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अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी का बीमारी से निधन

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RishiBy Rishi

Published on 20 July 2016 12:59 AM GMT

अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी का बीमारी से निधन
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फैजाबादः अयोध्या के विवादित स्थल मामले में मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी का बुधवार तड़के साढ़े 5 बजे निधन हो गया। हाशिम की उम्र करीब 95 साल थी। वह काफी वक्त से बीमार थे। उन्हें पेसमेकर भी लगाया गया था।

हाशिम अंसारी का विवादित स्थल मामले के हिंदू पक्षकारों से अच्छा रिश्ता भी था। महंत ज्ञानदास वगैरा से भी वह गले मिलते रहते थे। हाशिम का कहना था कि अयोध्या के विवादित स्थल का मसला अलग है और अपने दोस्तों से रिश्ता अलग। हाशिम ये भी कहते थे कि चाहे सुप्रीम कोर्ट का कुछ भी फैसला आए, अयोध्या के हिंदू-मुस्लिमों और हिंदू धर्मगुरुओं से उनके रिश्ते कभी खराब नहीं होंगे। हाशिम इस मामले के सबसे पुराने पक्षकार थे और निचली अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में अयोध्या के विवादित स्थल के मामले में उनकी ओर से हलफनामे दाखिल किए गए थे।

यह भी पढ़ें... बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी की तबियत बिगड़ी, KGMU में भर्ती

मौत से सुनवाई पर असर

हाशिम अंसारी की मौत से अयोध्या केस की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर असर पड़ सकता हैं रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में जितनी जानकारी अंसारी को थी उतनी शायद ही किसी पैरोकार को होगी। उनकी मौत से इस केस पर जिसने देश की राजनीति ही नहीं दिशा भी बदली थी और भी देरी होने की संभावना है। जानकारों की माने तो अंसारी अगर जीवित रहते तो इस केस में आउट ऑफ़ कोर्ट सेटलमेंट की भी संभावना थी। वो हमेशा से इसके पक्षधर थे और उसके लिए उन्होंने हमेशा बातचीत के जरिये कुछ रास्ता खोलने की कोशिश की।

निकालना चाहते थे विवाद का हल

अयोध्या केस के विवाद के हल के लिए हाशिम अंसारी हमेशा हिन्दू साधू और संतो से बातचीत करते रहते थे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लीगल एडवाइजर जफरयाब जिलानी ने कहा कि अंसारी की मौत के बाद उनके बेटे को मुक़दमे में परोकर बनाया जा सकता हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अंसारी की मौत से मुस्लिमो का पक्ष इस अयोध्या केस में कमजोर होगा

कौन थे हाशि‍म अंसारी?

-राम जन्‍मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य पैरोकार थे और रामलला को आजाद देखना चाहते थे।

-उन्‍होंने कहा था कि एक तरफ वह मुकदमा लड़ रहे हैं और दूसरे लोग इसका सियासी फायदा उठा रहे हैं।

-95 साल के हाशिम अंसारी 1949 से ही बाबरी केस की पैरवी कर रहे थे।

-हाशिम अंसारी का जन्म 1921 में हुआ था। 1932 में इनके पिता की मृत्यु हो गई, उस समय इनकी उम्र 11 साल थी।

-हाशिम के परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। 6 दिसंबर 1992 के बलवे में बाहर से आए दंगाइयों ने उनका घर जला दिया था।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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