अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला, धर्म को लेकर कही ये बड़ी बात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जाति के आधार पर जनगणना की मांग दोहराते हुए भारतीय जनता पार्टी पर भारत की आबादी के 65 प्रतिशत युवाओं के..

Published by Deepak Raj Published: January 17, 2020 | 8:15 pm
Modified: January 17, 2020 | 8:17 pm

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जाति के आधार पर जनगणना की मांग दोहराते हुए भारतीय जनता पार्टी पर भारत की आबादी के 65 प्रतिशत युवाओं के भविष्य की जरा भी चिंता नहीं करने का आरोप लगाया है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि जैसा कि भाजपा का चरित्र है वह नौजवानों का ध्यान शिक्षा संस्थानों में बढ़ती फीस और अव्यवस्था, बेरोजगारी, मंहगाई और दूसरे बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए युवा महोत्सव के नाम पर खेल तमाशे आयोजित कर लेती है।

पांच दिवसीय युवा महोत्सव पर अखिलेश ने  प्रतिक्रिया दी


सपा मुखिया ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित हुए पांच दिवसीय युवा महोत्सव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द, जिनकी जयंती पर यह उत्सव मनाया जाता है, नौजवानों को धर्मान्धता, जातीयता और साम्प्रदायिकता की खिलाफत का संकल्प दिलाते थे।

ये भी पढ़ें-भाजपा का आरोप, सिख विरोधी दंगों में संलिप्त लोगों को कांग्रेस ने बचाया

वे अज्ञान और भूख को दूर करने के साथ ही इस बात पर बल देते थे कि अंधविश्वास मनुष्य का शत्रु है, पर धर्मान्धता उससे भी बढ़कर है। हमें संकीर्ण सीमा के बाहर जाना होगा अन्यथा हमें पतन की दशा में सड़कर मरना होगा। इसके सिवा दूसरा रास्ता नही। वे मानते थे देश की अवनति और पतन का मुख्य कारण जातिप्रथा है।

बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा आंकी गई है

आज आजादी के बाद देश में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा आंकी गई है। सरकार की नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद उद्योगधंधे बंद हो गए हैं और तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की छंटनी होने लगी है।

ये भी पढ़ें-पाकिस्तान ने भारत पर निकाली भड़ास, पीएम इमरान ने फिर बढ़ाया तनाव
अखिलेश ने कहा कि भाजपा नेतृत्व जातीयता, धर्मान्धता और साम्प्रदायिकता के ही सहारे अपनी राजनीति करती है। उसकी नीति नफरत और समाज को बांटने की है। अभी सीएए, के माध्यम से उसने साम्प्रदायिक ताकतों को उभरने का मौका दिया है जिसका देश भर में विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी मानती है कि अंधेरे को अंधेरा खत्म नहीं कर सकता है।

पार्टी की मांग है कि जाति की भी गणना हो


इसीलिए पार्टी की मांग है कि जाति की भी गणना हो। जाति के आंकड़े आ जाएंगे तो धर्म की लड़ाई खत्म हो जाएगी और विकास का रास्ता खुल सकेगा। आज भारत के पिछड़ेपन के बीच जाति का ही रोड़ा है। समाजवादी पार्टी के प्रेरणापुरूष डा. राममनोहर लोहिया और पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह का भी यही मत था कि जातिप्रथा से गुलामी पैदा हुई।

ये भी पढ़ें-दिल्ली विधानसभा चुनाव: भाजपा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान
इसने समाज को बांटकर देश की प्रगति में अवरोध पैदा कर दिया है। सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा ने नौजवानों से नौकरियां देने, कौशल प्रशिक्षण और शैक्षणिक सुधार का वादा किया था, ये वादे सिर्फ वादे ही बने रहे। विकास में उनकी भागीदारी का कोई प्रबंधन सामने नहीं आया है।

भाजपा की डबल इंजन सरकारें कहने और दिखावे के लिए हैं

स्वामी विवेकानन्द युवा इंटरनेट योजना के नाम पर युवाओं के कालेज में दाखिला लेने पर प्रतिमाह एक जीबी इंटरनेट मुफ्त देने का वादा था, उसे भाजपा कैसे भूल गई? स्वामी विवेकानन्द पर यह धोखाधड़ी नहीं तो क्या है? भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में उत्तर प्रदेश में स्थापित हर उद्योग में 90 नौकरियां युवाओं के लिए आरक्षित किए जाने का वादा किया था।

उसका क्या हुआ? भाजपा की डबल इंजन सरकारें कहने और दिखावे के लिए हैं। युवाओं को ठगने के अलावा उसने और क्या किया है?