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शासनादेश जारी करने की प्रकिया में खामी के आरोपों पर कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में राज्य सरकार से क्वालिफाइंग मार्क्स तय करने के संबध में 7 जनवरी 2019 के शासनादेश केा जारी करने की प्रकिया के बावत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मूल पत्रावली में पेज 42 व 43 के चिपकाये जाने पर गंभीर संदेह प्रकट किया है और इस बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है।

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RishiBy Rishi

Published on 18 Feb 2019 3:06 PM GMT

शासनादेश जारी करने की प्रकिया में खामी के आरोपों पर कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
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प्रतीकात्मक फोटो
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लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में राज्य सरकार से क्वालिफाइंग मार्क्स तय करने के संबध में 7 जनवरी 2019 के शासनादेश केा जारी करने की प्रकिया के बावत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मूल पत्रावली में पेज 42 व 43 के चिपकाये जाने पर गंभीर संदेह प्रकट किया है और इस बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है।

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कोर्ट ने कहा कि यदि अगली तारीख पर इसका संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता तो इसकी फोरंसिंक जांच करायी जा सकती है। मामले की अगली सुनवायी 20 फरवरी को होगी।

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यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चैहान की बेंच ने मो0 रिजवान व अन्य की ओर से दायर रिट याचिकाअेां पर पारित किया। इन याचिकाअेां पर पिछले कई दिनेां से सुनवायी चल रही है। कोर्ट के आदेश से 6 जनवरी 2019 केा करायी गयी लिखित परीक्षा का परिणाम लटका पड़ा है।

दरअसल सुनवायी के दौरान कहा गया कि 7 जनवरी 2019 के जिस शासनादेश से 60 व 65 प्रतिशत क्वालिफाइंग माक्र्स नियत किया गया है उसके पारित करने में नियमों की अनदेखी की गयी है लिहाजा उक्त शासनादेश ही गलत है।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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