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Lucknow News: आलोक रंजन की 'मेकिंग अ डिफरेन्स-आईएएस ऐज अ करियर' IAS के लिए प्रेरणा स्रोत, प्रतिभागियों के लिए उपयोगी

Lucknow News: पुस्तक में पूर्व मुख्य सचिव एवं लेखक आलोक रंजन ने आईएएस में आने के उद्देश्य के बारे में अपने विचार रखते हुए आईएएस जैसी कठिन परीक्षा ( IAS exam Ke Liye Tips) के लिए गुरूमंत्र भी दिया है।

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Newstrack NetworkPublished By Shashi kant gautam
Updated on: 2021-11-21T20:36:08+05:30
Lucknow News: Alok Ranjans Making a Difference- IAS as a Career is a source of inspiration for IAS, useful for the participants
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लखनऊ: पूर्व मुख्य सचिव एवं लेखक आलोक रंजन की किताब का अनावरण 

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्य सचिव एवं लेखक आलोक रंजन (Former Chief Secretary and author Alok Ranjan) ने कहा कि एक कुशल प्रशासक को आम जनता के लिए सदैव उपलब्ध रहकर उनकी समस्याओं का निराकरण एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी यह किताब आईएएस सेवा (IAS services) के अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उन विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी, जो आईएएस सेवा को अपना करियर बनाने हेतु प्रयासरत हैं।

पुस्तक में आलोक रंजन द्वारा आईएएस में आने के उद्देश्य के बारे में अपने विचार रखते हुए आईएएस जैसी कठिन परीक्षा ( IAS exam Ke Liye Tips) के लिए गुरूमंत्र भी दिया है जो कि विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार व भारत सरकार सभी स्तर पर एक आईएएस अधिकारी (IAS officer) को कैसे चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और वह किसी प्रकार समाज में अपना योगदान दे सकते हैं। यह किताब मशहूर प्रकाशन पेन्गुइन द्वारा प्रकाशित की गयी है।


"मेकिंग अ डिफरेन्स-आईएएस ऐस अ करियर" का लोकार्पण

रविवार को जयपुरिया इन्टीटयूट ऑफ मैनेजमेन्ट (Jaipuria Institute of Management) में आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव, उप्र शासन की पुस्तक "मेकिंग अ डिफरेन्स-आईएएस ऐज अ करियर" का लोकार्पण किया गया। पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कार्यक्रम का संचालन जयन्त कृष्णा पूर्व अधिशासी निदेशक टीसीएस और पूर्व प्रबन्ध निदेशक राष्ट्रीय स्किल डेवलेपमेंट कार्पोरेशन द्वारा किया गया।

जयन्त कृष्णा द्वारा आलोक रंजन ( Alok Ranjan) के साथ अपने सकारात्मक अनुभवों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आलोक रंजन ने अपने सेवाकाल में एक जनसेवक के रूप में कार्य किया और देश व प्रदेश के विकास में महती भूमिका निभायी। उन्होने कहा कि रंजन वास्तविक रूप में एक लोकप्रिय जनसेवक रहे।


लम्बे सेवाकाल के प्रशासनिक अनुभवों का निचोड़ है-"मेकिंग अ डिफरेन्स-आईएएस ऐज अ करियर"

पुस्तक के विषय में आलोक रंजन ने बताया कि यह किताब उनकी आत्मकथा नहीं है, परन्तु उनके 38 साल के लम्बे सेवाकाल के प्रशासनिक अनुभवों का निचोड़ है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर कुशल नेतृत्व और सुप्रशासन के मंत्र पाठक के सामने रखे हैं।

उनका कहना है कि आईएएस सेवा का सच्चा उद्देश्य समाज में बदलाव लाना है और एक आईएएस अधिकारी को निरन्तर यह प्रयास करना चाहिए कि किस प्रकार से समाज के शोषित, गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र लाभार्थियों को पारदर्शिता के साथ अधिक से अधिक लाभ दिलाकर गरीबी स्तर को उपर लाने का प्रयास प्रत्येक नौकरशाह को करना चाहिए।


नौकरशाह (bureaucrat) के सामने काफी चुनौतियां होती हैं

उन्होंने कहा कि नौकरशाह (bureaucrat) के सामने अपने शासकीय दायित्वों को पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ निर्वहन करने में काफी चुनौतियों का सामना अवश्य करना पड़ता है। परन्तु किसी भी नौकरशाह को अपने शासकीय सेवाकाल में अपने दायित्वों के निर्वहन में कभी भी घबराकर कोई भी अनुचित शासकीय कार्य नहीं करना चाहिए।

रंजन ने अपने पुस्तक में कहा कि आईएएस सेवा में अधिकारी को केवल अच्छी तैनाती के पीछे नहीं भागना चाहिए क्योंकि आईएएस सेवा का प्रत्येक पद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें यदि लगन, निष्ठा और ईमान्दारी से कार्य किया जाय तो समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के जीवन स्तर को उठाया जा सकता है।


पुस्तक के विषय में बताते हुए रंजन ने अपने सेवाकाल में कराये गये कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि मैने अपने सेवा काल में कई कार्य कराये जैसे मेट्रो रेल का आरम्भ, इकाना स्टेडियम की स्थापना, एम्बुलेन्स सेवा, डॉयल-100 की सेवा, प्रदेश में मेडिकल कालेजों का निर्माण आदि के साथ-साथ 308 किलोमीटर लम्बे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का निर्माण मात्र 23-24 माह में करा देना मुझे सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण और सन्तोषप्रद प्रतीत हुआ।


आईएएस सेवा के अधिकारियों को अपनी छाप छोड़नी चाहिए- आलोक रंजन

उन्होंने अपनी पुस्तक में कहा है कि आईएएस सेवा के अधिकारियों को अपनी ईमानदारी, कार्यकुशलता और जनसमर्पण की भावना से जनमानस में अपनी छाप छोड़नी चाहिए। अपनी सेवा में यह पूरा प्रयास करना चाहिए कि नौकरशाह आम जनता के लिए सुलभ रूप से उपलब्ध रहें और उनकी समस्याओं का निराकरण स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित कराने के प्रयास करें। प्रत्येक नौकरशाह को अपने सेवा काल में यह प्रयास करना चाहिए कि समाज के हर गरीब वर्ग के व्यक्ति को जीवनयापन हेतु बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराये।


लोकार्पण कार्यक्रम में अध्यक्ष, राज्य लोक सेवा अधिकरण सुधीर सक्सेना, उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव नवीन चन्द्र वाजपेयी एवं अतुल गुप्ता के द्वारा भी आईएएस सेवा एवं रंजन की कार्यशैली के बारे में अपने विचार व्यक्त किये। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरविन्द मोहन और कैरियर काउन्सलर सुरभि सहाय ने भी नौकरशाह की जनसेवक की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में भूतपूर्व एवं वर्तमान आईएएस अधिकारी, लेखक, पत्रकार एवं समस्त बुद्धजीवी वर्ग ने प्रतिभाग किया एवं पुस्तक के विषय में अपने विचार व्यक्त किये।

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Shashi kant gautam

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