसपा के राजेश त्रिपाठी ने सपा के सीपी चंद को 5.57 फीसदी यानी 11153 वोटों से पराजित किया था।

-इस बार वर्तमान विधायक ने दल बदल लिया है। अब उन्हें भाजपा से टिकट की आस है।

-सपा से राजेन्द्र सिंह पहलवान मैदान में हैं।

-बसपा ने विनय शंकर तिवारी को उतारा है।

-वहीं तीसरे स्थान पर रही हरिशंकर तिवारी की पार्टी ने बसपा का समर्थन करने का ऐलान किया है।

-पीस पार्टी गठबंधन ने योगेश मणि तिवारी को उतारा है।

बदली परिस्थितियां

-बांसगांव(सु) से पिछले चुनाव में बसपा के डा. विजय कुमार ने सपा की शारदा देवी को 5.54 फीसद यानी 8346 वोटों से मात दी थी।

-बसपा ने डा. विजय का टिकट काट कर धर्मेंद्र कुमार को प्रत्याशी बनाया है।

-विवाद के दौरान सपा के अखिलेश गुट ने शारदा देवी और शिवपाल गुट ने सुमन पासवान को मैदान में उतारा है।

-कांग्रेस और बसपा के पत्ते खुलने बाकी हैं।

-सहजनवां विधानसभा क्षेत्र से 2012 में बसपा के राजेन्द्र ने भाजपा के अश्वनी को 7.05 फीसद यानी 12691 वोटों से हराया था।

-बसपा ने राजेन्द्र का टिकट काट कर इस बार पनियरा के जीएम सिंह को टिकट दिया है।

-वहीं सपा ने यशपाल रावत को टिकट दिया है।

-कांग्रेस और भाजपा अभी खामोश हैं।

-पीस पार्टी गठबंधन ने एडवोकेट शिवाजी सिंह को टिकट दिया है।

दांव पर साख

-खजनी में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के संत प्रसाद ने बसपा के रामसमुझ को 5.72 फीसद यानी 9436 वोटों से हराया था।

-भाजपा ने संत प्रसाद पर दोबारा दांव लगाया है।

-बसपा ने इस बार प्रत्याशी बदल कर राजकुमार को टिकट दिया है।

-सपा ने रुपावती बेलदार को मैदान में उतारा है।

-गोरखपुर ग्रामीण की मुस्लिम-निषाद बाहुल्यसीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के विजय बहादुर यादव ने सपा के जफर अमीन डक्कू को 9.04 फीसद यानी 16985 वोटों से मात दी थी।

-इस बार विजय बहादुर यादव भाजपा को बॉय करके सपा से टिकट हासिल कर चुके हैं।

-बसपा ने राजेश पांडे को और पीस पार्टी गठबंधन ने डा. संजय निषाद को मैदान में उतारा है।

दलों का भरोसा

-पिछले चुनाव में चौरी चौरा से बसपा के जेपी निषाद ने सपा के अनूप कुमार पांडे को 12.14 फीसद यानी 20601 वोटों से हराया था।

-बसपा ने जेपी पर दोबारा भरोसा जताया है।

-वहीं सपा के पार्टी विवाद के दौरान अखिलेश गुट ने मनुरोजन यादव और शिवपाल गुट ने ने दुर्गेश यादव को उम्मीदवार बनाया था। नई परिस्थितियों में इनकी उम्मीदवारी तय होना बाकी है।

-पीस पार्टी गठबंधन ने देवेंद्र प्रताप सिंह को उतारा हैं।

-गोरखपुर शहर में भाजपा के डा. राधा मोहन दास ने सपा की राजकुमारी देवी को 28.76 फीसद यानी 47454 वोटों से हराया था।

-डा. राधा मोहन गोरखपुर और बस्ती मंडल में सर्वाधिक मार्जिन से वोट जीतने वाले प्रत्याशी बने थे।

-सपा ने राहुल गुप्ता को बसपा ने जनार्दन चौधरी को यहां से मैदान में उतारा है।

-भाजपा से डा. राधा मोहन को टिकट मिला है।

अभी और खुलने हैं पत्ते

-पिपराईच विधानसभा क्षेत्र से सपा की राजमति ने पिछले चुनाव में बसपा के जितेन्द्र को 17.82 फीसद यानी 35635 वोटों से हराया था।

-राजमति गोरखपुर और बस्ती मंडल में सर्वाधिक वोट प्राप्त करने वाली प्रत्याशी बनी थीं।

-सपा ने तीसरी बार उन पर भरोसा जताते हुए फिर मैदान में उतारा है.

-वहीं बसपा ने यहां से आफताब आलम को मौका दिया है।

-आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि गोरखपुर की नौ विधानसभा सीटों में छह सीटें ऐसी हैं जहां लड़ाई कड़ी होती है और जीत हार का मार्जिन कम होता है।

-इस बार के चुनाव में काफी फेरबदल हुआ है। भाजपा के ग्रामीण विधायक सपा में तो वहीं बसपा के चिल्लूपार से विधायक भाजपा में हैं।

-बसपा ने सहजनवां व बांसगांव के विधायकों का टिकट काट दिया है और पनियरा के विधायक को सहजनवां से चुनाव लड़ाया जा रहा है।

-एनसीपी के कैंपियरगंज के विधायक भाजपा खेमे में हैं। भाजपा के पत्ते खुलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जायेगी कि किस पार्टी में कितना दम है। और किसके बीच होगी सत्ता की असली जंग।

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