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इलाहाबादी अमरुद: इस माटी की उपज जैसा स्वाद कहीं नहीं

संगम नगरी इलाहबाद की अगर धार्मिक पहचान यहाँ का संगम है तो आर्थिक पहचान है यहाँ का वह इलाहाबादी वो अमरुद जो अपनी मिठास और गुणवता की वजह से देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है।कई बरसों के बाद इस बार तापमान का पारा बहुत नीचे चले जाने से यहाँ के अमरुद के बागान भी फलों से लद गए है।

Anoop Ojha

Anoop OjhaBy Anoop Ojha

Published on 19 Feb 2019 10:33 AM GMT

इलाहाबादी अमरुद: इस माटी की उपज जैसा स्वाद कहीं नहीं
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संगम नगरी इलाहबाद की अगर धार्मिक पहचान यहाँ का संगम है तो आर्थिक पहचान है यहाँ का वह इलाहाबादी वो अमरुद जो अपनी मिठास और गुणवता की वजह से देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है।कई बरसों के बाद इस बार तापमान का पारा बहुत नीचे चले जाने से यहाँ के अमरुद के बागान भी फलों से लद गए है।

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वैसे तो फलों की कई वैराइटी है, लेकिन जिक्र जब अमरूद का हो और वह भी इलाहाबादी अमरुद का तो दिमाग में अलग ही छवि जनरेट हो जाती है। कारण है बिल्कुल सेब जैसा स्वाद और तमाम बीमारियों से निजात। इसे विस्तार देने के लिए तमाम दूसरे शहरों में नर्सरियां लगीं लेकिन इलाहाबादी माटी की उपज जैसा स्वाद कहीं नहीं मिला।इलाहाबाद की जलवायु में अमरूद इतना घुल मिल गया है कि इसकी खेती यहाँ अत्यंत सफलतापूर्वक की जाती है।

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इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं

जाड़े की ऋतु में यह इतना अधिक तथा सस्ता प्राप्त हो जाता है कि लोग इसे निर्धन जनता का एक प्रमुख फल भी कहते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है। इसमें विटामिन "सी' अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन "ए' तथा "बी' भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं।

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हर प्रकार की मिट्टी में उपजाया जा सकता है

इलाहाबाद अमरूद की जेली तथा बर्फी भी बनाई जाती है। इसे डिब्बों में बंद करके सुरक्षित भी रखा जा सकता है।इलाहाबादी अमरूद के लिए गर्म तथा शुष्क जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त है। यह गरमी तथा पाला दोनों सहन कर सकता है। यह हर प्रकार की मिट्टी में उपजाया जा सकता है।

कई प्रमुख प्रजातिया हैं यहां

इलाहाबाद में अमरूद की प्रसिद्ध किस्में हैं ,इनमें इलाहाबादी सफेदा अमरूद के अलावा लाल गूदेवाला, चित्तीदार, करेला, बेदाना तथा अमरूद सेबसेबिया, सुरखा, श्वेता, पंत प्रभात, एल 39, संगम व ललित इसकी प्रमुख प्रजातिया है। इलाहाबाद और कौशांबी मेंजहा सुरखा, सेबिया और सफेदा अमरुद की उपज होती है वहीं इलाहाबादी सुरूखा और सफेदा की डिमांड पूरी दुनिया में है।दुकानदार बबलू सोनकर ने बताया की यहाँ के अमरुद वॉलीवुड के अभिनेता अमिताभ बच्चन ,सलमान खान और शारुख़ खान को बहुत पसन्द है जिन्हें मै यहाँ से सप्लाई करता हूँ।

अमरूद की सबसे अधिक डिमांड गल्फ कंट्री में है। इनमें सउदी अरब, कुवैत, दुबई, यूएई, कतर, बहरीन, यमन, ओमान, जार्डन आदि शामिल हैं। पीक सीजन में इलाहाबाद से बड़ी मात्रा में अमरूद वहां भेजे जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक आदि प्रदेशों में इलाहाबादी अमरूद की नर्सरी लगाई गई, लेकिन उन्हें वह मजा नहीं मिला, जो इलाहाबाद में पैदा होने वाले अमरूद में है।इलाहाबादी सेबिया अमरूद का कोई जोड़ नहीं है। सेब की शक्ल में छोटे और बेहद खूबसूरत दिखने वाले इन अमरूदों ने सबको क्रेजी बना रखा है। बहुत से लोग तो सेबिया को ही सेब समझ लेते हैं। खास बात यह है कि सेबिया नस्ल का अमरूद किसी दूसरे शहर में पैदा नहीं होता।इलाहाबादी अमरूद को अपनी इन खूबियों के चलते आयुर्वेद में खास स्‍थान दिया गया है।

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यही नहीं इसकी खुशबू और स्‍वाद दोनों लाजवाब हैं अमरूद डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है।यह शुगर लेवल को कंट्रोल करता है और लो ग्लिसमिक इंडेक्‍स शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकता है। डायबिटीज के रोगियों को रोज अमरूद खाने की सलाह दी जाती है। यही नहीं अमरूद की पत्तियों की चाय पीने से से डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है। अमरूद में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। अमरूद में मौजूद फाइबर कॉलेस्‍ट्रोल लेवल को कम करने में बहुत मददगार र्हैं। यही नहीं अंगूर, संतरे और सेब की तुलना में इसमें शुगर की मात्रा बहुत कम होती है। यही वजह है कि आप बेहिचक इसे खा सकते हैं।

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इलाहाबाद के बकराबाद गांव में करीब दो सौ बीघा भूमि पर अमरुद की खेती होती है यहाँ के आनब राहत, पनालाल यादव,देवेन्दर कुमार और व्यापारी उवैश अहमद विस्तार से उपज के बारे में बतातें है। उनका कहाना है कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है किसानों का कहना है की खराब सड़क की वजह से व्यापारी किसानों के पास नहीं आते किसानों को खुद अमरुदों को टोकरी में भर कर मंडी ले जाना पड़ता वही मंडी में व्यापारी सस्ते दामों पर इसे लेकर अमरूदों को बाजारों में तीन गुना दामों पर बेचतें है। बताते चले की पिछले दस सालों से सड़क की दूदर्शा झलने वाले। बकराबाद गांव को उत्तर प्रदेश के स्वास्थ मंत्री सिदार्थ नाथ सिंह ने गोद लिया है प्रदेश के मुख्यमंत्री का गड्ढा मुक्त सड़कों का अभियान कितना साथक है इसका अंदाजा बक़राबद गांव की सड़कों को देख कर आसानी से लगाया जा सकता है ।

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सतीश चंद कुशवाहा (मुण्डेरा फल और सब्जी मंडी अध्यक्ष) ने बताया की अमरुद की फसल अच्छी हुई है पर खराब सड़कों की वजह से किसानों को अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा। खराब सड़को की वजह से जो किसान मंडी में अमरुद लेकर आता है उसमें आधे अमरूदों में दाग लग जाने से किसानों को कम दाम मिलते है बड़े व्यापारी कम दामों में खरीद कर दूसरे शहरों में अधिक दाम में बेचते हैं।

Anoop Ojha

Anoop Ojha

Excellent communication and writing skills on various topics. Presently working as Sub-editor at newstrack.com. Ability to work in team and as well as individual.

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