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अब आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं 

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 17 Aug 2018 11:04 AM GMT

अब आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं 
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आशुतोष सिंह

वाराणसी: आईएमएस बीएचयू की गिनती देश के बेहतरीन अस्पतालो में होती है। अस्पताल को पूर्वांचल सहित उत्तर भारत की लाइफ लाइन कहा जाता है। 20 करोड़ की आबादी के इलाज का जिम्मा अस्पताल के कंधों पर है, लेकिन सुविधा के लिहाज से अस्पताल देश के दूसरे बड़े अस्पतालों के मुकाबले फिसड्डी नजर आता है। विश्वस्तरीय डॉक्टरों की टीम होने के बाद भी अस्पताल कई मायनों में पिछड़ा है, लेकिन मोदीराज में अस्पताल के दिन बदलने लगे हैं। अस्पताल को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी चल रही है। ऐसी व्यवस्था हो रही है कि अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

डॉक्टर को दिखाने के लिए लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। दलालों के दलदल में अब मरीज और उनके परिजन नहीं फंसेंगे। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज संभव होगा। दरअसल टेक्नोलॉजी के जरिए अस्पताल की पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी हो रही है। कुल मिलाकर कहा जाये तो सरसुंदर लाल अस्पताल के अच्छे दिन आने वाले हैं। अपने वादे को निभाते हुए मोदी सरकार ने बीएचयू पर तोहफों की बरसात की है। हालांकि इस अस्पताल को एम्स का दर्जा तो हासिल नहीं हुआ, लेकिन अब एम्स जैसी सभी सुविधाएं मिलने लगेगी।

स्थानीय सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीएचयू अस्पताल को लेकर शुरू से ही संजिदा हैं। इस अस्पताल का कायाकल्प उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था। राजनीतिक कारणों से इसे एम्स का दर्जा तो हासिल नहीं हो पाया, लेकिन सरकार की कोशिशों ने इस अस्पताल को एम्स की बराबरी पर जरूर पहुंचा दिया। यही कारण है कि जब पिछले दिनों बीएचयू और एम्स के बीच समझौता पत्र हस्तांतरित हुआ तो कैबिनेट के दिग्गज मंत्रियों की फौज बीएचयू पहुंची। इस समझौते के साथ ही सर सुंदर लाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर अब स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन हो गया। इसके साथ ही संस्थान में एम्स जैसी सुविधाओं के लिए रास्ता भी खुल गया।

बीएचयू अस्पताल को एम्स जैसी सुविधाएं हासिल होने के बाद मरीजों को मुफ्त जांच के साथ ही उपचार की सुविधाएं हासिल हो सकेंगी। उपचार एव जांच उपकरण बढ़ेंगे। साथ ही उच्च कोटि के शोध कार्य भी होंगे। मौजूदा समय में आईएमएम के दोनों अस्पतालों को प्रति बेड दो लाख के हिसाब से करीब 30 करोड़ रुपए का फंड मिलता है, लेकिन अब प्रति बेड 20 लाख का सालाना बजट है। इस तरह दोनों अस्पतालों का फंड करीब 500 करोड़ रुपए हो जाएगा। मरीजों को होने वाली परेशानी को देखते हुए 700 नए बेड लगाने की व्यवस्था की जा रही है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ की कमी को देखते हुए जल्द ही 2500 नई भर्तियां की जाएंगी।

ऑनलाइन पेमेंट और बुकिंग की व्यवस्था

बीएचयू में इस नए बदलाव का असर भी दिखने लगा है। अब डिजिटेलाइजेशन का काम भी जोरों पर है। इसके तहत अब मरीजों को जांच की राशि जमा करने के लिए दौड़ भाग करने की जरुरत नहीं है। वह एक बार जब 20 रुपए की पर्ची कटाएंगे बार कोड के माध्यम से उसमें अधिक राशि भी जमा करा सकते हैं।

इसके बाद जब वे जांच कराने जाएंगे तो संबंधित लैब या ऑफिस से ही आनलाइन भुगतान कर सकते हैं। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पर्ची को नई डिजाइन देने और बार व क्यूआर कोड डालने की तैयारी चल रही है। दरअसल बीएचयू में प्रतिदिन लगभग पांच हजार मरीज आते हैं जिनमें से लगभग पचास प्रतिशत मरीजों को जांच के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है। न सिर्फ जांच के लिए बल्कि पर्ची कटवाने के लिए भी। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में एप बनकर तैयार होने के बाद अब डिजिटल कार्ड भी बनकर तैयार हो गया है। एप से जहां घर बैठे लोग ओपीडी में नंबर लगवा सकेंगे वहीं डिजिटल कार्ड से आनलाइन पेमेंट होगा। इसके बाद जांच, दवा आदि का जो भी खर्च होगा मरीज इसी के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। बताया कि आने वाले दिनों में और कई नई योजनाएं भी शुरू की जाएंगी।

बच्चों के लिए विशेष क्लीनिक

अस्पताल में अब बच्चों के लिए विशेष क्लीनिक चलवाई जाएगी। इसमें अस्पताल आने वाले बच्चों की फेफड़े संबंधी बीमारियों का इलाज कराया जाएगा। बाल रोग विभाग की ओर से हर शुक्रवार सुबह 10 से 1 बजे तक यह क्लीनिक चलवाई जाएगी। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले हर दिन पांच हजार मरीजों में करीब 10 प्रतिशत ऐसे बच्चे होते हैं, जो पेट संबंधी, हृदय रोग, फेफड़ा रोग आदि से पीडि़त होते हैं। अब बाल रोग विभाग की ओर से जो विशेष सुविधा शुरू कराई जा रही है, इसके तहत हर शुक्रवार को तीन घंटे तक बाल रोग विभाग में पल्मोनोलॉजी क्लीनिक चलेगी। इसके तहत फेफड़े संबंधी (अस्थमा, दमा, निमोनिया, टीबी, एलर्जी आदि) बीमारियों से ग्रसित बच्चों का इलाज होगा।

विभागाध्यक्ष प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि इसके लिए डॉ.सुनील कुमार राव को इंचार्ज बनाया गया है। इस तरह की क्लीनिक खुलने से अब बच्चों के परिजनों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। यही नहीं कैंसर पेशेंट के लिए भी बीएचयू में अलग से अस्पताल बनाया जा रहा है। माना जा रहा है कि कैंसर अस्पताल बनने के बाद पूर्वांचल की एक बड़ी आबादी को दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। पूर्वांचल में अब तक कैंसर के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। इसी के मद्देनजर बीएचयू अस्पताल के अंदर ही अब 300 बेड का नया भवन बनाया जा रहा है।

सालों से चल रहा था आंदोलन

आईएमएस बीएचयू को एम्स के बराबर सुविधा देने के लिए सालों से आंदोलन चल रहा है। यहां के डॉक्टर लगातार इसे लेकर मुहिम छेड़े हुए थे, लेकिन सरकार और बीएचयू प्रशासन के लचर रवैये के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा था। मोदी सरकार बनने के बाद बीएचयू के ख्वाबों को पंख लग गया। स्थानीय सांसद होने के नाते मोदी ने बीएचयू अस्पताल की समस्याओं को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया। यही नहीं बीएचयू के कुलपति ने भी इसे लेकर सकारात्मक पहल की, जिसके कारण यह संभव हो पाया। सबसे पहले हृदय रोग विभाग के डॉक्टर ओमशंकर ने तीन मार्च 2014 को बीएचयू को एम्स का दर्जा देने के लिए आंदोलन की शुरूआत की थी। इसके बाद 2 जून 2018 को नई दिल्ली में पहली बैठक हुई। 5 जून को दूसरी बैठक हुई। 13-14 जून को एम्स और बीएचयू के बीच मैराथन बैठक हुई। 19 जून को दिल्ली में ही समझौते पर हस्ताक्षर हुआ।

हाईटेक व्यवस्था से लैस होगा अस्पताल

आईएमस को हाईटेक करने के लिए टेक्नलॉजी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत अब एडवांस एमआरआई, सीटी स्कैन, कैथ लैब और बेड होंगे। साथ ही 24 घंटे राउंड टेबल एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड सहित तमाम जांच और इलाज मुफ्त में दिया जाएगा। इसी तरह इमरजेंसी वार्ड व ओपीडी के मरीजों की मुफ्त जांच और आपरेशन होगा। इसके अलावा अध्यापक, कर्मचारी, नर्स, रेजिडेंट के लिए आवास बनाए जाएंगे। साथ ही करीब 2 हजार बेड की धर्मशाला भी बनेगी। यही नहीं 1400 सीट वाला कन्वेंशन सेंटर और चार सपोर्टिंग हाल भी प्रस्तावित है। मेहमानों के लिए 30 सूट वाला डीलक्स गेस्ट हाउस, रिसर्च के लिए बड़ी विंग, एनिमल हाउस, वर्टिकल मूवलेबल पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है।

बताया जा रहा है कि मोदी सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर है। आईएमएस बीएचयू को एम्स जैसा संस्थान बनाने के क्रम में हर 15 दिन में रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट पर सीधे मानव संसाधन मंत्रालय की नजर होगी। हर छोटी-बड़ी बाधा को तत्काल दूर किया जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद बीएचयू में भी खुशी का माहौल है। माना जा रहा है कि सरकार का ये फैसला मील का पत्थर साबित होगा। इससे मेडिकल एजुकेशन, मेडिकल ट्रेनिंग और पूर्वांचल और बिहार के मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कई गुना इजाफा होगा।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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