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शिवपाल के समर्थन में खड़े हुए मुलायम, बोले- अखिलेश ने बर्बाद कर दी पार्टी

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Updated on: 15 Aug 2016 7:50 AM GMT
शिवपाल के समर्थन में खड़े हुए मुलायम, बोले- अखिलेश ने बर्बाद कर दी पार्टी
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लखनऊ: यूपी इलेक्शन से ठीक पहले देश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे में दो फाड़ होती दिख रही है। एक तरफ खराब शासन का आरोप लगाकर शिवपाल यादव ने इस्तीफे की धमकी दी तो अब मुलायम सिंह भी उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं। सपा ऑफिस में ध्वजारोहण के बाद पार्टी सुप्रीमो ने बेटे और सीएम अखिलेश यादव की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन्होंने पार्टी बर्बाद कर दी है। इस दौरान अखिलेश चुप होकर नेताजी की बात सुनते रहे।

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मुलायम ने कहा कि इतनी मेहनत से राष्ट्रीय पार्टी बनाई, लेकिन भ्रष्ट लोगों की वजह से सबकुछ बेकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने बड़ी मुश्किल से शिवपाल को इस्तीफा देने से रोका। मुलायम ने कहा कि अखिलेश के तमाम मंत्री भ्रष्ट और नाकारे हैं। अगर मैं खड़ा हो गया तो सब भाग जाएंगे।

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शिवपाल के खिलाफ हो रही साजिश

उन्होंने शिवपाल यादव के बयान का समर्थन करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि शिवपाल हटे तो सरकार की ऐसी-तैसी हो जाएगी। जिम्मेदार लोग शिवपाल का अपमान कर रहे हैं। शिवपाल के खिलाफ साजिश हो रही है। शिवपाल ने पहले इस्तीफा दिया था उन्हें मैंने रोका।

मुलायम ने कहा कि काम नहीं करोगे तो जनता हटाना जानती है। मैं जल्द ही 18 मंडलों का दौरा करूंगा। मंत्री सुविधाखोर और गड़बड़ी कर रहे हैं। पार्टी के कई नेता प्रॉपर्टी का धंधा कर रहे हैं। कुछ नेता और कार्यकर्ता पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। शिवपाल नाराज हुए तो सरकार असहज हो जाएगी।

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शिवपाल ने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगाया था आरोप

बता दें कि मैनपुरी में शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाते हुए कहा था कि नेता, कार्यकर्ता और अफसर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

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कौमी एकता दल को लेकर हुआ था झगड़ा

बता दें कि मुलायम के परिवार में शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच कौमी एकता दल (क्यूएडी) के विलय के मसले को लेकर भी तकरार सामने आई थी। शिवपाल ने बिना अखिलेश से बात किए डॉन मुख्तार अंसारी की क्यूएडी का सपा में विलय कराना चाहा था। अखिलेश इसी के खिलाफ खड़े हो गए थे। तब शिवपाल ने कहा था कि उन्होंने विलय का फैसला मुलायम से बात करके किया। बाद में रामगोपाल यादव और मुलायम ने अखिलेश की बात रखते हुए विलय को संसदीय बोर्ड की बैठक में ठुकरा दिया। उस दौरान एक टीवी चैनल के प्रोग्राम में भी अखिलेश ने साफ तौर पर कह दिया था कि वह मुख्तार की पार्टी के सपा में विलय के सख्त खिलाफ हैं और ऐसा नहीं होने देंगे।

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पुरानी है रार

दरअसल मुलायम सिंह यादव को शिवपाल और अखिलेश के बीच की तल्खी का पहली बार सामना नहीं करना पड़ा है। जब मुलायम सिंह अखिलेश की ताजपोशी कर रहे थे तो भी शिवपाल यादव इसे बहुत मुफीद नहीं मान रहे थे उनका मानना का था सरकार की कमान जनता ने मुलायम को दी है और उन्हें ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए।

इसके अलावा सार्वजनिक कार्यक्रम में भी अखिलेश और शिवपाल एक दूसरे पर तंज के जरिए निशाना साध चुके हैं। एक नहीं कम से कम तीन बार। सबसे बुरी मोड तब आया जब बलराम यादव ने शिवपाल की सरपरस्ती में मुख्तार के भाई को सपा ज्वाइन करा दी और अखिलेश ने उनका मंत्री पद वापस ले लिया। मुलायम सिंह ने बीच बचाव किया और बीच का रास्ता निकाला था।

क्या कहा शिवपाल ने

मुलायम को यूं नेताजी नहीं कहा जाता वह अपने हर दांव के बारे में भी जानते हैं और शिवपाल उनकी सियासत के चरखा दांव हैं। ऐसे में शिवपाल का मैनपुरी में यह कहना कि कमीशनखोरी नहीं रुकी और अफसरों ने उनकी नहीं सुनी तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे मुलायम के अंदर तक हिला गया। यही वजह कि इस बयान के बाद पहली सार्वजनिक मीटिंग में मुलायम सख्त हो गए। मुलायम ने तो स्वतंत्रता दिवस पर अल्टीमेटम भी दे दिया है कि वो सितंबर से 18 जगहों पर रैली कर रहे हैं। बाहर निकलेंगे सारे कार्यकर्ताओं के बारे में पता करेंगे अगर किसी की रिपोर्ट खराब मिली तो वह उसे पार्टी से निकला देंगे।

क्यों चिंतित हैं मुलायम

मुलायम राजनीति के उन पहलवानों में से हैं जिन्हें पता है कि जनता एक भी मुद्दे पर किसी भी राजनैतिक दल को सियासी धोबी पछाड़ से चारो खाने चित कर सकती है। यही वजह है कार्यकर्ताओं की नकेल कसने में उनके नेताजी बिलकुल मुर्रवुअत नहीं बरत रहे। यही वजह कि शिवपाल के दिए गए बयान के बाद पहली सार्वजनिक मीटिंग में मुलायम सख्त हो गए।

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