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हाईकोर्ट ने तलब की UP के कैदियों की प्री मेच्योर रिहाई की सरकारी नीति

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Published on 6 July 2016 3:37 PM GMT

हाईकोर्ट ने तलब की UP के कैदियों की प्री मेच्योर रिहाई की सरकारी नीति
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इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश के जेलों में सजा काट रहे बूढ़े कैदियों की समयपूर्व रिहाई की नीति कोर्ट में पेश न कर सकने पर इसे हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। दो जजों की बेंच ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह अगले बुधवार (13 जुलाई) को हर हाल में कोर्ट को बताएं कि प्रदेश की जेलों में बंद बूढ़े कैदियों की समय पूर्व रिहाई की कोई सरकारी नीति है अथवा नहीं।

जनहित याचिका में दिया आदेश

कोर्ट ने इसी के साथ केंद्रीय कारागार नैनी में हत्या के मामले में सजा काट रहे बांदा के एक बू़ढ़े कैदी रामेश्वर की रिहाई को लेकर जेलों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह इसकी रिहाई को लेकर लिए गए निर्णय से अवगत कराएं। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी के शुक्ला और न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी ने लवकुश की जनहित याचिका पर दिया है।

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क्या कहा गया है याचिका में?

-याचिका में कहा गया है कि देश के तीन राज्यों में ‘प्री मेच्योर रिहाई’ की सरकारी नीति है।

-लेकिन यूपी में अभी तक ऐसी किसी नीति का खुलासा नहीं किया गया है।

-जनहित याचिका में कहा गया है कि यूपी में कैदियों को जेलों में रखने की व्यवस्था नहीं है।

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सरकारी नीति न बता सकने के कारण नाराज थी कोर्ट

-सजायाफ्ता बूढ़े कैदी जिनका जेल मैनुअल के रिकार्ड के मुताबिक आचरण ठीक है, उन्हें सरकारी नीति बनाकर रिहा किया जाना चाहिए।

-यही कारण था कि कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को ‘प्री मेच्योर रिहाई’ के संबंध में सरकारी नीति स्पष्ट करने को कहा था।

-लेकिन सरकारी नीति न बता सकने के कारण कोर्ट नाराज थी।

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