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सुखदेव राजभर का जानाः बसपा नेतृत्व को रणनीति के मुद्दे पर पार्टी के भीतर से बड़ी चुनौती

UP Politics :अखिलेश यादव पर भरोसा जताते हुए अपने बेटे को सपा ज्वाइन कराना बसपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

Ramkrishna Vajpei

Ramkrishna VajpeiWritten By Ramkrishna VajpeiShraddhaPublished By Shraddha

Published on 1 Aug 2021 7:14 AM GMT

बसपा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर
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बसपा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर (फाइल फोटो - सोशल मीडिया)

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UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के वरिष्ठतम नेताओं में से एक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर (Former Assembly Speaker Sukhdev Rajbhar) का पार्टी नीतियों से असंतोष जाहिर करते हुए सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना और दलितों और पिछड़ों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर भरोसा जताते हुए अपने बेटे को सपा ज्वाइन कराना बहुजन समाज पार्टी के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर उन्होंने बीमारी के चलते सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की बात कही है। लेकिन अपनी पार्टी के प्रति उनके आक्रोश से यह स्पष्ट होता है कि असली वजह कुछ और ही है। इसके बाद एक बात तो तय मानी जा रही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में उनके पुत्र कमलाकांत राजभर अपने पिता की सीट से चुनाव लड़ेंगे।

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव (फाइल फोटो - सोशल मीडिया)


सुखदेव राजभर मायावती के खास सिपहसालारों में गिने जाते थे। बहुजन समाज पार्टी की आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सोशल इंजीनियरिंग के तहत ब्राह्मण दलित वोट पाने की रणनीति को खारिज करने वाले संभवतः वह पहले नेता हो गए हैं। यह एक संकेत हैं कि पार्टी द्वारा अपनी नई रणनीति के तहत बहुत तेजी से कराए जा रहे बुद्धिजीवी सम्मेलनों से पार्टी के पुराने वफादार नाराज होने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी को यह दांव उलटा भी पड़ सकता है और उसकी स्थिति माया मिली न राम अर्थात सत्ता भी न मिले और अपना विश्वस्त वोट बैंक भी खिसक जाए वाली हो सकती है। सुखदेव राजभर ने अपनी चिट्ठी में नेतृत्व पर दलितों और पिछड़ों की अनदेखी करने का स्पष्ट आरोप लगाया है। वरिष्ठ बसपा नेता अपनी सीट से पिछले तीन दशक से जीतते आ रहे हैं इस लिहाज से उनका जाना बसपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

अपने पत्र में बसपा नेता ने लिखा है कि स्वार्थी तत्वों द्वारा बहुजन मूवमेंट को दिशाहीन किए जाने से वह बहुत आहत हैं। बसपा से राजभर समाज के मिशनरी लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

नाराज सुखदेव इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का भविष्य बताते हुए दलितों, पिछड़ों व राजभर समाज की सेवा के लिए खुद के बेटे कमलाकांत को उनके हवाले करने की घोषणा भी कर दी है। संभावना है कि कमलाकांत जल्द ही समाजवादी पार्टी में विधिवत शामिल हो जाएंगे।

Shraddha

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