सरकार को हाईकोर्ट से झटके, तीन अधिसूचनाओं पर रोक, मंडी परिषद आदेश रद

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट  से सरकार को आज दो बड़े झटके लगे। पहले मामले में 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के योगी एवं पूर्ववर्ती सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी गई तो दूसरे फैसले में मंडी परिषद कर्मियो को बड़ी राहत देते हुए एनपीएस थोपने का सरकारी आदेश रद कर दिया गया।

पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति घोषित करने की राज्य सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट  से सरकार को आज दो बड़े झटके लगे। पहले मामले में 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के योगी एवं पूर्ववर्ती सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी गई तो दूसरे फैसले में मंडी परिषद कर्मियो को बड़ी राहत देते हुए एनपीएस थोपने का सरकारी आदेश रद कर दिया गया।

राज्य सरकार से 3 हफ्ते में जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के योगी एवं पूर्ववर्ती सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से 3 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार कानून बनाकर किसी जाति को अनुसूचित जाति राष्ट्रपति की अधिसूचना से घोषित कर सकती है। राज्य सरकार को ऐसा अधिकार नहीं है। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खण्डपीठ ने गोरखनाथ की याचिका पर दिया है।

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बोर्ड को पेंशन ग्रेच्युटी स्कीम लागू करने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कृषि उत्पादन मंडी समितियों के कर्मचारियों के पक्ष में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय पेंशन स्कीम थोपने के आदेश को रद्द कर दिया है और उ.प्र. राज्य कृषि उत्पाद बाजार बोर्ड को रेग्युलेशन 2013 के तहत 8 हफ्ते में सीपीएफ स्कीम के तहत पेंशन ग्रेच्युटी लागू करने का निर्देश दिया है।

सरकार बोर्ड व समितियों की सेवा शर्ते तय नहीं कर सकती

कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार बोर्ड व समितियों की सेवा शर्ते तय नहीं कर सकती। ऐसा अधिकार केवल बोर्ड को ही है। राज्य सरकार की नेशनल पेंशन स्कीम थोपने की वैधता की चुनौती याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने देवेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव व 9 अन्य की याचिका पर दिया है।

क्या था पूरा मामला

मालूम हो कि राज्य कृषि उत्पाद बाजार बोर्ड ने 23 अप्रैल 99 को राज्य सरकार को सीपीएफ स्कीम लागू करने का प्रस्ताव भेजा जिसके तहत 1 जनवरी 99 से मंडी परिषद के कर्मचारियों को पेंशन ग्रेच्युटी देने का फैसला लिया गया। कर्मचारियों का अंशदान 8.33 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी करते हुए राज्य सरकार ने प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया। किन्तु इसे एक अप्रैल 05 तक लटकाए रखा और बोर्ड को एनपीएस लागू करने को कहा। कर्मचारियों ने सरकार की स्कीम मानने से इंकार कर दिया और 2013 में रेग्युलेशन बनाकर बोर्ड ने पेंशन ग्रेच्युटी स्कीम लागू करने की सिफारिश की। न मानने पर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई और कोर्ट ने राज्य सरकार को विचार करने का आदेश दिया। जिसे सरकार ने नहीं माना।

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सरकार ने शक्ति से परे कार्य किया

कोर्ट ने कहा कि बोर्ड की मांग न मानना सरकारी नीति का विषय नहीं है। सरकार ने रेग्युलेशन अस्वीकार कर शक्ति से परे कार्य किया है। बोर्ड पर सरकार अपनी सेवा शर्ते थोप नहीं सकती। सरकार ने स्वयं के 28 मार्च 05 के शासनादेश की अवहेलना की है। कोर्ट ने कहा कि सरकार रेग्युलेशन में किसी प्रकार की अवैधानिकता नहीं बता सकी। कोर्ट ने एनपीएस लागू करने के सरकारी आदेशों को रद कर बोर्ड को रेग्युलेशन के तहत पेंशन ग्रेच्युटी स्कीम लागू करने के लिए अधिकृत कर दिया है।

भुगतान नहीं करने पर रजिस्ट्रार और चुनाव अधिकारी तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के काम का भुगतान नहीं करने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और चुनाव अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है। मामला 2013-14 के छात्रसंघ चुनाव का है। इसे लेकर मेसर्स स्माइल स्टूडियो ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी.के.नारायण और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ सुनवाई कर रही है।

भुगतान का दावा

याची का कहना है कि उसने छात्रसंघ चुनाव 2013-14 में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का ठेका विश्वविद्यालय से हासिल किया था। काम पूरा हो जाने के बावजूद उसे आज तक एक भी रूपये का भुगतान नहीं किया गया। जबकि चुनाव अधिकारी प्रो.रामकृपाल का कहना था कि उन्होंने याची को एक लाख 60 हजार रूपये का नगद भुगतान 28 नवम्बर 2014 को किया था। इसकी प्राप्ति रसीद भी है।

दो अलग अलग तारीखों पर तलब

बाद में चुनाव अधिकारी ने अपना बयान संशोधित करते हुए बताया कि उन्होंने रकम का भुगतान 25 नवम्बर 2013 को याची के भुगतान के आवेदन पर किया था। आवेदन पर उन्होंने इसकी टिप्पणी भी लिखी है। कोर्ट ने चुनाव अधिकारी द्वारा भुगतान की दो अलग अलग तारीखें बताने पर कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस मामले में हेरफेर की गुंजाइश दिखायी दे रही है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को भुगतान और ठेके से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ 26 सितम्बर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।